दशकों से लोगों को युद्ध एवं हिंसा के प्रति उकसाया और प्रेरित किया जा रहा है: सारिका

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कॉमरेड भगत सिंह के जन्म दिवस पर उनके विचारों और वर्तमान परिदृश्य में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय हालात पर एक परिचर्चा

28 सितंबर 2022, बुधवार, इंदौर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, इंदौर ने शहीद ए आज़म कॉमरेड भगत सिंह के जन्म दिवस पर उनके विचारों और वर्तमान परिदृश्य में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय हालात पर एक परिचर्चा का आयोजन किया।

कॉमरेड विनीत तिवारी ने भगत सिंह के जीवन और विचारों पर आर्य समाज से लेकर ग़दर पार्टी के क्रांतिकारियों और बाद में गणेश शंकर विद्यार्थी, शौकत उस्मानी और अन्य कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों का असर रहा। कानपुर प्रवास के दौरान वे मजदूर आंदोलन के सम्पर्क में आये तभी से उनके लेखन और चिंतन में वर्गीय समझदारी स्पष्ट तौर पर शामिल हुई। इसलिए जब मजदूरों के अधिकारों को खत्म करने के लिए ‘ट्रेड डिस्प्यूट बिल’ और नागरिकों के विरोध को दबाने के लिए ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ अंग्रेज सरकार द्वारा लाया गया तो उसके लिए लोगों को जागरूक करने के मकसद से उन्होंने असेम्बली में बम फेंका। उनका मकसद किसी को मारना नहीं था और बम फेंककर भागना भी नहीं था। इसलिए खुद की गिरफ्तारी करवा कर अदालत और समाचार पत्रों का उपयोग अंग्रेजों के जुल्म को दुनिया के सामने लाने और लोगों तक अपने विचार पहुँचाने के लिए किया।

इस परिचर्चा की शुरुआत में विनम्र मिश्र ने शहीद भगत सिंह की जीवनी और उनके विचारों पर प्रकाश डालते हुए स्वरचित कविता सुनाई। उनके बारे में जानकारी देते हुए विनम्र ने बताया कि भगत सिंह और उनके साथियों ने असेम्बली में बम अंग्रजों की बहरी सरकार को सुनाने के लिए फेंका था। उनकी समाजवादी, कम्युनिस्ट और नास्तिक पहचान को दबाया जाता है जबकि उन्होंने ही हिंदुस्तान रिपब्लिक आर्मी का नाम बदलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोशिएशन रखा था।

कॉमरेड सारिका श्रीवास्तव ने मौजूदा हालातों का जिक्र करते हुए बताया कि दशकों से लोगों को युद्ध एवं हिंसा के प्रति उकसाया और प्रेरित किया जा रहा है। जिसके लिए बाकायदा पहले आपसी बैर फिर घृणा, नफरत, छोटे-छोटे झगड़े, दंगे और फिर हाथियारों के प्रति लगाव की स्थितियाँ पैदा की गईं। और अब ये छोटे-छोटे दंगे विकराल रूप धारण कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के बीच के मतभेद फिर से युद्ध की तरफ बढ़ रहे हैं। हमें भगत सिंह के विचारों को खासकर युद्ध एवं सांप्रदायिकता विरोधी विचार वाले लेखों को अधिक से अधिक जनमानस के बीच प्रचारित एवं प्रसारित करने की जरूरत है। भगतसिंह को जिस तरह उग्रवादी प्रवत्ति का बताकर लोगों के बीच स्थापित किया जा रहा है वह बहुत खतरनाक है हमें भगतसिंह की सही छवि स्थापित करने की जरूरत है। इसके साथ ही सारिका ने गोरख पांडे की कविता “दंगा”, बर्तोल्द ब्रेख्त की कविता “नेता जब शांति की बात करते हैं”, “भूखों की रोटी हड़प ली गयी है”और अफ्रीकी-अमेरिकी कवि लेस्ली पिंकने हिल की कविता “हत्यारों की शिनाख्त” का पाठ किया।

परिचर्चा के अंत में ध्रुव नारायण (बिहार) ने कहा कि भगतसिंह को सब अपने-अपने पाले में इस्तेमाल करना चाहते हैं और उनके विचारों को छोड़ देना चाहते हैं। आज के दौर की जरूरत यह है हम मौजूदा हालात को भगत सिंह की नज़र से देखें और सोचें कि वो आज होते तो क्या करते।

इस बैठक में साम्राज्यवादी अमेरिका द्वारा उकसाए गए रूस-युक्रेन युद्ध और भारत में विरोधी स्वरों को कभी आतंकवाद, कभी माओवाद और नक्सलवाद का ठप्पा लगाकर दबाने का विरोध किया गया और भगतसिंह के विचारों को आमजन तक ले जाने का प्रस्तव भी रखा।

इस परिचर्चा में रामआसरे पांडेय, केसरी सिंह चिढार, भारत सिंह ने भी अपने विचार रखे। यह बैठक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कार्यालय शहीद भवन में आयोजित की गई थी।

विनम्र मिश्र एवं सारिका श्रीवास्तव
9589862420

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