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बीएचयू को साहीवाल नस्ल संरक्षण में बड़ी सफलता, एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक से चार गायें गर्भवती
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बीएचयू को साहीवाल नस्ल संरक्षण में बड़ी सफलता, एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक से चार गायें गर्भवती

December 24, 2025
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वाराणसी: स्वदेशी गायों की नस्लों के संरक्षण की दिशा में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। “आधुनिक तकनीकों और सरोगेसी के माध्यम से स्वदेशी उत्कृष्ट गाय नस्लों का संरक्षण” परियोजना के अंतर्गत बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने साहीवाल नस्ल के संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है।

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राजीव गांधी दक्षिण परिसर (आरजीएससी), बरकछा, मिर्ज़ापुर स्थित डेयरी फार्म में मल्टीपल ओव्यूलेशन एम्ब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी (MOET) के माध्यम से चार देशी (नॉन-डिस्क्रिप्ट) गायों में उच्च गुणवत्ता वाले साहीवाल भ्रूणों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप ये सभी गायें गर्भवती पाई गई हैं।

इस प्रक्रिया में सेक्स-सॉर्टेड सीमेन का उपयोग किया गया है, जिससे लगभग 95 प्रतिशत संभावना है कि जन्म लेने वाले बछड़े मादा होंगे और उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले होंगे। इन गायों से मई और जून 2026 में बछड़ों के जन्म की संभावना है, जिससे डेयरी फार्म में शुद्ध साहीवाल नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ेगी।

यह परियोजना डॉ. मनीष कुमार (प्रधान अन्वेषक) के नेतृत्व में, डॉ. कौस्तुभ किशोर सराफ और डॉ. अजीत सिंह (सह-अन्वेषक) द्वारा संचालित की जा रही है। यह तकनीक यदि विंध्य क्षेत्र के दुग्ध उत्पादक किसानों तक पहुँचाई जाती है, तो इससे सतत डेयरी विकास, ग्रामीण परिवारों की आर्थिक उन्नति और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के राष्ट्रीय लक्ष्यों को बल मिलेगा, जो आत्मनिर्भर भारत के विज़न के अनुरूप है।

आरजीएससी के प्रोफेसर-इन-चार्ज प्रो. बी. एम. एन. कुमार ने परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय नियमों के अंतर्गत इस प्रकार के अनुसंधान और जनकल्याणकारी कार्यों को पूर्ण संस्थागत सहयोग दिया जाता रहेगा। उल्लेखनीय है कि डेयरी फार्म में भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रिया तत्कालीन प्रोफेसर-इन-चार्ज प्रो. वी. के. मिश्रा के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में सम्पन्न हुई।