
काशी के महात्म्य पर चर्चा --- सुल्तानपुर जिले की पावन भूमि पर अवतरित हुए डॉ. मोहम्मद आरिफ की फेसबुक वॉल से
काशी के महात्म्य पर चर्चा
अवसर था डॉ लेनिन रघुवंशी,चंद्र मिश्र और श्रुति नागवंशी की अंग्रेजी में सद्यः प्रकाशित पुस्तक "Kashi".
साथ थे काशी के मर्म के ज्ञाता विद्वत जन -- वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य, अजय राय,कुमार विजय, अध्यक्षता कर रहे ज्योतिषाचार्य प्रो नागेंद्र पाण्डेय जी और एकाग्र श्रोतागण
गंभीर चर्चा के दौरान कई सवाल भी उठे. सहज- असहज अनुभूति के साथ इस महत्वपूर्ण चर्चा के दूरगामी परिणाम होने की संभावना बलवती है.
लेखक गण बधाई के पात्र हैं जिन्होंने ऐसे समय में पुस्तक का प्रकाशन किया जब विविधता,सह-अस्तित्व और सहिष्णुता को नकारने की प्रवृत्ति चरम पर हैं. प्रेम की भारतीय संस्कृति को नफरती भाषा के जरिए घृणा में बदलने की कोशिश सार्वजनिक रूप से जारी है.दूसरे धर्मों के प्रति सहिष्णुता को तो दरकिनार कर दीजिए यहां तक कि काशी के गौरव कबीर, रैदास प्रेमचंद सहित सत्य, अहिंसा और सर्व धर्म समभाव के वैज्ञानिक गांधी समेत तमाम महापुरुष कटघरे में है. प्रश्न उठता है कि क्या ये वही देश है जो सर्वे भवंति सुखिन: और विश्व बंधुत्व के मूल मंत्र का हामी रहा है?
इन प्रश्नों के उत्तर खोजने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक पठनीय है.पुस्तक धर्म,कर्म,साहित्य और peopls history के जरिए पाठकों का ध्यान अवश्य आकर्षित करेगी. उम्मीद है कि हिंदी संस्करण आने से पुस्तक जन सामान्य तक पहुंच पाएगी जिसकी आज नितांत आवश्यकता है.
सबको सन्मति दे भगवान
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