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मदर टेरेसा का जीवन आज भी हम सब के लिए है प्रेरणा का स्रोतः वाराणसी धर्म प्रांत के बिशप यूजीन जोसेफ

वाराणसीः संत मदर टेरेसा ऑफ कलकत्ता की पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को वाराणसी के कैंटोनमेंट स्थित जीपीओ स्क्वायर में मदर टेरेसा की स्मारक प्रतिमा के समक्ष शांति समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का आयोजन डायोसिस ऑफ वाराणसी की ओर से किया गया। इस अवसर पर मदर टेरेसा के प्रेम, करुणा, सेवा और शांति के संदेश को याद किया गया।




ने कहा कि मानवता की सेवा के लिए मदर टेरेसा का समर्पित जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने जरूरतमंदों और वंचितों की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया तथा पूरी दुनिया को मानवता, प्रेम और शांति का संदेश दिया।
समारोह के माध्यम से समाज में आपसी सद्भाव, शांति और मानव सेवा की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
प्रोफेसर राम सुधार सिंह ने कहा कि मदर टेरेसा का जीवन दो विश्वयुद्धों का साक्षी रहा है। दूसरे विश्वयुद्ध के ठीक पहले बंगाल में भयंकर अकाल आया, जिसमें लाखों लोग काल-कवलित हुए थे। मदर ने इस विभीषिका को देखा था। उन्होंने अभावग्रस्त, रोगी और अपाहिज लोगों की सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।
मदर टेरेसा के अनुसार, प्रार्थना का मूल तत्व प्रेम है और प्रेम का मूल तत्व सेवा है। किसी कोढ़ी के घाव को साफ करते हुए उन्हें लगता था कि वे प्रभु यीशु की सेवा कर रही हैं। मदर का मानना था कि उसका जीना व्यर्थ है, जो दूसरे के लिए नहीं जिया।
इस अवसर पर विशाल सारस्वत, सीईओ, कैंटोनमेंट; श्री राजकुमार, सदस्य, छावनी परिषद; श्री परमानंद, भारतीय डाक-तार विभाग; इतिहासकार और सुप्रसिद्ध गाँधीवादी डॉ. मोहम्मद आरिफ, सिस्टर्स, फादर्स एवं सेंट मेरी स्कूल की प्रिंसिपल, टीचर्स सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे। स्कूल के बच्चों ने गीत के माध्यम से मदर टेरेसा को श्रद्धांजलि दी। संचालन सेंट मेरी स्कूल की ओर से किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन फादर थॉमस ने किया।
