औरतों का आदर्शीकरण करने की कोशिश करती आरडी आनंद की कविता

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फोन पर
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आज मेरे लिए दस फोन आए
इत्तिफ़ाक़ सब स्त्रियों के थे
सब की बातों में समाज की चिंता थी
तकरीबन तीन घंटे बातें हुईं
अब कोई क्या सोच रहा था
यह उसके प्रवृत्ति पर निर्भर करता है।
प्रोफेसर राव का फोन था
सुनने में वह चर्चा बिल्कुल अकादमिक थी
लेकिन थी बहुत ही क्रांतिकारी
वैचारिक क्रांति निहायत।
हिंसा नहीं शांति चाहिए
हृदय परिवर्तन का प्रवर्तन
एक एक कर हजारों लाखों का परिवर्तन
परिणात्मक से गुणात्मक परिवर्तन।
संत विकल्प की तलाश में है
वह फियूचर में
असंख्य मानव को
विकल्पहीन मरते देख रहा है
भूकाछोर आत्मकेंद्रित हैं।
लेखिका बेन ने कहा
स्त्रियाँ विभक्त हैं
नारीवाद स्त्रीमुक्ति के लिए उचित विकल्प नहीं है
दलित स्त्री और सवर्ण स्त्री शोषित स्त्री हैं
सित्रियों को एक दूसरे की मुक्ति के लिए
एकताबद्ध हो जाना चाहिए।
मुक्ति एक पत्रकार हैं
उनसे फोन पर बात हुई
स्त्री मुक्ति पुरुष मुक्ति के साथ संभव है
पुरुषप्रधानता पूँजीवाद के साथ आबद्ध है
समाजवाद ही एकमात्र विकल्प है।
कविता एक बड़ी कवि हैं
उन्होंने बताया
कविता को हथियार बनाना होगा
सारगर्भित शब्दों से सजाना होगा
साली अपने फ़िराक में थी
तो घरवाली अपने फ़िराक में
मेरी राय का कोई मतलब नहीं
व्यक्तिगत संपत्ति जनित मानसिकता
क्रांति विरोधी बना रहता है।
प्रेमिका ने कहा
दुनिया की प्रेमिकाओं एक हो
हम प्रेम के दुश्मनों के विरुद्ध लड़ेंगे
प्रेम के दुश्मन ही सारी फ़साद की जड़ हैं।
दोस्त की राय यह थी
हमें मिलजुल कर कार्य करना चाहिए
दुश्मन बहुत चालक है
नए-नए पैंतड़े फेंकता है
शोषित लक्ष्य से भटक जाता है।
संपादक और प्रकाशक एक मत थे
कॉमरेड! कुछ ऐसा लिखो
जिसमें सर्वहारा वर्ग की स्थिति स्पष्ट हो
यह सच है वर्गों में जातियाँ हैं
और जातियों में वर्ग है
शोषक वर्ग की जातियाँ
एक हैं एकमत हैं
लेकिन शोषित वर्ग की जातियाँ
तनी-तनी ऐंठी-ऐंठी अलग-अलग हैं
इनके वर्गीय एकता का सूत्र क्लियर करो।
आर डी आनंद
06.05.2022

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