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प्रोफेसर मनोज कुमार वर्मा को सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अध्यक्षता व प्लेनरी व्याख्यान हेतु आमंत्रण
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प्रोफेसर मनोज कुमार वर्मा को सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अध्यक्षता व प्लेनरी व्याख्यान हेतु आमंत्रण

February 27, 2026
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वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने एक बार फिर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जगत में अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर मनोज कुमार वर्मा को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए एक 'मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट' आवंटित किया गया है। विशेषज्ञ समिति की कठोर एवं बहुस्तरीय अकादमिक समीक्षा के उपरांत प्रदान की गई यह स्वीकृति डॉ. वर्मा के शोध की बौद्धिक गंभीरता, पद्धतिगत सुदृढ़ता तथा सामाजिक प्रासंगिकता का सशक्त प्रमाण मानी जा रही है।

आदिवासी समुदायों पर केंद्रित होगा शोध

प्रस्तावित शोध परियोजना ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित आदिवासी समुदायों के जीवन-संघर्ष, शैक्षिक पहुँच, संस्थागत संरचनाओं, सामाजिक गतिशीलता तथा बदलती आकांक्षाओं का गहन समाजशास्त्रीय विश्लेषण करेगी। यह अध्ययन सामाजिक न्याय, समान अवसर, तथा समावेशी विकास के विमर्श में एक महत्त्वपूर्ण बौद्धिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। शोध के निष्कर्ष न केवल अकादमिक जगत में नई दृष्टि प्रदान करेंगे, बल्कि नीति-निर्माण की दिशा में भी सार्थक योगदान देने की क्षमता रखते हैं।

विश्वविद्यालय परिसर में इस उपलब्धि को अत्यंत गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायी क्षण के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का मत है कि यह सफलता बीएचयू की समृद्ध शोध-परंपरा तथा सामाजिक प्रतिबद्धता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगी।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर अकादमिक नेतृत्व

राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ-साथ डॉ. वर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट सम्मान प्राप्त हुआ है। साउथ एशियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी द्वारा सिंगापुर एवं मलेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (दिनांक-08-03-2026 से 13-03-2026) में उन्हें अकादमिक सत्र की अध्यक्षता तथा प्लेनरी व्याख्यान देने हेतु आमंत्रित किया गया है साथ ही अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत करेंगे। विश्व के विभिन्न देशों से आए विद्वानों की उपस्थिति में उनका अकादमिक नेतृत्व न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, अपितु बीएचयू के लिए भी एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण क्षण है। स्पष्ट है कि यह उपलब्धि काशी हिंदू विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय सीमाओं से परे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

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