Health
औषधीय पौधों की करें खेती-पाएं उत्तम स्वास्थ्य और रुपइया, बीएचयू के वैज्ञानिक कर रहे हैं मदद

वाराणसीः औषधीय पौधों की खेती के संबंध में किसानों के लिए दो प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम ग्राम–मझिगवां, ब्लॉक–नगर सिटी ब्लॉक, पोस्ट–भटौली घाट तथा ग्राम–हुसैनिपुर, पोस्ट एवं ब्लॉक–कोन (चिल्ह), जनपद–मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश में आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कृषक समुदाय की आजीविका एवं आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित परियोजना “फॉरवर्ड एवं बैकवर्ड लिंकेज के एकीकरण के माध्यम से चंदौली एवं मिर्जापुर जनपदों के किसानों की औषधीय पौधों की खेती के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम” का हिस्सा है। परियोजना के मुख्य प्रधान अन्वेषक (Principal Investigator), डॉ. जय प्रकाश वर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी तथा सह-प्रधान अन्वेषक , डॉ. कुलदीप बौद्ध, एसोसिएट प्रोफेसर, पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, RGSC, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU), मिर्जापुर तथा उनकी शोध टीम के डॉ. बंस नारायण सिंह, अरुणांशु नस्कर एवं श्री विशाल कुमार ने मिर्जापुर के किसानों को औषधीय पौधों—सफेद मुसली, भृंगराज, कालमेघ, अश्वगंधा, ब्राह्मी, शतावरी तथा सर्पगंधा की वैज्ञानिक खेती के संबंध में प्रशिक्षण एवं जागरूकता प्रदान की। परियोजना का उद्देश्य विशेष रूप से अनुसूचित जाति के किसानों, गरीब किसानों तथा अन्य कृषकों की क्षमता का विकास करते हुए व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय पौधों की वैज्ञानिक एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना तथा उपयुक्त बैकवर्ड एवं फॉरवर्ड लिंकेज के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि करना है।
परियोजना का प्रमुख उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, तकनीकी ज्ञान, व्यावहारिक प्रशिक्षण, खेत-स्तरीय प्रदर्शन, टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी, कटाई के बाद प्रबंधन तथा बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराकर उच्च मूल्य वाले औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना है। परियोजना में ऐसे औषधीय पौधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनकी आयुर्वेदिक एवं हर्बल औषधि क्षेत्र में पर्याप्त मांग है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को औषधीय पौधों के आर्थिक महत्व एवं बाजार की संभावनाओं, उपयुक्त खेती पद्धतियों, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के चयन एवं उपयोग, मृदा एवं पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई, कटाई तथा कटाई के बाद प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। इन विषयों पर BHU के डॉ. जे.पी. वर्मा तथा वाराणसी के ग्राम–मरुई निवासी प्रमुख औषधीय पौधा उत्पादक श्री वेदप्रकाश पटेल ने किसानों से चर्चा की। परियोजना टीम ने अच्छी गुणवत्ता वाली औषधीय पादप सामग्री के उत्पादन के लिए पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ एवं जैविक कृषि पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर भी चर्चा की, जिससे मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा अत्यधिक बाहरी कृषि इनपुट पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।
इस संवाद कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र औषधीय पौधों की खेती के लिए बैकवर्ड एवं फॉरवर्ड लिंकेज विकसित करना था। बैकवर्ड लिंकेज के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, तकनीकी प्रशिक्षण एवं वैज्ञानिक खेती पद्धतियों तक पहुंच उपलब्ध होगी, जबकि फॉरवर्ड लिंकेज के अंतर्गत कटाई के बाद प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं औषधीय पादप उत्पादों के विपणन पर ध्यान दिया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत किसानों को आयुर्वेदिक औषधि कंपनियों, हर्बल उद्योगों तथा अन्य संभावित खरीदारों से जोड़ने की योजना है, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। परियोजना टीम ने किसानों को बताया कि राजीव गांधी दक्षिणी परिसर तथा BHU के कृषि फार्म, मिर्जापुर में एक औषधीय पौध नर्सरी स्थापित की जाएगी, जो परियोजना के अंतर्गत सहभागी किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने का स्रोत बनेगी। किसानों ने संवाद कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और औषधीय पौधों की खेती से संबंधित विभिन्न विषयों—उपयुक्त फसलों का चयन, खेती की आवश्यकताएं, उत्पादन लागत, अपेक्षित आय, रोपण सामग्री की उपलब्धता तथा विपणन के अवसर—पर चर्चा की। परियोजना टीम ने किसानों के प्रश्नों का समाधान किया और इस बात पर जोर दिया कि सफल औषधीय पौध खेती के लिए केवल अच्छी उत्पादन पद्धतियां ही नहीं, बल्कि उचित कटाई, सुखाने, भंडारण, प्रसंस्करण एवं विपणन भी आवश्यक है, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहे और बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। इस पहल से क्षेत्र में आजीविका के नए अवसर पैदा होने, कृषि आय में विविधता आने तथा कृषक समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। किसानों का यह संवाद कार्यक्रम किसान–संस्था संबंधों को मजबूत करने तथा औषधीय पौधों की खेती को एक व्यवहार्य, टिकाऊ एवं आर्थिक रूप से लाभकारी कृषि उद्यम के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



निरंतर क्षमता निर्माण, खेत-स्तरीय प्रदर्शन एवं बाजारोन्मुखी हस्तक्षेपों के माध्यम से परियोजना का उद्देश्य किसानों को सफल खेती तथा आय में वृद्धि के लिए आवश्यक ज्ञान एवं संसाधनों से सशक्त बनाना है। बैठक में हुसैनिपुर के विभिन्न किसानों—चंदन कुमार (ग्राम प्रधान), बगौती प्रसाद, फूलचंद सरोज, अनिल कुमार, बृजेश कुमार, जगनारायण, धनंजय बिंद, अंकित सरोज, बंशराज, हिरामनी, कपूर, पुष्पादेवी, कमलधारी एवं विमला देवी तथा किसानों—प्रवेश कुमार (ग्राम प्रधान), सुख्खुराम, शिवशंकर सरोज, सिकंदर बिंद, श्याम बिहारी, लालाजी पानालाल, अमित लाल यादव, हृदयलाल आदि ने भाग लिया।
