
BHU: रस एवं काष्ठ औषधियों पर पारंपरिक विधि से प्रायोगिक कार्यशाला आयोजित
काशीः काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय अंतर्गत रस शास्त्र विभाग में आज पारंपरिक गुरुकुल परंपरा के अनुसार रस एवं काष्ठ औषधियों के निर्माण पर आधारित एक दिवसीय प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आयुर्वेद की प्राचीन विधाओं को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रोफेसर के. के. त्रिपाठी (पूर्व विभागाध्यक्ष, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन, आईएमएस-बीएचयू) रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर अमित पात्रा (निदेशक, आईआईटी-बीएचयू) उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व डीन आयुर्वेद संकाय प्रोफेसर वाई. बी. त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर एच. एच. अवस्थी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर संजय गुप्ता (डीन, फैकल्टी ऑफ मेडिसिन, आईएमएस-बीएचयू) ने की।
कार्यक्रम का संचालन ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन प्रोफेसर नम्रता जोशी (विभागाध्यक्ष, रस शास्त्र) ने किया। आयोजन सचिव के रूप में डॉ. लक्ष्मी नारायण गुप्ता, डॉ. रोहित शर्मा, डॉ. गुरुप्रसाद, डॉ. पी. एस. पांडे तथा समन्वयक डॉ. शिवाक्षी शर्मा और डॉ. अनुज राणा की सक्रिय भूमिका रही। कार्यशाला के पहले दिन लगभग 97 शोधार्थियों और प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर अमित पात्रा ने कहा कि जीवविज्ञान को तकनीक के साथ जोड़कर किए गए शोध से देश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिल सकती है। आईआईटी-बीएचयू और आईएमएस जैसे संस्थानों के समन्वय से भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के माध्यम से नए शोध आयाम स्थापित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि आईआईटी-बीएचयू और आईएमएस में नियमित मासिक सेमिनार आयोजित किए जाएंगे, जिससे आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी।
मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रोफेसर के. के. त्रिपाठी ने कहा कि विभिन्न विषयों के आपसी सहयोग से ही आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी आयुर्वेद प्रभावी और सुलभ उपचार प्रदान कर सकता है। ऋग्वेद और अथर्ववेद से विकसित आयुर्वेद आज पूरी दुनिया में अपनी प्रमाणिकता सिद्ध कर चुका है।
पूर्व डीन प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी ने कहा कि इस कार्यशाला में कंपनी, तकनीकी संस्थान और शिक्षक एक मंच पर आए हैं, जो सरकार की मंशा के अनुरूप है। उन्होंने रस शास्त्र की औषधियों के सूक्ष्म गुणों और मानकों को नैनो तकनीक से जोड़ते हुए इसे वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर संजय गुप्ता ने कहा कि रस शास्त्र विभाग, आयुर्वेद संकाय, आईएमएस और आईआईटी को मिलकर नए शोध आयाम विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शोध से यह सिद्ध हो चुका है कि आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण नैनो तकनीक के माध्यम से होता है, और यदि मानक प्रक्रिया से निर्माण किया जाए तो दुष्प्रभाव की आशंका नहीं रहती।
ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन प्रोफेसर नम्रता जोशी ने कहा कि समाज में आयुर्वेदिक औषधियों को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। इस कार्यशाला के माध्यम से छात्रों को औषधियों के निर्माण, परीक्षण और मानकीकरण की सही प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस अवसर पर वैद्य सुशील कुमार दूबे, डॉ. पी. एस. पांडे, डॉ. लक्ष्मी नारायण गुप्ता, प्रोफेसर वी. एम. सिंह, प्रोफेसर नीरु नथानी, प्रोफेसर संगीता गहलोत, डॉ. शशिरेखा, प्रोफेसर जे. एस. त्रिपाठी, प्रोफेसर रानी सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और कर्मचारी उपस्थित रहे।
भवदीय
वैद्य सुशील कुमार दूबे
कार्यक्रम मीडिया प्रभारी
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