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युद्ध में मरते रहे हैं लाखों सैनिक अर्थात युवा और बलिष्ठ आबादी की दी जाती रही है कुर्बानी, इसे रोका कैसे जाए

कामता प्रसाद
कभी मैं भी मार्क्सवाद का अध्येता हुआ करता था और इस नाते जानता हूँ कि वर्ग-विभाजित समाज में निरंतर युद्ध हुआ करते थे। युद्ध का कारण संसाधनों पर कब्जा जमाना और प्रभुत्व हासिल करना हुआ करता था, जो कि बदस्तूर जारी है।
यहाँ पर काबिलेगौर यह बात है कि दसियों लाख की संख्या में मारे जाने वाले सैनिक आबादी का सबसे स्वस्थ और बलिष्ठ हिस्सा हुआ करते थे। और आज भी जारी लड़ाइयों में वही मारे जा रहे हैं। युद्ध रकेंगे कब जब समाज में वर्ग नहीं रहेंगे। ———————अभी इतना ही क्योंकि कंधे दर्द कर रहे हैं, कभी फुर्सत में इस लेख को पूरा करूँगा
