वोट दो, वैक्सीन लो!

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महेश राजपूत के ब्लॉग बैठे-ठाले से साभार

-तो कोरोना वैक्सीन बिहार के सभी लोगों को मुफ्त में लगाएंगे?
-पार्टी का बिहार चुनाव के लिए घोषणापत्र तो यही कहता है।
-बाकी देशवासियों को नहीं लगाएंगे?
-हमने तो ऐसा नहीं कहा।
-मुफ्त में नहीं लगाएंगे?
-हमने ऐसा भी नहीं कहा।
-अच्छा, सबसे पहले बिहारवासियों को लगाएंगे?
-आप बड़े बदमाश हैं। बिहार बनाम भारत का मुद्दा बना रहे हैं। हम कोरोना जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं करते।
-गुस्सा न करिये। बिहार में टीका लगाने का क्रम क्या होगा?
-ये कैसा सवाल है?
-सबसे पहले उन्हें लगेगा जिन्होंने बीजेपी को वोट दिया?
-यह शरारतपूर्ण सवाल है। “हैव यू स्टॉप्ड बीटिंग युअर वाईफ?“ टाइप। मैं इसका जवाब नहीं देने वाला।
-फिर जेडीयू के वोटर। उसके बाद एलजेपी के?
-व्हाट नॉनसेंस? सरकार सभी के लिए होती है, सिर्फ सत्तारूढ़ पार्टी या गठबंधन के वोटरों के लिए नहीं। जैसे हमारे पीएम सभी १२५ करोड़ देशवासियों के पीएम हैं, केवल ६०० करोड़ मतदाताओं के नहीं।
-बिलकुल। इसीलिए मैं पूछना चाहता था कि उन बिहार वासियों का क्या होगा जो आपको वोट नहीं देंगे? जो आपके सहयोगी दल को वोट नहीं देंगे? या जो वोट देंगे ही नहीं?
-सबको वैक्सीन मिलेगा, हमें सत्ता में आने तो दीजिये।
-उनका क्या जो बिहार में रजिस्टर्ड वोटर हैं पर रहते देश के कोने-कोने में हैं? क्या उन्हें टीका नहीं मिलेगा?
-टीका कोई रेवड़ी नहीं है, जो हम केवल अपनों में ही बांटेंगे, सबको मिलेगा। जो जहां होगा, उसे वहीं मिलेगा। पीएम घोषणा कर चुके हैं अपने टीवी संदेश में कि सभी देशवासियों तक वैक्सीन पहुंचाने की तैयारियां चल रही हैं।
-तो पीएम के संदेश में बिहार शामिल नहीं था?
-ये कैसी बात कर रहे हैं आप? बिहार भारत का ही अंग है, कोई दूसरा देश या टापू नहीं है।
-तो फिर बिहार के चुनावी घोषणापत्र में इस जुमले को शामिल करने की ज़रूरत क्या थी?
-हमारे संकल्प को आप जुमला बोल रहे हैं?
-जी गुस्ताखी माफ पर १५ लाख के पीएम के वचन को जुमला तो आपके पूर्व अध्यक्ष ने कहा था।
-आप मीडिया वालों को न, बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की आदत हो गई है। मैं आपसे बात नहीं करता। इंटरव्यू समाप्त।
-ओके, ओके जाने से पहले यह तो बताते जाएं कि दोस्ती बनी रहेगी या नहीं?
#दिमाग का दही! -महेश राजपूत

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