ऐपवा नेताओं को पुलिस ने चन्दौली में किया हाउस अरेस्ट

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माले नेताओ एवं रिहाई मंच के नेताओं और डॉ संदीप पांडे को भी किया गया हाउस अरेस्ट
बीएचयू के छात्र छात्राओं पर लगा रही है फर्जी धारायें
★ किसान आंदोलन से डरकर योगी सराकर आंदोलनकारियों को हाउस अरेस्ट करवा रही है-कृष्णा अधिकारी
★किसान आंदोलन योगी सरकार के लिए ताबूत की अंतिम कील साबित होगा- कुसुम वर्मा

उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन के बढ़ते तेवर से घबरा कर योगी सरकार अब किसान आंदोलन समर्थक नेताओ, किसान नेताओं को गिरफ्तारी करा रही है, उन्हें हाउस ऐरेस्ट कर रही हैं।
16 अक्टूबर को सँयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर आयोजित होने वाले पुतला दहन कार्यक्रम (जिसके तहत प्रधानमंत्री, गृहमंत्री एवं केंद्रीय गृहराज्यमंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी की मांग को लेकर पुतला फूंका जाना था) यूपी में सफल न हो इसी वजह से ऐपवा की महिला नेताओ को आज चन्दौली में हाउस अरेस्ट कर लिया है।
ऐपवा जिला सचिव का. प्रमिला मौर्य, उपाध्यक्ष का.श्यामदेई , जिलाध्यक्ष का. मुन्नी गोंड़ को हाउस ऐरेस्ट किया गया और जिला सहसचिव का. सुनीता को लगातार फोन पर पुलिस धमका रही हैं।
ऐपवा नेताओ के साथ चन्दौली समेत प्रदेश के तमाम जिलों से भाकपा माले के नेताओं को भी हाउस अरेस्ट किया है। किसानों के पक्ष में लगातार आवाज उठाने वाले सोशलिस्ट किसान सभा के डॉ संदीप पांडे और रिहाई मंच के राजीव यादव समेत ढेर सारे आंदोनलकरियो को पुलिस ने कल गिरफ्तार किया गया। बलिया के किसान नेता बलवंत यादव को भी अभी गिरफ्तार किया गया है।
हाल में वाराणसी में 4 अक्टूबर को सँयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित लखीमपुरकिसान नरसंहार के शहीद किसानों को श्रद्धांजलि कार्यक्रम करने के कारण बीएचयू के छात्र- छात्राओं पर फर्जी धारायें लगा दी है।
ऐपवा इन गिरफ्तारियों और छात्र छात्राओ पर फर्जी धाराएं लगाने की तीखी निंदा करती है औऱ अतिशीघ्र ऐपवा नेताओ समेत आंदोलनकारियों की तत्काल बिना शर्त सम्मानजनक रिहाई और फर्जी धाराओं को वापस लेने की मांग करती हैं।

ऐपवा प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि देश और प्रदेश में किसान आंदोलन के बढ़ते तेवर से योगी सरकार डर गई है और इसी वजह से नेताओं को नजरबन्द कर रही हैं। उन्हींने कहा कि मुख्यमंत्री के तानाशाही रवैये से प्रदेश की जनता डरने वाले नही है बल्कि यह सराकर जितना किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास करेगी किसान आंदोलन उतनी तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि लखीमपुर किसान नरसंहार के हत्यारो को कड़ी सजा की गारंटी और केंद्रीय गृहराज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ऐपवा प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि किसान आंदोलन को संगठित करने में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका है। महिलाएं अब घरो में चुपचाप नहीं बैठ रही है बल्कि सड़को पर निकलकर किसान आंदोलन को मजबूत कर रही है। ब्राह्मणवादी मनुवादी महिला विरोधी भाजपा सरकार को महिलाओं के यह तेवर बर्दाश्त नही हो रहे इसलिए महिला नेताओ को उनके घरों में नजरबन्द कर रही है। कुसुम वर्मा ने कहा कि विधान सभा चुनाव नजदीक है प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या करके और जनता का दमन करके भाजपा चुनाव नही जीत सकेगी बल्कि किसान आंदोलन ही आगामी विधान सभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ताबूत की अंतिम कील साबित होगा।
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अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन- उत्तर प्रदेश

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