Health
आयुर्वेद चिकित्सक के द्वारा दिये गये चिकित्सा अवकाश एवं फिटनेस प्रमाण पत्र सभी शासकीय एवं प्राइवेट संस्थानों में मान्य

वाराणसी:



काशी हिंदू विश्वविद्यालय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय में NCISM के निर्देशानुसार , सभी इंटर्न के लिये " शीशीक्षा " नामक उद्बोधन कार्यक्रम चल रहा है।
सप्ताह पर्यन्त कार्यक्रम के चौथे दिन आज रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने 65 इंटर्न को संबोधित करते हुये कहा कि अब आयुर्वेद चिकित्सक के द्वारा निर्गत चिकित्सा प्रमाण पत्र सरकारी सेवाओं, आर टी ओ, बीमा कंपनी के साथ साथ सभी प्राइवेट संस्थाओं में मान्य है।
यदि कोई संस्था इन प्रमाण पत्रों को मानने से इनकार करती है तो वह नियमानुसार कार्यवाही आमंत्रित कर रही है।
संबंधित आयुर्वेद चिकित्सक जिसके द्वारा दिये गये प्रमाण पत्र को कोई सरकारी या प्राइवेट संस्था नहीं मान रही है तो वह चिकित्सक तत्काल NCISM को सूचित करे। NCISM स्वयं के संसदीय अधिकारों का प्रयोग करते हुये उस अमुक संस्था को नोटिस दे कर, उनसे कारण पूछती है। तत्पश्चात उस संस्था को अपनी नियमावली में सुधार करना होता है।
प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने आज आयुर्वेद औषधियों के भ्रामक विज्ञापनों के रोकथाम के लिये बने नियमों से इंटर्न को अवगत कराया । उन्होंने उन कारणों की भी बृहद व्याख्या की क्यों यह प्रयास प्रभावी नहीं हो पा रहा है। आपने इस भ्रम जाल में चिकित्सकों के सम्मिलित होने पर चिन्ता व्यक्त की।
आपने कहा कि एक बाजार व्यवस्था में भ्रामक विज्ञापनों से जनता का सामाजिक एवं आर्थिक शोषण निरन्तर हो रहा है ।
इंटर्न को प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने आगाह किया कि वो अपने चिकित्सकीय जीवन में बिना प्रमाण के, सिर्फ विज्ञापन के आधार वाली औषधियों का प्रयोग न करें।
इन लम्बाई बढ़ाने, मोटापा घटाने, शुगर, किडनी ठीक करने के भ्रामक विज्ञापनों से बाजार भर गया है। आपको आर्थिक प्रलोभन दे कर इन भ्रामक विज्ञापन वाली दवाओं के बाजार में सम्मिलित करने का प्रयास होगा। आप इससे बचे।
अपने व्याख्यान के अन्त में प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने इंटर्न को आत्म विश्वास के साथ चिकित्सा कर्म के प्रायोगिक पहलुओं को समझते हुए, मेडिकल सर्टिफिकेट लिखने की विधा का पालन करने के लिये आह्वान किया।
साथ ही माननीय न्यायालय के पतंजलि एवं डाबर आदि और भी कई अन्य कंपनियों के भ्रामक विज्ञापन के मुद्दे को विस्तार से समझाया। तथा चिकित्सा क्रम में स्व अनुभव एवं विवेक करने पर बल दिया।
कार्यक्रम में संकाय प्रमुख प्रोफ़ेसर के एन मूर्ति ने इंटर्न को उपदेशित करते हुये कहा कि आज समाज में आयुर्वेद चिकित्सकों की जिम्मेदारी पुनः प्रतिष्ठित हो चुकी है अतः आयुर्वेद स्नातकों को ncism द्वारा प्रदत्त सभी कर्तव्यों एवं अधिकारों का पूर्ण पालन करना चाहिये।
कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर सी एस पाण्डे हैं तथा उनके साथ आज प्रोफेसर सुनंदा पाटेकर ,डॉ शिखा सिंह, डॉ शालिनी ने संचालन किया ,धन्यवाद ज्ञापन सुश्री शैलजा ने किया। व्याख्यान के आयोजन में सहयोग प्रदान किया।
