30 नवंबर 2025 को 02:12 pm बजे
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पचहत्तर के हुए विभूति — साहित्य जगत ने किया किस्सा लोकतंत्र के लेखक और यूपी के पूर्व डीजीपी का सम्मान

पचहत्तर के हुए विभूति — साहित्य जगत ने किया किस्सा लोकतंत्र के लेखक और यूपी के पूर्व डीजीपी का सम्मान

नई दिल्लीः वर्तमान साहित्य पत्रिका के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध साहित्यकार विभूति नारायण राय के 75 वर्ष पूर्ण होने पर सिविल सर्विसेज इंस्टिट्यूट, कस्तूरबा गांधी मार्ग में एक गरिमामयी गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत विभूति नारायण राय पर केंद्रित पत्रिका ‘रचनाक्रम’ के विमोचन के साथ हुई।

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मुख्य अतिथि दैनिक हिंदुस्तान के संपादक शशि शेखर ने 1980 से चली आ रही मित्रता को याद करते हुए कहा कि जीवन बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं। उन्होंने राय के सक्रिय और कर्मप्रधान व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि ‘मेरे और राय साहब के बीच एक इलाहाबाद ज़िंदा है’। उन्होंने इच्छा जताई कि राय अपने कुलपति कार्यकाल पर एक पुस्तक लिखें।

प्रलेस उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष रघुवंश मणि ने कहा कि राय साहित्यकार होने के साथ श्रेष्ठ मनुष्य भी हैं। उन्होंने कहा कि कुलपति रहते हुए राय ने विश्वविद्यालय को ठोस आधार प्रदान किया और एक लेखक के रूप में उनकी पहचान स्मरणीय रहेगी।

आनंद मालवीय ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ‘बंगाली टोला’ उपन्यास की प्रतीक्षा है।
सुरेंद्र राही, कार्यकारी अध्यक्ष प्रलेस इलाहाबाद ने कामना की कि वे शतायु होकर सक्रिय रहें।
संजय सहाय, संपादक हंस, ने कहा कि राय के साथ अच्छाइयों का सिलसिला निरंतर बना रहा।
वरिष्ठ कवि कमलेश ने 42 साल पुरानी मित्रता को स्मरण करते हुए कहा कि राय साहित्य को सिर्फ़ लिखते ही नहीं, निभाते भी हैं।
मनोज मोहन ने उन्हें नायक जैसा व्यक्तित्व बताया।
शंकर जी, संपादक परिकथा, ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी राय सक्रिय हैं और परिणामों की चिंता किए बिना अपनी राह पर चलते रहे हैं।
आनंद शुक्ल ने कहा कि वे यारों के यार हैं और जन्मशती समारोह जैसे सांस्कृतिक आयोजनों की परंपरा स्थापित की।
देवेन्द्र धर ने उनके सहृदय व्यक्तित्व की चर्चा की।

विभूति नारायण राय ने अपने वक्तव्य में कहा कि उन्होंने जीवन को भरपूर जिया है और जो स्नेह मिला है, वह उनके लिए संतोष का विषय है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुधीश पचौरी ने की। उन्होंने 1972 से चली मित्रता, साहित्यिक रुझान और राय के उपन्यास ‘शहर में कर्फ़्यू’ पर फ़िल्म बन सकने की संभावना का उल्लेख किया।
संपादक संजय श्रीवास्तव, हंस की प्रबंध संपादक रचना यादव तथा रचनाक्रम के संपादक अशोक मिश्र ने भी विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर प्रो. दुर्गा प्रसाद गुप्त, अजेय कुमार, देवेन्द्र धर, डा. हरिश्चन्द्र अग्रवाल, सतीश धर, हीरालाल नागर, शोभा अक्षर, छाया चंद्रा, आनंद मालवीय, सुरेन्द्र राही, प्रो. आनंद शुक्ल, मनोज मोहन, प्रकर्ष मालवीय सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार व बुद्धिजीवी मौजूद रहे।

स्वागत शशांक राय ने किया। पद्मा राय, पुत्र शशांक, पुत्रवधू शिवानी सहित पूरा परिवार उपस्थित रहा। संचालन संध्या नवोदिता ने किया और धन्यवाद ज्ञापन ज्ञानचंद बागड़ी ने किया।