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वाराणसी में ‘Contours of Imagination’ ने समकालीन कला के विविध रंगों को किया प्रस्तुत

वाराणसी: समकालीन भारतीय कला के उभरते स्वरूप और कलाकारों की रचनात्मक दृष्टि को सामने लाने वाली समूह कला प्रदर्शनी ‘Contours of Imagination’ का आयोजन 25 से 29 जुलाई 2026 तक वाराणसी के समने घाट स्थित इशी गैलरी, राम छतपर शिल्प न्यास, महेश नगर कॉलोनी में किया गया। प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला काशी—कॉन्टेम्परेरी विजुअल आर्ट कम्युनिटी की ओर से किया गया।
























































































प्रदर्शनी में उभरते कलाकारों की ऐसी कृतियां प्रस्तुत की गईं, जिनमें कल्पना, व्यक्तिगत अनुभव, संस्कृति और सामाजिक परिवेश के अलग-अलग रूप दिखाई दिए। कैटलॉग के अनुसार प्रदर्शनी का उद्देश्य समकालीन भारतीय कला की विविधता को अलग-अलग विषयों, माध्यमों और कलात्मक दृष्टिकोणों के माध्यम से सामने लाना था।
प्रदर्शनी में पेंटिंग, मूर्तिकला, सिरेमिक, मिक्स्ड मीडिया, इंस्टॉलेशन और ड्राइंग जैसे विभिन्न माध्यमों में कलाकारों ने काम प्रस्तुत किए। कृतियों में पहचान, स्मृति, पर्यावरणीय संकट, मनोवैज्ञानिक अनुभव, सामाजिक यथार्थ और परिवर्तन जैसे विषय उभरकर सामने आए। कैटलॉग में बताया गया है कि कलाकारों ने पारंपरिक दृश्य भाषा से आगे बढ़ते हुए अमूर्तता, प्रतीकात्मकता, मिथक और सामग्री के प्रयोग के जरिए अपने विचार व्यक्त किए।
प्रदर्शनी में प्रकृति और मनुष्य के संबंध को भी प्रमुखता मिली। कई कृतियों में जैविक आकृतियों, मिश्रित जीवों, टूटे हुए लैंडस्केप और प्रतीकात्मक रूपों के माध्यम से पर्यावरणीय असुरक्षा तथा प्रकृति की पुनर्जीवन क्षमता को व्यक्त किया गया। वहीं कुछ रचनाओं में स्मृति, इच्छा, संघर्ष और उपचार जैसे मनोवैज्ञानिक अनुभवों को दृश्य रूप दिया गया।
प्रदर्शनी के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कलाकार एवं बीएचयू के दृश्य कला संकाय के प्लास्टिक आर्ट्स विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष बिनोद सिंह थे। विशिष्ट अतिथि प्रो. श्रीरूप रायचौधुरी, निदेशक, भारत कला भवन तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर, रहे। अतिथि सम्मान डॉ. कनु प्रिया को दिया गया, जो 2025 की राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता और बीएचयू के इतिहास विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं।
कैटलॉग में प्रदर्शनी के क्यूरेटर के रूप में अनन्या अग्रवाल और मनीष सिंह का उल्लेख है।
प्रदर्शनी में वाराणसी, जौनपुर, चित्रकूट, मऊ, प्रयागराज, विदिशा, वृंदावन सहित विभिन्न स्थानों से जुड़े कलाकारों की कृतियां शामिल थीं। उदाहरण के तौर पर आस्था तिवारी ने Death Circle और Motion of Memory, अंजलि मौर्य ने The Rising Storm Within और Seeds of Anguish, अदिति सिंह ने कांस्य में Untitled, आदित्य शर्मा ने Necessary Friction-1 और Dejavu, जबकि आनंद रघुवंशी ने Human Peace और Human Rush प्रस्तुत किए।
प्रदर्शनी की विशेषता यह रही कि इसमें कला को केवल वास्तविकता के चित्रण के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव, स्मृति और कल्पना के बीच संवाद के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। आयोजकों के अनुसार प्रत्येक कलाकार की अपनी स्वतंत्र दृष्टि थी और सभी कृतियां मिलकर समकालीन भारतीय कला की विविधता और जीवंतता को सामने लाती हैं।
ललित कला काशी की यह पहल वाराणसी में युवा और उभरते कलाकारों को मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आई। प्रदर्शनी ने दर्शकों को विभिन्न कलात्मक भाषाओं और नए प्रयोगों से परिचित कराने के साथ कला, समाज, प्रकृति और व्यक्तिगत अनुभवों पर संवाद का अवसर भी दिया।
