आजाद भारत एक असफल राष्ट पाकिस्तान से प्रतिद्वन्दिता करके गौरवान्वित महसूस कर रहा है!!!

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रामानुजम्–वर्चुअल स्मृति सभा की रिपोर्ट
उमंग लाइब्रेरी के सौजन्य से रामनुजम् के निधन की शतवार्षिकी के अवसर पर छात्रों को सम्बोधित करते हुए उनकी प्रतिभा, उपलव्धियों एवं वर्तमान समय में वैज्ञानिक प्रतिभाओं की स्थिति पर विस्तार से डा० रवि सिन्हा द्वारा प्रकाश डाला गया। एम०आई०टी केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से भौतिक शास्त्र में डाक्टरेट करने वाले डा० सिन्हा आजीवन समाजवाद की सैद्धान्तिक चुनौतियों एवं उसके क्रियान्वयन की सम्भावनाओं पर सक्रिय रहे हैं।
डा० रवि सिन्हा द्वारा श्री रामानुजम के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्री रामानुजम का पैत्रिक ग्राम यद्यपि कुम्भकोणम था तथापि उनका जन्म ननिहाल ईरोड में हुआ था। श्री एस०एल०लोनी की त्रिकोणमिति की किताब रामानुजम को 10 वर्ष की उम्र में ही पढ़ लिया। श्री जी०एस०कार की किताब में गणित के हजारो निष्कर्षो को 16 वर्ष की उम्र में सिद्ध कर डाला। बचपन में ही शादी हो जाने के कारण घरेलू जरुरतों के लिए तत्कालीन कलेक्टर श्री जी० रामास्वामी अय्यर के सहयोग से उनको जीविकोपार्जन के लिए नौकरी मिल सकी। गणित में अपनी रुचि के कारण उन्होने उस समय इग्लैण्ड के गणित के सबसे बड़े विदृवान श्री हार्डी को अपनी स्थितियों का वर्णन करते हुए गणित की अपनी खोजों के सम्बन्ध में पत्र लिखा। श्री हार्डी उनकी प्रतिभा से चमत्कृत रह गए। श्री हार्डी के प्रयास से श्री रामानुजम ने कैम्ब्रिज में प्रवेश लिया। अपने ब्राम्हणी संस्कारों एवं शाकाहारी खानपान के कारण रामानुजम इग्लैण्ड के विपरीत मौसम में पेट की गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो गए और 1920 में 32 वर्ष की उम्र में उनका भारत लौटकर निधन हो गया।
श्री रामनुजम के समकालीन भारत में श्री जगदीश चन्द्र बोस, श्री एस०एन०बोस, श्री बी०सी० महालनवीस, श्री सी०वी०रमन, श्री एस०चन्द्रशेखर, श्री मेघनाथ साहा, श्री होमी भाभा जैसी विश्व स्तरीय प्रतिभाएं एकाएक क्यों उभरी जिनमें से कुछ को नोबेल भी मिला ऐसा सुयोग क्यों हुआ। इसके कारणों की विवेचना करते हुए रवि सिन्हा ने बताया कि उस समय का भारतीय बौद्धिक वर्ग आधुनिक विज्ञान से आलोकित होकर साम्राज्यवादी प्रभुओं जो तत्कालीन विश्व में ज्ञान विज्ञान में शीर्षस्थ थे, से प्रतिद्वन्दिता करते हुए अपनी क्षमता को नयी उंचाई प्रदान किया। यानी गुलाम भारत ने अपने से ज्यादा सफल और उन्नत सभ्यताओं को चैलेन्ज किया लेकिन दुर्भाग्य से आज का आजाद भारत एक असफल राष्ट पाकिस्तान से प्रतिद्वन्दिता करके गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

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