कोरोना पर अंधविश्वास के अफवाहों को आधार देता मीडिया, नभाटा में छपी खबर को लोगों ने गलत बताया

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विशद कुमार

हर सुबह मैं कई अखबारों का ई—पेपर और बेबसाइट खोलकर देश दुनिया की खबरें देखता हूं। हर सुबह तरह मैंने आज भी कई मीडिया बेबसाइट की तरह नवभारतटाइम्स.कॉम का बेबसाइट खोला। झारखंड की एक खबर पर नजर गई जो कोडरमा की थी।
खबर का शीर्षक था — ”झारखंड: कोरोना के नाम पर अंधविश्वास का खेल, एक साथ 400 बकरों की बलि दी गई”

खबर थी — ”कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर जहां एक ओर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें हरसंभव प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर अंधविश्वास का दौर भी शुरू हो गया है। बुधवार को झारखंड के कोडरमा जिले में कोरोना को भगाने के लिए एक मंदिर में एक साथ 400 बकरों को बलि चढ़ा दी गई है। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी जमकर उल्लंघन किया गया।
कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया के लोग परेशान है। इसकी चपेट में आने से दुनिया के कई हजार लोग मर चुके हैं। जहां एक तरफ कोरोना के संक्रमण को समाप्त करने के लिए दुनियाभर में वैक्सीन की खोज चल रही है। वहीं, भारत में कोरोना के खात्मे को लेकर अंधविश्वास का खेल शुरू होने लगा है। इसका ताजा उदाहरण झारखंड का कोडरमा जिला है।

जिले के चंदवारा प्रखंड अंतर्गत ग्राम उरवां में स्थित देवी मंदिर में बुधवार सुबह से आस्था के नाम पर अंधविश्वास का खेल चलता रहा। देवी माता के मंदिर में कोरोना को शांत करने के लिए हवन, पूजन, आरती की जा रही है। देवी मां को खुश करने के लिए बकरों और मुर्गों की बलि दी जा रही है। बुधवार को एक साथ 400 बकरों की बलि दी गई है। जिसके बाद से इलाका चर्चा में आ गया है।
गांव के लोगों का मानना है कि बलि देने से कोरोना भाग जाएगा और उनका गांव कोरोना से मुक्त हो जाएगा। हालांकि, किसके कहने पर यह आयोजन किया जा रहा है। इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। मंदिरों में बकरों और मुर्गों की बलि देने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। उधर, जब मामला प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचा तो अधिकारियों ने मामले में तत्काल कार्रवाई करने की बात कही है।”खबर वास्तव में चौकाने वाली थी। क्योंकि कोरोना को लेकर देश में अंधविश्वास का दौर शुरू हो चुका है। इसको लेकर बिहार—झारखंड से कई खबरें आ रही हैं कि महिलाएं  कोरोना को कोरोना देवी का रूप देकर पूजा कर रही हैं, मन्नतें मांग रही हैं। सोशल साइट्स से लेकर तमाम मीडिया में रोज व रोज ऐसी खबरें आ रही हैं। ऐसे में उक्त खबर चौकाने के साथ—साथ एक पत्रकार होने के नाते प्रभावित करने वाली भी रही। अत्: मैंने इसकी सच्चाई जानने के लिए कोडरमा के आप नेता और वरिष्ठ पत्रकार संताष मानव उर्फ संतोष सिंह को फोन कर मामले की जानकारी चाहा, तो उन्होंने ऐसी किसी घटना की जानकारी से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए जिले के ही चंदवारा प्रखंड के जिला परिषद सदस्य चंदवारा पश्चिमी की अमृता सिंह के पति अशोक सिंह का नंबर दिया। जब मैंने आशोक सिंह के मोबाइल नंबर — 6201648136 पर उक्त खबर की सच्चाई जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि कोरोना देवी के नाम पर कोई ऐसी बली नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह अफवाह है, हां हर साल की तरह गांव के कुछ लोगों ने परंपरागत आषाढ़ी पूजा के तहत तीन बकरे की बली दी है, 400 बकरे की नहीं। उन्होंने बताया कि जिले के डीसी—एसपी आए थे और मामले की जानकारी ली है। डीसी ने वाट्सएप पर मामले खंडन किया है और अफवाह न फैलाने की अपील भी की है। मैंने मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए चंदवारा के एक कांग्रेसी नेता अज्जू सिंह के मो.नं.— 8002098686 पर बात की तो उन्होंने ने भी इस तरह की घटना को सिरे से खारिज किया। उन्होंने भी परंपरागत आसाढ़ी पूजा का ही जिक्र किया।
तब सवाल उठता है कि इस तरह की अफवाह के पीछे कौन है? कोरोना संक्रमण की इस भयावहकता को अंधविश्वास में ढकेलने की कोई गहरी साजिश तो नहीं है? कई सवाल जो अनुत्तरित हैं, उनका जवाब तलाशना जरूरी है, वर्ना कोरोना काल में बेरोजगारी व भूख के बीच यह अंधविश्वास हमें एक  बड़ी संकट की ओर ले जाएगा।

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