मनरेगा कर्मचारियों के तय समझौते का संकल्प जारी किया जाए

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विशद कुमार

झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ, झारखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश सोरेन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि आज दिनांक 9.10.20 को हमने माननीय मुख्यमंत्री झारखंड सरकार एवं माननीय ग्रामीण विकास मंत्री झारखंड सरकार को एक पत्र सौपा, जिसमें विगत दिनों मनरेगा कर्मचारियों के हड़ताल के दौरान हुए समझौते का संकल्प नियत समय पर जारी करने की मांग की गई है। इसके अलावा पत्र में यह जिक्र किया गया  है कि दिनांक 10.8.2020 को हम लोगों का सरकार के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर हड़ताल को स्थगित कराया गया था तथा वार्ता में बनी सहमति का एक से सवा महीना में संकल्प जारी करने की बात बताई गई थी, साथ ही कोरोना वायरस की महामारी को देखते हुए मनरेगा कर्मियों का हड़ताल अवधि का मानदेय देने की भी बात माननीय मंत्री एवं माननीय विधायक सोनू जी ने देने की सहमति दी थी। लेकिन ग्रामीण विकास विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा हड़ताल अवधि का मानदेय नहीं देने की बात को प्रमुखता से अखबार में प्रकाशित कर मनरेगा कर्मचारियों को उकसाने का प्रयास किया है, इससे सरकार एवं कर्मियों के बीच दरार की स्थिति बन रही है। हड़ताल स्थगित होने के बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा आनावश्यक कार्य का दबाव दिया जा रहा है, साथ ही  राजकीय शोक एवं राष्ट्रीय शोक के दिनों में भी कार्य करने का अनावश्यक दबाब देकर परेशान किया जा रहा है, एवं उस दिन भी उनके द्वारा उस पुण्य आत्मा को अपमानित किया गया है। अवकाश एवं पर्व त्योहार के मौसम में कुछ प्रखंड केंद्रीय कर्मचारियों का मानदेय को होल्ड कर पर रखा गया है। जबकि प्रखंड स्तर पर मनरेगा का कन्टीजेंसी का दुरुपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। एक तरफ हड़ताल मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सहानुभूति पूर्वक समझौते से तोड़ा गया, वही हड़ताल समाप्ति के तुरंत बाद मनरेगा आयुक्त के द्वारा मानव दिवस सृजन को लेकर अनावश्यक दबाव मनरेगा अधिनियम के विरुद्ध करना शुरू कर दिया गया। इससे मनरेगा कर्मचारियों का सरकार के प्रति असंतोष गहराते जा रहा है और उनके द्वारा संघ और सरकार के बीच असंतोष की स्थिति पैदा करने का काम किया जा रहा है। इसे सरकार को समझने की आवश्यकता है।
की गई वार्ता तय सीमा जो एक से सवा महीना पूर्ण होने में मात्र अब सप्ताह भर का समय शेष रह गया है और कृत कार्यवाही का दूर-दूर तक कहीं पता नहीं चल रहा है। इसलिए हमने पत्र के माध्यम से आग्रह किया है कि वार्ता के समय बनी सहमति का संकल्प जारी कराने की कृपा करें, साथ ही मनरेगा कर्मचारियों में जो विरोधाभास की स्थिति बन रही है उसे दूर किया जाए।

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