जब मज़दूरों ने सरकार चलाना सीखा और बुद्धिजीवियों का स्थान लिया

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“पार्टी और जनता ने मुझे यह काम सौंपा है और मुझे उनके विश्वास को न्यायसंगत सिद्ध करना है। मेरी सिफारिश है कि आप भी यही करें।” – लेनिन

अक्टूबर क्रांति की विजय के बाद पार्टी और मजदूर वर्ग के सामने उपस्थित एक फ़ौरी कार्यभार था कि पुरानी पूंजीवादी – जमीनदारी राज्य मशीन को नष्ट करना और उसके स्थान पर नई सोवियत राज्य मशीन कायम करना।

प्रशासन के केंद्रीय निकायों की, जन कमिसारियतो कि, लेनिन के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में स्थापना की गई। उन्होंने उनका कार्यक्रम निर्धारित किया और उनके लिए अग्रणी कार्यकर्ता का चयन किया।

नए राज्य का निर्माण बेहद श्रम साध्य कार्य था। सर्वहारा के पास स्वयं अपने कोई दक्षताप्राप्त कर्मी भी नहीं थे। मजदूरों और किसानों को, जो शोषण और आतंक के जुए से हाल ही में मुक्त हुए थे, सरकार चलाने का कोई अनुभव हासिल नहीं था। कठिनाइयां इस तथ्य के कारण और भी बढ़ गई थी कि पूंजीवादी बुद्धिजीवी वर्ग का एक हिस्सा शीर्षस्थ सरकारी कर्मचारी और अवसर पर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भितरघात करने में कुछ भी नहीं उठा रहे थे। पार्टी ने अपनी श्रेष्ठतम शक्तियों को सोवियत सरकारी तंत्र में समाविष्ट किया और साधारण जनता के बीच से हजारों हजार पुरुषों और स्त्रियों को सोवियत राज्य के निर्माण के कार्य के लिए जुटाया।

लेनिन ने जनता से आग्रह किया कि हर कीमत पर वह इस “पुराने वाहियात, बर्बर, तुच्छ, और घृणास्पद पूर्वाग्रह से छुटकारा पाए कि केवल तथाकथित “उच्च वर्ग”, धनी लोग और उनके बगलबच्चे देश का शासन करने के योग्य होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि साधारण मजदूर और किसान सांगठनिक कार्य संपन्न करने में पूर्णता सक्षम होते हैं बशर्ते कि वे साक्षर हो, उन्हें मानव स्वभाव का ज्ञान हो और उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। “शुरू में” साधारण जनता को उनकी क्षमताओं में विश्वास दिलाते हुए उन्होंने कहा “अपर्याप्त परीक्षण के कारण कठिनाइयां उठ खड़ी हो सकती है। लेकिन सरकार चलाने की कला में जिस पर पूंजीपति वर्ग अपनी इजारेदारी कायम किए जा रहा है, अवश्य ही दक्षता प्राप्त करनी होगी।

एक अवसर पर कुछ श्रमिक जन जो कि एक जन कमिसारियत में कुछ पदों पर नियुक्त किए गए थे, लेनिन के पास आए और उनसे कहा कि उनसे अपना काम ठीक से नहीं चल पा रहा है। क्या वह अपने कारखानों में वापस जा सकते हैं? लेनिन बड़े ध्यान से उनकी बातें सुनते रहे फिर बोले, “मैंने भी किसी राज्य का पहले शासन नहीं चलाया है, लेकिन पार्टी और जनता ने मुझे यह काम सौंपा है और मुझे उनके विश्वास को न्यायसंगत सिद्ध करना है। मेरी सिफारिश है कि आप भी यही करें।

लेनिन की अपीलों की मजदूरों और किसानों में बड़ी उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया होती थी। बोलशेविक पार्टी के नेतृत्व के अंतर्गत, उन्होंने सरकार चलाने की कला क्रमशः दक्षता प्राप्त की। जनता के सच्चे सोवियत राज्य की शक्ति लेनिन प्रथम था उसके सामाजिक मूलाधारो के स्थायित्व में, श्रमिक जनों से उसे मिलने वाले निष्ठापूर्ण समर्थन में, श्रमिक जनों की राजनीतिक चेतना के उच्च स्तर में, देखते थे।

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