कोरोना और मानसिक स्वास्थ्य

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आज के दैनिक हिंदुस्तान के संपादकीय पृष्ठ पर ‘द न्यूज़’ (पाकिस्तान) पर कोरोना और मानसिक स्वास्थ्य पर संक्षिप्त ही सही एक टिप्पणी छपी है जिसका सार यह है कि पाकिस्तान में कोरोना तेजी के साथ फैल रहा है और उसकी रफ्तार अन्य देशों से अधिक है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वहां के लोग  इस महामारी को  बिल्कुल हल्के रूप में ले रहे हैं। यदि हम अपने देश भारत की बात करें तो स्पष्ट पता चलता है कि अपने यहां ना केवल कोविड-19 तीव्रता के साथ चारों ओर अपना पैर पसार रहा है बल्कि  यहां की जनता में बीमारी के प्रति जो चिंता की भावना घर कर गई है वह अतिशय भयावह है। कुछ समय पहले पटना कंकड़बाग निवासी मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विनय कुमार ने अपने फेसबुक पर बताया था कि किस तरह एक रोगी टीवी पर चीन के द्वारा आक्रमण की खबरें देखकर इतना भयभीत हो गया था कि वह आपे से बाहर आ गया था और उसे अपने इलाज के लिए चिकित्सक की शरण लेनी पड़ी थी। कहना नहीं होगा कि यही स्थिति है भारत भर में है और अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी ऐसी स्थितियां पैदा हो चुकी हैं। जिस के संबंध में ऊपर में दिए गए अखबार में प्रकाशित आलेख से पता चलता है। सवाल यह उठता है कि हम भीतर से इतने कमजोर क्यों हो गए हैं इस तरह की घटनाएं देख सुनकर ना केवल मानसिक तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं बल्कि हर वक्त हमारे मन में एक अज्ञात भय का वातावरण बन गया होता है जिसके परिणाम स्वरूप मानसिक रोगी की स्थिति अतिशय खराब हो जाती है। कमजोर दिल वाले लोगों के लिए ना तो ऐसी खबरें दिखलाई जानी चाहिए और ना अखबारों में इस तरह की खबरें प्रमुखता के साथ प्रकाशित ही किया जाना चाहिए । सच तो यह है कि हिंदी पत्रकारिता का काम लोगों में जागरूकता लाना है। लोगों को सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक गतिविधियों से परिचित कराना है। चाहे हम श्रव्य पत्रकारिता की बात करें या दृश्य पत्रकारिता की बात करें, सच तो यह है कि दोनों पत्रकारिता का काम मानसिक और शारीरिक  विकास करना है। लेकिन ताज्जुब यह देखकर होता है कि आजकल चाहे वह दूरदर्शन हो या समाचार पत्र अथवा मासिक या साप्ताहिक पत्र पत्रिकाएं प्रायः इन्हें इस तरह की खबरों से भर दिया जाता है कि अधिक से अधिक दर्शक और पाठक वर्ग मिल सके ।  इसके अलावा यह भी सत्य है कि आज यह पत्रकारिता व्यवसाय का धंधा बन गया है और बिकाऊ भी हो चला है । लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ के रूप में यह पत्रकारिता के संबंध में माना तो यह गया था कि इसके द्वारा भारतीय जनता के सुख दुख में यह सहयोग करेगा किंतु बढ़ती महंगाई और बाजारवाद के कारण यह पत्रकारिता आज बिकाऊ होने के कगार पर खड़ा है । इसलिए कोरोना वायरस की वजह से यदि आम लोगों को मानसिक आघात पहुंच रहा है तो यह स्वभाविक ही है और पत्रकारिता के विभिन्न अंगों के माध्यम से इस बात का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए कि लोगों के जेहन में  कोरोना वायरस की वजह से लोगों को ना तो अनिद्रा अथवा तनाव का शिकार होना पड़े अथवा उनके दिल पर इसी तरह का आघात ही पहुंचे। जैसा कि चिकित्सकों ने कहा है कि अधिकांश मौतें घबराहट की वजह से अथवा चिंता करने की वजह से अथवा रात भर नींद नहीं आने की वजह से अथवा बीपी शुगर और लीवर के रोगों की वजह से  ज्यादा हुई है। प्राय आया अभी देखा सुना जाता है कि जहां सरकारी अस्पताल है वहां संक्रमित रोगियों के लिए प्रयाग रहने रहने की व्यवस्था नहीं है उनके इलाज के लिए अथवा उनकी हिफाजत के लिए भी पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं है। ऐसे कुछेक कारण जब आम आदमी के कानों तक पहुंचती हैं तो लोगों का चिंता करना स्वभाविक हो जाता है ।अतः यदि  पाकिस्तान में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है  तो अपने भारत में भी  मानसिक रोगियों की संख्या कम नहीं है जैसा कि  पाकिस्तान के अखबार ‘द न्यूज’ ने  इस बात की खबर को  प्रमुखता के साथ  पूरी दुनिया के सामने  प्रसारित  करके इस बात को सिद्ध करने का प्रयास किया है । हम यदि अपने बिहार की बात करें तो  स्पष्ट पता चलता  है कि यहां के धनी हो या गरीब लोग- प्रायः चिंता सबके साथ है और सही बात यह है कि इस चिंता या तनाव को किसी भी स्थिति में नजर अंदाज नहीं करना चाहिए । प्रायः हर घर में महिलाएं हैं, बच्चे हैं, बुजुर्ग व  बीमार हैं । इसलिए हमेशा उनकी देखभाल करनी चाहिए।
 इस कार्य के लिए सबसे जरूरी  शर्त यह है कि हम परिवार के सदस्यों मे अथवा अपने मित्रों में सहृदयता के साथ पर्याप्त समय देना सीखें। पल पल परिवर्तित समय के अनुसार उनकी समुचित दिनचर्या का ख्याल रखें। समय पर नाश्ता और भोजन तथा मनोरंजन के विभिन्न संसाधन उपलब्ध कराते रहना चाहिए। क्योंकि ऐसे समय में बाहर जाना किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं है। इसलिए घर में खेले जाने वाले विभिन्न खेलों एवं मनोरंजक साधनों का उपयोग किया जाना ना केवल ज्यादा बेहतर होगा बल्कि वह स्वास्थ वर्धक भी होगा।
जो व्यक्ति घर से बाहर निकल कर काम करने जा रहे हैं उन्हें पर्याप्त सुरक्षा के साथ अपने काम पर जाना चाहिए और रास्ते में बिना समय गवाएं तुरंत ही  घर लौट जाना चाहिए। दूसरी बात सबसे जरूरी यह है कि घर में पौष्टिक भोजन जैसे दूध दही घी मक्खन हरी सब्जी हरे हरे और सूखे फल आवाज से मौजूद होना चाहिए। क्योंकि इसी तरह का भोजन हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बना सकता है। घर के अंदर अथवा घर के छत पर यदि हम योगासन, सूर्य नमस्कार, उछल कूद अथवा टहलना घूमना करते हैं तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए विशेष लाभकारी सिद्ध होगा। प्रायः सत साहित्य का अध्ययन, कहानी और कविता का पठन-पाचन और यदि लेखन कार्य में मन लगता हो तो  लेखन से संबंधित कार्यों को अंजाम दे सकते हैं। इसके अलावा घर में रहें, सब से मिलकर रहें और सुरक्षित रहें।
पंडितविनय कुमार
हिन्दी शिक्षक
शीतला नगर रोड नंबर 3
पोस्ट गुलजार बाग
अगमकुआँ
पटना-800007
मोबाइल 9334504100
    7991156839

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