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आयुर्वेद विभागः जोड़ों की सूजन, उपास्थि के क्षरण और हड्डी की संरचना पर फॉर्मूलेशन के प्रभावों का किया गया मूल्यांकन

पांच औषधीय पौधों से तैयार ‘ओएक्योर’ ने प्रयोगात्मक ऑस्टियोआर्थराइटिस में सूजन कम करने और उपास्थि की रक्षा करने की क्षमता दिखाई




वाराणसी, 15.10.2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पांच औषधीय पौधों से तैयार आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन ‘ओएक्योर’ (OAcure) का प्रयोगात्मक ऑस्टियोआर्थराइटिस में अध्ययन किया है। चूहों पर किए गए इस अध्ययन में फॉर्मूलेशन के उपयोग से जोड़ों की सूजन में कमी, उपास्थि (कार्टिलेज) को क्षति से बचाने और उसके नीचे स्थित हड्डी की संरचना में सुधार के संकेत मिले। शोध के निष्कर्ष ऑस्टियोआर्थराइटिस में ओएक्योर की संभावित उपयोगिता के आगे वैज्ञानिक मूल्यांकन का आधार प्रदान करते हैं। हालांकि, ये परिणाम पशु-अध्ययन तक सीमित हैं और मनुष्यों में इसकी प्रभावशीलता तथा सुरक्षा की पुष्टि के लिए आगे परीक्षण आवश्यक होंगे।
ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों को प्रभावित करने वाली एक दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें उपास्थि धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती है। इसके साथ जोड़ की भीतरी झिल्ली (सिनोवियल मेम्ब्रेन) में सूजन और नीचे स्थित हड्डी में संरचनात्मक बदलाव भी हो सकते हैं। इससे दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने जोड़ के विभिन्न घटकों पर ओएक्योर के प्रभावों का मूल्यांकन किया, ताकि सूजन, उपास्थि के क्षरण और हड्डी की संरचना में होने वाले बदलावों को एक साथ समझा जा सके।
शोधपत्र “कॉन्ड्रोप्रोटेक्टिव एंड एंटी-इन्फ्लेमेटरी इफेक्ट्स ऑफ एन आयुर्वेदिक न्यूट्रास्यूटिकल (ओएक्योर) इन एक्सपेरिमेंटल ऑस्टियोआर्थराइटिस” शीर्षक से वैज्ञानिक पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ द इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में सूजन और उपास्थि के क्षरण से जुड़े संकेतकों में बदलाव
प्रयोगात्मक ऑस्टियोआर्थराइटिस के माउस मॉडल में किए गए अध्ययन के दौरान ओएक्योर प्राप्त करने वाले चूहों में जोड़ की भीतरी झिल्ली की सूजन, जिसे सिनोवाइटिस कहा जाता है, में कमी देखी गई। सूजन से जुड़ी मैक्रोफेज कोशिकाओं की उपस्थिति में भी बदलाव दर्ज किया गया। शोधकर्ताओं ने सिनोवियल मैक्रोफेज के प्रो-इन्फ्लेमेटरी एम1 स्वरूप से एम2-संबंधी स्वरूप की ओर बदलाव के संकेत पाए, जो जोड़ के सूजनकारी वातावरण में संभावित सुधार का संकेत देता है। इसके अतिरिक्त, एनएफ-कप्पा बी (NF-κB) और इंटरल्यूकिन-1 बीटा (IL-1β) जैसे सूजन से जुड़े जैविक कारकों की अभिव्यक्ति में कमी देखी गई।
अध्ययन में उपास्थि की संरचना से जुड़े टाइप-II कोलेजन की अभिव्यक्ति में वृद्धि के संकेत मिले। इसके विपरीत, उपास्थि के क्षरण और असामान्य परिपक्वता से जुड़े एमएमपी-13 (MMP13), एडीएएमटीएस-5 (ADAMTS5) और टाइप-X कोलेजन जैसे संकेतकों की अभिव्यक्ति में कमी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं ने माइक्रो-कंप्यूटेड टोमोग्राफी (माइक्रो-सीटी) के माध्यम से उपास्थि के नीचे स्थित हड्डी की संरचना का भी अध्ययन किया। विश्लेषण में अस्थि खनिज घनत्व और ट्रैबेक्युलर संरचना से जुड़े कई मापदंडों में सुधार के संकेत मिले।
ये निष्कर्ष बताते हैं कि प्रयोगात्मक मॉडल में ओएक्योर का संबंध जोड़ की सूजन, उपास्थि के क्षरण और उसके नीचे स्थित हड्डी में होने वाले बदलावों से जुड़े कई जैविक संकेतकों में सुधार से था। हालांकि, इन परिणामों से मनुष्यों में इसके चिकित्सकीय प्रभाव की पुष्टि नहीं होती। इसकी वास्तविक उपयोगिता, सुरक्षा और उपयुक्त मात्रा निर्धारित करने के लिए आगे वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होंगे।
पांच औषधीय पौधों से तैयार किया गया ओएक्योर
ओएक्योर पांच औषधीय पौधों से तैयार किया गया फॉर्मूलेशन है। इसमें अश्वगंधा (Withania somnifera), शतावरी (Asparagus racemosus), विदारीकंद (Pueraria tuberosa), गिलोय (Tinospora cordifolia) और Curculigo orchioides शामिल हैं। अध्ययन में प्रयुक्त वनस्पतियों की पहचान और प्रमाणीकरण विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय के द्रव्यगुण विभाग द्वारा किया गया।
शोध में पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों पर आधारित इस बहु-घटक फॉर्मूलेशन का मूल्यांकन आधुनिक प्रयोगात्मक तकनीकों के माध्यम से किया गया। इसमें हिस्टोलॉजिकल स्टेनिंग, इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री, इम्यूनोफ्लोरेसेंस, जीन-अभिव्यक्ति विश्लेषण और त्रि-आयामी माइक्रो-सीटी इमेजिंग जैसी पद्धतियों का उपयोग किया गया। इन तकनीकों से शोधकर्ताओं को कोशिकीय, आणविक और ऊतक स्तर पर फॉर्मूलेशन से जुड़े प्रभावों का अध्ययन करने में मदद मिली।
विभिन्न विभागों के शोधकर्ताओं का सहयोग
यह अध्ययन जूलॉजी विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस तथा आयुर्वेद संकाय के द्रव्यगुण विभाग सहित संबंधित शोध समूहों के सहयोग से किया गया। शोध दल में अनिरबान रॉय, रत्ना सहानी, निकिता सिंह, डॉ संजीव कुमार, डॉ संजय यादव और समीर गुप्ता शामिल रहे। शोध का नेतृत्व जूलॉजी विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, के डॉ. अमरेश कुमार सिंह ने किया।
प्रकाशन संबंधी जानकारी
• शोधपत्र: कॉन्ड्रोप्रोटेक्टिव एंड एंटी-इन्फ्लेमेटरी इफेक्ट्स ऑफ एन आयुर्वेदिक न्यूट्रास्यूटिकल (ओएक्योर) इन एक्सपेरिमेंटल ऑस्टियोआर्थराइटिस
• पत्रिका: प्रोसीडिंग्स ऑफ द इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी
• डीओआई: https://doi.org/10.1007/s43538-026-00930-8
• संबंधित शोधकर्ता: डॉ. अमरेश कुमार सिंह, जूलॉजी विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी।
