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गहरपुर के इनरमन व तिनघरवा के नागेंद्र की बकरियों व खँसी को उठा ले गए चोर

श्रीमान थाना प्रभारी,
बड़ागाँव, वाराणसी
महोदय,
प्रार्थीगण इनरमन बिंद सुत स्वर्गीय सोहन बिंद गाँव गहरपुर और प्रार्थी नागेंद्र ग्राम तिनघरवा, मौजा पुआरीकलां के निवासी हैं और खेती-बाड़ी व पशुपालन करके और रोजही पर खटकर अपना व अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं। बीती यानि कि रविवार रात को कुछ चोर चौपहिया वाहन से आए और बकरियों-बकरों को नशीला पदार्थ सुंघाया और उन्हें पगहा समेत चुरा ले गये।
श्रीमान जी, प्रार्थी इनरमन भैंस व बकरी का पालन करता है और साग-भाजी उगाकर उसे बाजार में बेच आता है और इससे जो पैसे मिलते हैं, उन्हीं से घर का गुजारा करता है। अपने खाने भर को अनाज भी उगा लिया करता है तथा बढ़ने पर आसपास के गाँव वालों में बेच भी दिया करता है।
इसी प्रकार प्रार्थी अनुसूचित जाति से संबद्ध प्रार्थी नागेंद्र, जिनका इस वक्त पथरी का ऑपरेशन हो रखा है, इस वक्त दिहाड़ी करने में असमर्थ हैं और उनकी पत्नी रोजही पर काम करती हैं। 14-15 साल का बेटा हाईस्कूल में पढ़ता है। कई बेटियों के पिता नागेंद्र के पास 4-5 बिस्वा जमीन है और जीने-खाने के लिए उन्हें बोरिंग-मैन के पास रोजही पर खटना पड़ता है। पता चला है कि सीसीटीवी फुटेज में बिना नंबर प्लेट के वह गाड़ी दिखाई पड़ी है।
नागेंद्र के दामाद श्री राजीव कुमार जी ने दूसरे ग्रामीणों के हवाले से बताया कि चोर टँड़िया पर एक साथ तमाम भेड़ों को चोरी करने के इरादे से गाड़ी लेकर निकले थे लेकिन वहाँ पर किसानों को जागता देखकर उन्होंने दूसरी कई जगहों पर हाथ आजमाया।
श्रीमान थाना प्रभारी से सविनय-सादर अनुरोध है कि चोर का पता लगाकर यथोचित विधिक कार्रवाई करें और संभव होने पर किसान को उसका माल वापस दिलाएं।
श्रीमान जी, किसान का ख्याल है कि यह चोरी गाँव के किसी व्यक्ति ने नहीं की है बल्कि खँसी खरीदने के लिए दौड़ाभागी करने वाले किसी चिकवा की यह करामात है। जैसा कि श्रीमान थाना प्रभारी महोदय जानते ही होंगे कि रोजी-रोटा का संकट आज के दौर में कितना गहरा है तो जो जन गुूंताड़ा भिड़ाकर किसी तरह से इज्जत की दो रोटी कमा रहे हैं, सरकार व प्रशासन को भी उनकी मदद करनी चाहिए ताकि लखैरों की संख्या पर रोक लगाई जा सके।
लेकिन, अगर इसी तरह से समाज में तलछट की जिंदगी जीने वाले चोर-उठाईगीरे मेहनतकशों को परेशान करने लगेंगे तो पहले से ही चली आ रही दुश्वारियाँ खत्म होने का नाम न लेंगी और हाड़तोड़ मेहनत करने वालों का भी मन बैठ जाएगा।
श्रीमान थाना प्रभारी महोदय,
मेरे लिए आशा की पहली व अंतिम किरण अब बड़ागाँव पुलिस ही है।
