
बीएचयू आयुर्वेद संकाय में 2007 से हो रहे गलत CAS प्रमोशन पर घमासान, पीएच.डी. के बिना प्रमोशन को बताया अवैध
बीएचयू आयुर्वेद संकाय में 2007 से हो रहे गलत CAS प्रमोशन पर घमासान, पीएच.डी. के बिना प्रमोशन को बताया अवैध
विद्वत परिषद के प्रस्ताव पर विजिटर के अधिकार अतिक्रमण का आरोप, जांच व रिकवरी की मांग
वाराणसीः काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद संकाय में कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत प्रमोशन में पीएच.डी. की अनिवार्यता समाप्त किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। पूर्व छात्र संघ महामंत्री डॉ. सूबेदार सिंह ने कार्यकारिणी परिषद को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि यूजीसी नियमों के विपरीत प्रशासनिक आदेश जारी कर बिना पीएच.डी. प्रमोशन देकर आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।
पत्र में कहा गया है कि यूजीसी रेगुलेशन 1998 व 2010 के अनुसार उच्च पदों पर प्रमोशन के लिए पीएच.डी. अनिवार्य है, बावजूद इसके आयुर्वेद संकाय की पीपीसी से प्रस्ताव पारित कर नियमों में शिथिलता दी गई। आरोप है कि 01/02 दिसंबर 2025 को डिप्टी रजिस्ट्रार (एकेडमिक) के पत्र के जरिए बिना विजिटर (राष्ट्रपति) की स्वीकृति के आदेश जारी कर दिए गए, जो अधिकारों का अतिक्रमण है।
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि 2007 या उससे पहले से कुछ शिक्षकों को अवैध रूप से प्रमोशन व आर्थिक लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच, दोषियों पर विधिक कार्रवाई, 1998 से अवैध लाभ की करोड़ों रुपये की रिकवरी तथा संबंधित शिक्षकों को मूल पद पर भेजने की मांग की है।
पी एच डी के नियम में शिथिलता से हुए गलत प्रमोशन पर वरिष्ठता के लिए आयुर्वेद के शिक्षकों द्वारा भी कुलपति से शिकायत किया जा चुका है।


