विद्यानंद चौधरी की कविताः घटना नही पर एक सवाल

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घटना नही पर एक सवाल
घटनाओं ने नही सवालों ने
गढ़े और लिखे इतिहासौ के पन्ने
घटनाओं ने दिखाए सिर्फ तय किए रास्ते
सवालों ने बनाई नई राहें
जैसे धरती का बनना एक घटना थी
कैसे बनी यह सवाल सवाल था
ईश्वर का अवतार एक घटना थी
पर ईश्वर पर सवाल वैज्ञानिकता का रास्ता बना
ईश्वर के अवतारी ब्राह्मणों का आना घटना थी
ब्राह्मणवाद पर सवाल संघर्ष का रास्ता बना
शोषकों का आना घटनाएं थी
शोषण पर सवाल संघर्ष का रास्ता बना
मेहनतकशों का मेहनत रोज की घटनाऐं बनी
मेहनतकशों के हालात पर सवाल
द्वंद्ववाद का आधार बना
प्रकृति के हरेक परिवर्तन में घटनाएं परिलक्षित हुई
हरेक परिवर्तन एक सवाल बना
हर सवाल शोध और विज्ञान के रास्ते बने।
जैसे वर्गों का बनना घटनाओं का क्रम था
वर्गों पर सवाल वर्ग संघर्ष का आधार बना
सामंतों सम्राटों की लड़ाई
पूंजीवादी साम्राज्यवादी होड़
घटनाओं के क्रमवार अवतरण
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुए
राजाओं और सम्राटों जीतों और हारों में।
मेहनतकशों चिंतकों के सवाल
इन जीतों और हारों के पड़े
श्रम और शोषण के सवाल बने
शोषण दमन के खिलाफ संघर्ष के रास्ते बने
इन सवालों ने शोषण के खात्मे की
मानव के वर्गीय गुलामी से मुक्ति के
वर्गविहीन समाज निर्माण के रास्ते दिए
दायित्व दुनिया के अन्वेषण का नहीं
कहे को दोहराने का नही
बने बनाए इतिहास पर चलने का नहीं।
इतिहास की एकरेखीय गति पर
शोषण के सततता पर सवाल करने का है।
दुनिया को परिभाषित करने का नहीं
दुनियां को बदलने का है।
सवाल आते रहें अनवरत।
संघर्ष चलते रहें अनवरत।
मुक्ति की राह पर
संघर्ष बढ़ता रहे अनवरत।

विद्यानंद चौधरी

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