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ज्ञापन सौंपते हुए मजदूर नेतागण।

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काम के घंटे आठ और वेतन 30 हजार करवाने को लेकर डीसी दफ्तर पर प्रदर्शन

June 9, 2026
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लुधियाणा: आज डी.सी. लुधियाणा के दफ़्तर पर 8 घंटे कार्यदिवस, न्यूनतम वेतन 30 हज़ार और अन्य माँगें लागू करवाने के लिए 'कारख़ाना मज़दूर यूनियन' और 'टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन' के आह्वान पर रोषपूर्ण प्रदर्शन किया गया। मज़दूरों की जायज़ मांगों और संघर्ष को समर्थन देते हुए अनेक अन्य जनवादी संगठनों द्वारा रोष प्रदर्शन में शिरकत की गई।

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डी.सी. लुधियाणा को सौंपे गए माँग पत्र के जरिए संगठनों ने माँग की कि आठ घंटे कार्य दिवस क़ानून सख्ती से लागू किया जाए, मासिक न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये लागू हो (पीस-रेट/दिहाड़ी भी इसी के मुताबिक़ तय हो), ओवरटाइम का दुगना भुगतान, महिला मज़दूरों को पुरुष मज़दूरों के बराबर वेतन, साप्ताहिक, सरकारी, त्योहार, बीमारी आदि की वेतन सहित छुट्टियाँसमेत सभी कानूनी श्रम अधिकार लागू किए जाएं, मज़दूर विरोधी चार नएलेबर कोड (श्रम संहिताएं) रद्द किए जाएं, कमरतोड़ महँगाई पर नकेल कसी जाए। देश में विभिन्न स्थानों पर जारी मज़दूरों की हड़तालों का समर्थन करते हुए माँग की गई है कि सरकारें मज़दूर संघर्ष का दमन बंद करें, गिरफ़्तार मज़दूरों, मज़दूर नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करने की माँग भी की गई। पंजाब समेत देश भर में संघर्षशील मज़दूर-मुलाजिमों के बढ़ते जा रहे दमन का सख्त विरोध किया गया।

रोष प्रदर्शन को कारख़ाना मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष लखविंदर सिंह, टेक्सटाइल हौज़री कामगार यूनियन के अध्यक्ष जगदीश सिंह, मोल्डर एंड स्टील वर्कर यूनियन के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह, नौजवान भारत सभा की नेता रविंदर कौर, भारतीय किसान यूनियन एकता उग्रहां के जिला सचिव सौदागर सिंह घुडानी, पंजाब लोक सभ्याचारक मंच (सांस्कृतिक मंच) से कस्तूरी लाल जी, संघर्षशील मजदूर मोर्चा से आरज़ू खान, मजदूर यूनियन, खन्ना समराला से मलकीत सिंह और सेवा केंद्र कर्मचारी यूनियन से हरप्रीत कौर ने संबोधित किया।

इसके अलावा लोक पक्षी सिलाई जनता पार्टी से मेहंदी, बुटीक यूनियन से अली मास्टर और लोक एकता संगठन से गल्लर चौहान जी ने रोष प्रदर्शन में शामिल होकर मजदूर मांगों का समर्थन किया।

नौजवान भारत सभा की दिशा और मौसम द्वारा इंकलाबी गीत ‘बोल मजूरे हल्ला बोल’ और ‘धरती को सोना बनाने वाले भाई रे’ पेश किए गए। कारख़ाना मज़दूर यूनियन के नेता साथी रमेश ने भी इंकलाबी गीत पेश किया।

वक्ताओं ने कहा कि पूंजीपतियों द्वारा मज़दूरों की बेरहमी से लूट की जा रही है, कानूनी श्रम अधिकार तक लागू नहीं किए जा रहे हैं। दिनों-दिन बढ़ रही महंगाई ने मज़दूरों की हालत बदतर कर रखी है। मज़दूरों की इस बुरी हालत पर पंजाब सरकार सहित भारत और अन्य राज्यों की सरकारों ने आँखें मूँद रखी हैं। इसलिए मज़दूरों के पास एकजुट संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं है। इसी वजह से आज मज़दूर तपती गर्मी में डी.सी. दफ़्तर के सामने इकट्ठा होने के लिए मजबूर हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ़ मज़दूर 12-14 घंटे का लंबा कार्य दिवस फैक्ट्री में लगाकर अपनी हड्डियां गला रहे हैं और नाममात्र के वेतन में गुज़ारा करने के लिए मजबूर हैं। पेट्रोल-डीज़ल, रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के कारण चारों तरफ़ से महंगाई बढ़ती जा रही है। देश में पिछले महीनों से जारी मज़दूर संघर्ष ने कई राज्यों की सरकारों को न्यूनतम वेतन में वृद्धि करने के लिए मजबूर किया है। विभिन्न कारख़ाना मालिक वेतन वृद्धि करने के लिए मजबूर हुए हैं। पंजाब सरकार ने भी मज़बूरीवश न्यूनतम वेतन में 15 फ़ीसदी वृद्धि का ऐलान किया है। परंतु यह वृद्धि ज़रूरत से बहुत कम है। पूंजीपतियों द्वारा न्यूनतम वेतन और अन्य कानूनी श्रम अधिकार लागू भी नहीं किए जा रहे हैं, लेकिन पंजाब सरकार द्वारा पूंजीपतियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसलिए ज़्यादातर मज़दूरों के लिए पंजाब सरकार का यह ऐलान कागज़ी कार्रवाई के सिवा कुछ नहीं है। आगे नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने अपना जन-विरोधी रवैया इसी तरह बनाए रखा, तो मज़दूर और अधिक मजबूती के साथ एकजुट होकर बड़े संघर्षों की राह पर चलेंगे जिसके ज़िम्मेदार पूंजीपति वर्ग और सरकारें होंगी।

जारीकर्ता,

जगदीश सिंह,

अध्यक्ष, टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब

संपर्क नंबर : 98886-55663



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