India
घुमंतू विकास बोर्ड में काशी की बेटी श्रुति नागवंशी को सदस्य बनाने की उठी मांग

वाराणसी: विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के कल्याण, उत्थान और आर्थिक विकास के लिए गठित होने वाले उत्तर प्रदेश घुमंतू विकास बोर्ड में सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती शृति नागवंशी को सदस्य, विशेषकर सलाहकार की भूमिका प्रदान किए जाने की मांग की गई है।
मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. लेनिन रघुवंशी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि इन समुदायों के समक्ष शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, आवास, सामाजिक सुरक्षा, सरकारी योजनाओं तक पहुंच तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों जैसी अनेक चुनौतियां हैं। ऐसे में बोर्ड की संरचना में उन लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी, जिन्होंने इन समुदायों के साथ लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम किया है।
पत्र में शृति नागवंशी के लगभग तीन दशकों के जमीनी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्होंने हाशिए पर रहने वाले समुदायों, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों तथा सामाजिक न्याय के लिए काम किया है। People’s Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR) की संस्थापक सदस्य के रूप में भी उन्होंने समुदाय-आधारित विकास और अधिकारों के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है।
पत्र के अनुसार, शृति नागवंशी ने जमनी न्यास के माध्यम से विमुक्त, घुमंतू एवं सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के साथ जमीनी स्तर पर काम करते हुए एक प्रभावी सामुदायिक मॉडल विकसित करने में भूमिका निभाई है। उनके कार्यों में स्थानीय नेतृत्व का विकास, महिलाओं एवं बच्चों को संगठित करना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक अधिकारों तक पहुंच बढ़ाने के प्रयास शामिल रहे हैं।
डॉ. रघुवंशी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उत्तर प्रदेश घुमंतू विकास बोर्ड के गठन और उसकी संरचना निर्धारित करते समय शृति नागवंशी को सदस्य, विशेष अथवा सलाहकार के रूप में उपयुक्त भूमिका देने पर विचार किया जाए। पत्र में कहा गया है कि इससे बोर्ड अधिक संवेदनशील, सहभागी और परिणामोन्मुख बन सकता है।
पत्र के अंत में डॉ. रघुवंशी ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस पहल के माध्यम से विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के सम्मान, अधिकार और सामाजिक विकास की दिशा में एक नई मिसाल कायम कर सकती है।
