
पुलिस व प्रशासनिक दमन का विरोध करने हेतु संयुक्त कार्रवाई के लिए फौरी तौर पर एकजुट होना चाहिए
मानेसर क्षेत्र के संघर्षरत मजदूरों के समर्थन में उठ खड़े हों, मजदूर संघर्षों पर पुलिस दमन का विरोध करें!पानीपत रिफाइनरी के मजदूरों द्वारा अपने अधिकारों के लिए शुरू संघर्ष देश भर में फैलते हुए 2 अप्रैल को गुरुग्राम के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र के होंडा प्राइवेट लिमिटेड में पहुंचा और अब इस पूरे क्षेत्र में मज़दूर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
होंडा, मुंजाल शोवा, सत्यम ऑटो कम्पोनेंट, रूप पॉलीमर्स, ऋचा ग्लोबल, मॉडलमा एक्सपोर्ट, रीको, सुपराजीत इंजीनियरिंग, सिरमा SGS टेक्नॉलजी, फोरजा मेडी प्राइवेट लिमिटेड, आदि के मजदूर भी वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर हड़ताल पर उतर आए हैं। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों की स्थिति दिन-प्रतिदिन और भी कठिन होती जा रही है। इनके खिलाफ मजदूर संघर्ष के रास्ते पर उतरने लगे हैं यह बेहद स्वागत योग्य है। मज़दूरों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। रोज़मर्रा की ज़रूरतों के साथ-साथ रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं। युद्धों के कारण ईंधन और गैस की कीमतों में जमाखोरों-मुनाफाखोरों द्वारा की गई बेहद बढ़ोतरी और इसकी भारी किल्लत ने उनकी तकलीफ़ों को और बढ़ा दिया है। ईलाज और बच्चों की शिक्षा पर तेजी से बढ़ता खर्च भी मज़दूरों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। 12-12 घंटे काम करने के बाद भी इतने कम वेतन में परिवार का पालन-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और अन्य ज़रूरतों को पूरा करना लगभग असंभव हो गया है।
कंपनी मालिकों द्वारा नियम मुताबिक ओवरटाइम का पैसा भी नहीं दिया जाता। ऐसे हालात में मज़दूरों के पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।मज़दूरों की मुख्य मांग वेतन बढ़ोतरी और नियम मुताबिक ओवरटाइम का दोगुना भुगतान है। उनका कहना है कि वर्तमान वेतन में गुज़ारा करना बेहद मुश्किल हो गया है। उनका साफ कहना है कि जब तक वेतन में उचित वृद्धि नहीं की जाती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। इस दौरान फैक्ट्री गेटों पर मज़दूरों की ज़बर्दस्त एकजुटता देखने को मिली है।यह संघर्ष केवल मानेसर, रिफाइनरियों या पावर प्लांटों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति दयनीय बनी हुई है और इससे उनमें विक्षोभ बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति को बदलने के लिए मजदूरों को ख़ुद ही संगठित होकर संघर्ष के मैदान में उतरना होगा, यह भी उनके सामने पूरी तरह स्पष्ट है। इसीलिए आज विभिन्न स्थानों पर स्वतःस्फूर्त रूप से मजदूर आंदोलनों का उभार हो रहा है।मानेसर क्षेत्र के विभिन्न कारखानों में फैल रहे श्रमिकों के मजदूरी वृद्धि के आंदोलन पर पूँजीवादी सत्ता कंपनी मालिकों के बचाव में उत्तर आई है। हरियाणा पुलिस ने श्रमिकों पर दमन शुरू कर दिया है। श्रमिकों को मौखिक रूप से कुछ झूठे वादे करके जबरदस्ती बल प्रयोग द्वारा विरोध से हटाया गया। श्रमिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को धरनास्थल से गिरफ्तार किया गया. कुछ कार्यकर्ताओं को उनके घरों से उठाकर ले जाकर पुलिस ने विभिन्न तरीकों से इन श्रमिक संगठनों के कार्यकर्ताओं पर डर पैदा करने की कोशिश की। श्रमिकों के न्यायसंगत आंदोलन को तोड़ने के लिए हरियाणा पुलिस यह मनमानी कर रही है। श्रमिकों की न्यायसंगत मांगों के स्वतःस्फूर्त आंदोलन पर यह दमन, और श्रमिकों के आंदोलन के पक्ष में खड़े होकर आवाज उठाने के अपराध में श्रमिक संगठनों के कार्यकर्ताओं पर दमन की हम तीव्र निंदा करते हैं और अपने संघर्षरत मजदूर साथियों के साथ एकजुटता हेतु सभी मजदूरों का आह्वान करते हैं। सभी संघर्षशील मजदूर संगठनों को संघर्षरत मजदूरों के समर्थन में मजदूरों का व्यापक प्रतिरोध खड़ा करने और पुलिस व प्रशासनिक दमन का विरोध करने हेतु संयुक्त कार्रवाई हेतु फौरी तौर पर एकजुट होना चाहिए।दुनिया के मजदूरों, एक हो!
क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा
टिप्पणियाँ (Comments)
एक टिप्पणी जोड़ें
कमेंट करने के लिए लॉगिन करें



