सरकार के वादा खिलाफी से आक्रोशित मनरेगा कर्मियों का हड़ताल की धमकी

58
1554
विशद कुमार
 झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेस अध्यक्ष जॉन पीटर बागे ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि पूरा देश और प्रदेश कोरोना महामारी के भयंकर प्रकोप से प्रतिदिन जुझ रहा हैं, ऐसे समय में सरकार के साथ संघ का तोल-मोल करने की मंशा बिल्कुल भी नहीं है। लेकिन सरकार के निष्ठुर और असंवेदनशील रवैये की वजह से और बार-बार सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन को पूरा न करने के मद्देनजर तथा कोरोना वायरस के सम्भावित खतरे के दृष्टिगत सामाजिक सुरक्षा एवं जीवन बीमा के लिए हम मनरेगा कर्मी गुहार लगा रहे हैं I
               वर्ष 2020-21 में एवं उसके पूर्व विश्वनाथ भगत, ज्योति सल्गी एक्का, ओविदन टूड्डु, दुलाल सिंह मुण्डा, एवं धनन्जय पुरान सहित हमारे कई साथियों की मृत्यु कार्य बोझ, मानसिक दबाव, हाइपर टेंशन एवं इलाज के अभाव में हो गई। लेकिन सरकार ने उनके आश्रितों को एक रुपये भी मुआवजा अथवा बीमा के रूप में नहीं दिया है, इसी आक्रोश के कारण राज्य के सभी मनरेगा कर्मियों ने पिछले 27/07/2020 से 10/09/2020 तक अनिश्चितकालीन हड़ताल किया था। हड़ताल के दौरान हमारे शीर्ष नेतृत्वकर्ता साथी प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय और मुकेश राम धनबाद जिला अध्यक्ष को बर्खास्त कर दिया गया। बहरहाल 10/09/2020 को राज्य के मनरेगा कर्मियों ने सरकार के आश्वासन पर भरोसा करके काम पर लौटने का निर्णय लिया था। लेकिन हड़ताल टूटने के 8 माह बाद भी सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन (दुर्घटनाबीमा, जीवनबीमा, मृत मनरेगा कर्मियों के आश्रित को मुआवजा, मानदेय बढ़ोतरी, महँगाई भर्ती एवं अन्य मांगों को एक से डेढ़ माह में पूरा करने का आश्वासन दियागयाथा) जो आज तक पूरा नहीं किया गया।
             कोरोना वायरस के दूसरे लहर वर्ष 2021 ने हमारे  छः साथियों को एक-एक करके निगल लिया है, जिनमें 1. अरुणा लकड़ा (राँची), 2. संतोष चौरसिया ( धनबाद), 3. प्रभा एक्का (सिमडेगा), 4. मो0 शमशेर अंसारी (गिरिडीह), 5. जगदीश तिर्की (राँची) और 6. लिट्टू उरांव ( राँची) शामिल हैं।
         बिना सुरक्षा, बिना बीमा एवं अन्य सुविधाओं के मनरेगा कर्मियों से कोरोना ड्यूटी ली जा रही हैं, जिससे कई मनरेगा कर्मी प्रतिदिन संक्रमित हो रहे है, साथ ही साथ अपने परिवार को भी संक्रमित कर रहे हैं। जिस कारण कई कर्मियों के परिवार के सदस्यों की भी मृत्यु हो गई है। साथ ही अर्थाभाव के कारण इलाज नहीं करा पाने से उनकी स्थित दिन व दिन बिगड़ती जा रही हैं। राज्य के मनरेगा कर्मी सरकार की वादा खिलाफी और साथियों के मृत्यु से आक्रोशित होकर अपनी जान बचाने के लिए पुन: हड़ताल पर जाने की मांग कर रहे हैं। बावजूद संघ की ओर से मांग पूरा करने के लिए सरकार को लिखे गए पत्र को सरकार द्वारा बार बार हल्का में लिया जा रहा। अभी तक सरकार की ओर से मनरेगा कर्मियों के लिए किसी प्रकार का कोई सार्थक पहल नहीं किया गया है। ऐसी स्थिती में मनरेगा कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए और हमारी मांगों को पूरा करने के लिए संघ द्वारा सरकार को पुन: मांग पत्र दिया गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here