अर्नब कॉलिंग अर्नब!

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-इज़ दिस अर्नब? 

-या। हू इज़ कॉलिंग?
-अर्नब!
-टेल मी अर्नब।
-ये लीक्ड व्हाट्सएप चैट का क्या मसला है?
-नो कमेंट्स।
-कम ऑन। मैं अर्नब बोल रहा हूं। ईदर यू हैव टु डिनाय ऑर यू हैव टु कन्फर्म। फॉर यू टु से नो कमेंट्स इज़ नॉट एन ऑप्शन।
-नोबडी टेल्स अर्नब टु व्हाट टु से ऑर व्हाट नॉट टु से।
-बट आई एम नॉट नोबडी। मैं अर्नब हूं। मैं जब किसी से कुछ पूछता हूं तो मैं नहीं पूछता। देश पूछता है, दुनिया पूछती है। प्लेनेट अर्थ पूछता है। ब्रह्मांड पूछता है।
-तो मैं भी तो अर्नब हूं। मैं सवालों के जवाब नहीं देता। मैं सवाल करता हूं। सवाल के रूप में कमेंट बल्कि कमेंट्री करता हूं। मेरे शो में मैं ही सवाल करता हूं। मैं ही जवाब देता हूं। किसी को बोलने नहीं देता। जो बोलने की कोशिश करता है, उसे चुप करा देता हूं। चिल्ला कर। उसकी बेइज्जती कर। उस पर दूसरे पैनलिस्ट छोड़कर। केवल पात्रा अपवाद है।
-तो तुम्हारे कहने का मतलब है कि सिर्फ पात्रा ही पूछे तो जवाब दोगे?
-नहीं। पात्रा अपवाद है बोलने के मामले में चूंकि वह एनएम का खास है,  पूछ तो वह भी नहीं सकता।
-एन एम बोले तो?
-मैं क्यों बताऊं? मैं तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाला।
-इतना तो बता दो, ये वही एनएम है जो अपनी गुजराती कविताएं तुम्हें अनुवाद के लिए भेजता है।
-नो कमेंट्स।
-ओके। पुलवामा, बालाकोट के बारे में क्या जानते हो?
-नो कमेंट्स।
-ओके। दूसरे विषयों पर बात करते हैं। सुशांत केस का क्या हुआ?
-उस केस की याद न दिलाओ, अर्नब!  किस्मत ने साथ न दिया। 302 लग जाती तो पुलित्ज़र के लिए लॉबिंग सॉरी कोशिश कर सकता था।
-सीबीआई पर दबाव तो अब भी डलवा सकते हो एएस से या पीएमओ से।
-पता नहीं। पहले ये बताओ, तुम ये कॉल रिकॉर्ड तो नहीं कर रहे?
-नहीं। तुम जानते हो मैं ऐसा नहीं कर सकता। वैसे तुम्हें किस बात का डर?
-सही कहा। डरता तो मैं अपने आप से भी नहीं। खैर, मुझे डिबेट की तैयारी करनी है। इसलिए फोन काटो।
-ओके। बाय अर्नब।
-बबाय अर्नब।
#दिमागकादही
साभार :

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