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मऊ : पितृ पर्व के रूप में मनाई स्व जेपी मिश्र की 71वीं जयंती एवं द्वितीय पुण्य तिथि
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मऊ : पितृ पर्व के रूप में मनाई स्व जेपी मिश्र की 71वीं जयंती एवं द्वितीय पुण्य तिथि

February 4, 2026
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घोसी में हुआ भव्य आयोजन

घोसी (मऊ)। घोसी स्थित जेपी उद्यान में स्वर्गीय जेपी मिश्र की 71वीं जन्म जयंती एवं द्वितीय पुण्य तिथि को पितृ पर्व के रूप में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगद्गुरु श्री रामदिनेशाचार्य जी (हरिनाम पीठ, अयोध्या धाम) रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मनोजकांत जी सह (सह प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान श्रवण कुमार सम्मान भी प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि जगद्गुरु श्री रामदीनेशाचार्य जी ने पितृ सत्ता और पुत्र के महत्व पर गहन विचार रखते हुए कहा कि “पिता की आत्मा ही पुत्र बनकर आती है, इस सत्य को वर्तमान परिवेश में समझना अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने कहा कि आज लोग पिता की संपत्ति और वसीयत तो लेना चाहते हैं, लेकिन उनके संस्कार और बरसात (अनुशासन) नहीं लेना चाहते। माता-पिता का सम्मान केवल संपत्ति और सत्ता के लिए नहीं, बल्कि उनके त्याग और मूल्यों के लिए होना चाहिए।
उन्होंने रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से माता कैकेयी, श्रीराम के संवाद, बनवास और राजसत्ता के गूढ़ अर्थ को समझाते हुए जीवन में कर्तव्य और मर्यादा का संदेश दिया।जगद्गुरु जी ने स्वर्गीय जेपी मिश्र के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने लगातार घोसी नगर पंचायत अध्यक्ष रहते हुए अपने व्यापार के माध्यम से समाज की सेवा की और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया।उन्होंने कहा, “आपके किसी भी कार्य से यदि किसी के चेहरे पर प्रसन्नता आ जाए, वही सच्चा धर्म है।” साथ ही यह भी कहा कि जिस दिन कोई पुत्र अपने पिता की पुण्य तिथि को पर्व के रूप में मनाने लगे, समझिए भारत पुनः परम वैभव को प्राप्त कर विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर हो गया है।

जेपी फाउंडेशन के संस्थापक और स्वर्गीय जय प्रकाश मिश्र के बेटे शैलेन्द्र मिश्र ने माता-पिता और कुटुंब के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में पितृ ऋण सर्वोपरि है और परिवार ही समाज की पहली पाठशाला है। उन्होंने कहा कि उनके पिता स्वर्गीय जेपी मिश्र ने जीवन भर सादगी, परिश्रम और समाज सेवा को अपना धर्म माना। उन्होंने कहा कि पिताजी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है और उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। शैलेन्द्र मिश्र ने कहा कि पितृ पर्व के रूप में जयंती और पुण्यतिथि मनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को माता-पिता के सम्मान, कर्तव्यबोध और भारतीय संस्कारों से जोड़ना है। उन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों और नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सहभागिता से ही ऐसे मूल्यपरक आयोजन सफल होते हैं।

जेपी मिश्र के बेटे अभिषेक मिश्र ने कहा कि उनके पिता ने हमेशा समाज, परिवार और संस्कारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि “पिताजी ने हमें सिखाया कि जीवन में सफलता से अधिक महत्वपूर्ण है संवेदनशीलता और सेवा भाव। आज उनकी जयंती और पुण्यतिथि को पितृ पर्व के रूप में मनाना हमारे लिए केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प है। अभिषेक मिश्र ने आयोजन में उपस्थित सभी अतिथियों, साधु-संतों और नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन आने वाली पीढ़ी को अपने मूल्यों और संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

स्वर्गीय जेपी मिश्र की पुत्री, प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. अलका प्रकाश के काव्य संग्रह “आलंग्य है प्रेम” का विमोचन भी किया गया। उन्होंने कहा कि यह काव्य संग्रह प्रेम, संवेदना और मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति है, जिसकी प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिले संस्कारों और जीवन-दृष्टि से प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि उनके पिता का स्नेह, अनुशासन और नैतिक बल ही उनकी रचनात्मक यात्रा का आधार रहा है। डॉ. अलका प्रकाश ने इस अवसर पर भावुक होते हुए कहा कि पितृ पर्व के रूप में जयंती और पुण्यतिथि मनाया जाना केवल पारिवारिक स्मरण नहीं, बल्कि समाज को संस्कारों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। उन्होंने आयोजन के लिए जेपी फाउंडेशन और सभी उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन श्रद्धांजलि, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संदेश के साथ हुआ। इस दौरान पूर्व विधायक उमेश चंद पाण्डेय, बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे, पतंजलि के पूर्वांचल प्रभारी बृज मोहन जी, सुनील गुप्त, फागू सिंह, ब्राह्मण विकास परिषद के अध्यक्ष ऋषिकेश पाण्डेय, विजय शंकर त्रिपाठी वरिष्ठ अधिवक्ता कालिकदत्त पाण्डेय, एडवोकेट सतीश कुमार पाण्डेय पाण्डेय, एडवोकेट उमाशंकर उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।