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बृजेश गंझू से संबंधित शिकायत पर यूपी मानवाधिकार आयोग ने केस नंबर जारी किया

वाराणसी। बृजेश गंझू से संबंधित शिकायत पर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने औपचारिक रूप से केस दर्ज करते हुए 20985/24/72/2026-ED पंजीकरण संख्या जारी की है। आयोग की ओर से शिकायतकर्ता को ईमेल के माध्यम से इसकी सूचना दी गई है।
आयोग के ईमेल में कहा गया है कि बृजेश गंझू से संबंधित शिकायत पर Case No. 20985/24/72/2026-ED पंजीकृत किया गया है और भविष्य में पत्राचार के लिए इस पंजीकरण संख्या का उपयोग किया जा सकता है।
इससे पहले शिकायतकर्ता कामता प्रसाद तिवारी के पत्र को आयोग ने Diary No. 18366/CR/2026 के रूप में दर्ज किया था। बाद में उसी शिकायत के संबंध में केस नंबर जारी किया गया।
केस के पंजीकरण का अर्थ यह है कि शिकायत अब आयोग के समक्ष एक औपचारिक प्रकरण के रूप में दर्ज है। हालांकि, आयोग के ईमेल में अभी यह उल्लेख नहीं है कि उसने पुलिस या प्रशासन को नोटिस जारी किया है, रिपोर्ट तलब की है अथवा स्वतंत्र जाँच का आदेश दिया है। इन बिंदुओं पर स्थिति आयोग के आगामी आदेश या कार्यवाही से स्पष्ट होगी।
मानवाधिकार संबंधी शिकायतों में आयोग संबंधित सरकारी अधिकारियों से रिपोर्ट या सूचना मांग सकता है और कानून के तहत आवश्यक होने पर जाँच भी कर सकता है। जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आयोग संबंधित सरकार या प्राधिकरण को उचित कार्रवाई अथवा क्षतिपूर्ति आदि के संबंध में सिफारिश कर सकता है।
शिकायतकर्ता का बृजेश गंझू से कोई पारिवारिक या व्यक्तिगत संबंध नहीं बताया गया है। शिकायत मानवाधिकार से जुड़े सवालों को लेकर आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई है। कानून के तहत मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में पीड़ित व्यक्ति के अलावा उसकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति भी शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
फिलहाल इस प्रकरण में अगली महत्वपूर्ण कार्रवाई आयोग के आदेश से स्पष्ट होगी। Case No. 20985/24/72/2026-ED के आधार पर आगे की कार्यवाही का पता लगाया जा सकेगा।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हमारा मोर्चा की ओर से भेजे गए ईमेल का संज्ञान लिया है। अब यह तो भविष्य की बात है कि हत्यारे विपिन राय के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है?
जिस तरह से लखनऊ में बैठे आला पुलिस अधिकारियों ने अलग से 2 लाख रुपये ईनाम देकर इस हत्यारे का मनोबल बढ़ाया है, वह यह साबित करता है कि देश में चल रहे जनांदोलनों को पहले तो बदनाम किया जाता है, फिर सुनियोजित तरीके से उनके अगुआ तत्वों को या तो जेल भेजा जाता है या फिर इसी तरह से निपटा दिया जाता है।
पूँजीवाद सड़कर बजबजा रहा है। विपिन राय इंसान होने की शर्त खो चुका है। पत्रकार के रूप में लंबे समय से नक्सल आंदोलन पर नजर रखने के नाते मैं जानता हूँ कि वे लोग भी कई बार सरकारी ढंग से ही बंदूक चलाते हैं और सैन्य बलों से जुड़े लोगों की बेवाएं राष्ट्रपति से परमवीर चक्र लेने जाया करती हैं।
Letter received from KAMTA PRASAD TIWARI has been diarised by SHRC as 18366/CR/2026. This diary number may be used for future reference, if any. Please do not reply or send any email at nhrc.india@nic.in
