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Health

8 साल पहले बिछड़ा 'लाल' मिला: KGMU के डॉक्टरों ने बचाई जान, तकनीक और सेवा ने मिलाया परिवार

5 जनवरी 202613
मरीज पीली टीशर्ट में है बगल में उसकी मां और उसके भाई और एवं अन्य परिवार गण है।
मरीज पीली टीशर्ट में है बगल में उसकी मां और उसके भाई और एवं अन्य परिवार गण है।

हमारा मोर्चा प्रतिनिधि

लखनऊः लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। 8 साल पहले झारखंड से लापता हुआ एक बालक, जो अब युवक हो चुका है, केजीएमयू के डॉक्टरों और स्टाफ की तत्परता के कारण न केवल मौत के मुंह से बाहर आया, बल्कि अपने परिवार से भी मिल सका।

इलाज करने वाले रेजिडेंट्स और नर्सिंग ऑफिसर्स।
इलाज करने वाले रेजिडेंट्स और नर्सिंग ऑफिसर्स।

हादसे से अस्पताल तक का सफर

घटना की शुरुआत 22 दिसंबर को हुई, जब बाराबंकी के एक जागरूक राहगीर को रेलवे ट्रैक के पास एक अज्ञात युवक घायल और बेहोश अवस्था में मिला। राहगीर ने तत्परता दिखाते हुए उसे केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। युवक की स्थिति अत्यंत गंभीर थी; सीटी स्कैन में ब्रेन हेमरेज (ब्लीडिंग) की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए उसका आपातकालीन ऑपरेशन किया और उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया।

धुंधली यादों ने दिखाया घर का रास्ता

इलाज के दौरान जब युवक को होश आया, तो उसने टूटे-फूटे शब्दों में अपने परिजनों (डिजिल सोरेन, दखिन सोरेन और कनई सोरेन) के नाम लिए। धीरे-धीरे उसने बताया कि वह झारखंड के चिकुलिया थाना अंतर्गत बर्डी कानपुर गांव का निवासी है।

न्यूरोसर्जरी विभाग के टेक्नीशियन श्री अतुल उपाध्याय ने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए झारखंड पुलिस से संपर्क साधा। कड़ी मशक्कत के बाद युवक के परिवार का पता चला। परिजनों ने बताया कि यह उनका भाई है जो 8 साल पहले महज 12 वर्ष की आयु में लापता हो गया था। मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर होने के कारण वह घर वापस नहीं लौट पाया था।

टीम की मेहनत और सुखद मिलाप

मरीज की देखभाल में न्यूरोसर्जरी ट्रॉमा सेंटर (फर्स्ट फ्लोर) की सिस्टर इंचार्ज रजनी सिंह और उनकी पूरी टीम ने दिन-रात सेवा की। 3 जनवरी को जब परिजन आधार कार्ड लेकर लखनऊ पहुंचे, तो 8 साल का लंबा इंतजार खत्म हुआ। युवक को आधिकारिक रूप से उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

कुलपति का संदेश: केजीएमयू की वाइस चांसलर प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने इस नेक कार्य के लिए पूरी न्यूरोसर्जरी टीम की सराहना की है। उन्होंने उस राहगीर को भी बधाई दी जिसने घायल को अस्पताल पहुँचाया। कुलपति ने कहा कि पूरी तन्मयता से मुफ्त इलाज करना और मरीज को उसके परिवार तक पहुँचाना केजीएमयू के सेवा भाव को दर्शाता है।

एक बड़ी उपलब्धि

गौरतलब है कि केजीएमयू का न्यूरोसर्जरी विभाग अब तक 200 से अधिक लावारिस (Destitute) मरीजों को उनके परिवार से मिलाने में सफल रहा है। यह घटना तकनीक, चिकित्सा और मानवीय संवेदनाओं के अद्भुत संगम का उदाहरण है।