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फर्जी मुठभेड़ में राजनीतिक कार्यकर्ता बृजेश गंझू को मार गिराने वाले एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय पर हो लीगल ऐक्शन, किया जाए बर्खास्त — भेजा जाए जेल

सेवा में,
माननीय मुख्य न्यायाधीश
सुप्रीम कोर्ट, भारत
वाराणसी एटीएस ने विपिन राय की अगुआई में राजनीतिक कार्यकर्ता बृजेश गंझू की फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी है। इसकी जानकारी हमारा मोर्चा को मीडिया के माध्यम से मिली है। एक सजग-न्यायप्रिय नागरिक और हमारा मोर्चा का कार्यकारी संपादक होने के नाते मैं देश की सर्वोच्च अदालत से मांग करता हूँ कि इस कत्ल की निष्पक्ष जाँच करवाई जाए और विपिन राय को बर्खास्त करके उसे तत्काल जेल भेजा जाए। मेरा नाम कामता प्रसाद तिवारी है, सिद्धांत के रूप में मैं भी निजी संपत्ति का विरोधी हूँ और निजी संपत्ति को परमपूज्य मानने वाले संविधान को लेकर भी मेरे कुछ प्रश्न हैं। लेकिन, यहाँ मुद्दे की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट तो संविधान को मानता है और संविधान किसी भी व्यक्ति की न्यायेतर हत्या को उचित नहीं ठहराता और न ही इसकी अनुमति देता है।
एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय से मेरी दो मुलाकातें हैं। पहली मुलाकात अनौपचारिक थी और दूसरी बार इसने मुझे पैरोकार भेजकर बुलाया था। पुलिस में इसकी भर्ती दरोगा के पद पर हुई थी। कहने की जरूरत नहीं कि रट्टा मारकर किसी तरह परीक्षा पास की होगी और तेल लगाकर बना होगा थानेदार। पूर्व आईपीएस संतोष सिंह का इसके ऊपर वरदहस्त रहा है।
इसकी शैक्षणिक-बौद्धिक क्षमता इतनी नहीं कि यह शहीद भगत सिंह के विचारों को समझ सके। जाति का भुंइहार है तो इंसानों को लेकर कितना सरोकारी होगा, इसको भी समझा जा सकता है। भुंइहार जाति का सुदृढ़ीकरण अंग्रेजों के काल में हुआ है और इनकी किन खूबियों के कारण हुआ है, कहने-बताने की जरूरत नहीं।
जिन राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर नक्सली होने का ठप्पा लगाकर उन्हें दैत्य की तरह से पेश किया जाता है, मानो वे किसी दूसरे ग्रह से आए हुए हैं, वे दरअसल धरती के सबसे खूबसूरत इंसान होते हैं। पहली मुलाकात में मैं इससे उन चंदाखोरों की शिकायत के साथ मिला था जो पुरखों की संपत्ति या बीवी की कमाई पर ऐक्टिविस्ट बनकर मौज कर रहे होते हैं और क्रांति-कर्म से उनका कोई वास्तविक लेना-देना नहीं होता। दूसरी बार जब इसने मुझे बुलवाया था तो कैमरे पर रिकार्डिंग करवा रहा था और वह भी मुझे प्रॉम्प्ट देते हुए। मेरी देह कमजोर है लेकिन गुस्सा बहुत आता है। उस वक्त मैंने खुद को सँभाला कि पहले यहाँ से बाहर निकलते हैं वर्ना कांड हो जाएगा। विपिन राय नामक हरामजादे की दिलचस्पी मुझसे माओवाद को समझने में कत्तई नहीं थी, यह तो बस इलाहाबाद के किसी स्टूडेंट लीडर देवेंद्र आजाद का इसी तरह से कत्ल कर देने का ख्वाहिशमंद था।
इसकी बैकग्राउंड के बारे में पता किया तो मालूम हुआ कि इसके पुरखों के पास काफी जमीन रही है जो ब्रिटिश काल में मिली होगी। अंग्रेज रायसाहब की उपाधि अपने दल्लों को ही दिया करते थे जो उनके लिए सप्लायर का काम किया करते थे। इसने जिसकी निर्मम हत्या की है वह भगतसिंह के पग-चिह्नों पर चलने वाला क्रांतिकारी था और यह है दो-टके का दल्ला जो तरक्की पाने के लिए हत्यारा बना हुआ है।
सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ. मोहम्मद आरिफ और डॉ. लेनिन रघुवंशी ने कहा है कि वे शीघ्र ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिक दायर करके मामले की उच्च-स्तरीय न्यायिक जाँच की मांग करेंगे। बताने की जरूरत नहीं कि लेनिन रघुवंशी खुद मानवाधिकारों के चैंपियन हैं और अपना खुद का संगठन चलाते हैं, जबकि डॉ. आरिफ गाँधीवादी हैं और हिंसा के सख्त खिलाफ हैं।
