उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव : वादे और योगी सरकार की हक़ीक़त

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■उत्तर प्रदेश में चुनावी समर और मुख्य राजनीतिक पार्टियां-
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उत्तर प्रदेश में इस वक्त विधान सभा चुनाव का माहौल है। सत्तासीन भाजपा के अतिरिक्त मुख्य रूप से सपा, कांग्रेस और बसपा सरीखी पार्टियां इस बार प्रमुख रूप से बड़ी विपक्षी पार्टियों के तौर पर चुनाव मैदान हैं। इस चुनाव में सभी पार्टियां अपने तरीके से इस बार महिला वोटरों को लुभाने का प्रयास कर रही हैं।चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश में कुल वोटरों की संख्या 14.6 करोड़ है और इसमे महिला वोटरों की संख्या लगभग 6.70 करोड़ है।
हालॉकि उत्तर प्रदेश के इस विंधानसभा चुनाव में कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी ने आधी आबादी को आकर्षित करने के लिए “लड़की हूँ लड़ सकती हूँ” के ओजपूर्ण नारे और 40 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर चुनावी समर में नई चर्चा शुरू कर दी है। लेकिन यह सर्व विदित है कि कांग्रेस ने अपने शासन काल मे निर्भया बलात्कार कांड से लेकर भूमी संघर्षो में लड़ रही आंदोलनरत महिलाओं को लड़ने के लिये कभी प्रेरित नहीं किया उल्टा उनका दमन ही किया है।

■उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के साढ़े चार साल :
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2017 में प्रचंड बहुमत से उत्तर प्रदेश में भाजपा ने सरकार बनायी। मुख्यमंत्री बनते योगी आदित्यनाथ ने एक तरफ “कानून के राज” और “अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा”/ महिला सशक्तिकरण का उदघोष किया तो दूसरी तरफ महिला विरोधी कानूनों का निर्माण करवाया औऱ संविधान और लोकतंत्र की अवेहलना करते हुए “अपराधियों को ठोक दो ” का भी स्वघोष किया। मुख्यमंत्री बनते ही महिला सुरक्षा के नाम पर अपनी सत्ता के बल पर “ऐंटी रोमियो स्क्वाड”, विधी विरुद्ध धर्म परिवर्तन अधिनियम 2021, जनसंख्या नियंत्रण बिल 2021 सरीखे ऐसे कानूनों का निर्माण कराया जो घोर महिला विरोधी है और असंवैधानिक भी। राष्ट्रीय महिला आयोग और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बता रहे है कि महिला अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश शर्मनाक ढंग से पहले नम्बर पर है।
उन्नाव से लेकर , लखीमपुरखीरी, पीलीभीत, देवरिया, गोरखपुर, कानपुर आगरा, हाथरस आदि घटनाओं ने यह जाहिर कर दिया है कि योगी राज में महिलाएं सुरक्षित नही है। वह बलात्कार, यौन उत्पीड़न झेलते हुए मरने के लिए मजबूर की जा रही है, वह खुलेआम धमकाई जा रही है और उनसे जीने का अधिकार भी छीना जा रहा है। अपराधियो को सजा नही हो रही है बल्कि उन्हें सत्ता संरक्षण खुलेआम मिल रहा है। हाथरस कांड में तो यूपी पुलिस का असली चेहरा साफ़ हो गया। बलात्कार पीड़िता का शव उसके परिवार को दिए बिना आधी रात में मिट्टी का तेल छिड़कर जला दिया गया, उसकी हत्या की गई। जिसमें यूपी पुलिस खुद शामिल रही। जनाक्रोश के चलते उच्च स्तरीय जांच भी बैठी लेकिन न्याय आज तक नहीं मिला। यह न्याय व्यवस्था पर भी क़ई सवाल खड़ा करती है?

 

【योगी सरकार में महिला अपराध में यूपी नम्बर वन
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◆ 2017 में महिला अपराध के 56,011 मामले दर्ज हुए जो 2019 में बढ़कर 59,853 हो गए।
◆2018 में 1411 नाबालिगों सहित, 4,322 पीड़ितो के साथ 3,946 बलात्कार के मामले दर्ज हुए।
◆ 2018 में ही POCSO के तहत 5, 401 मामले दर्ज हुए
◆2018 की रिपोर्ट बताती है कि हर दो घण्टे में यूपी पुलिस के पास बलात्कार के मामले आते हैं
(स्रोत:2020 के एनसीआरबी के आंकड़े)】

■भाजपा के हिन्दुत्त्व का अजेंडा और 80 और 100 प्रतिशत की चुनावी गणित:
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आगामी विधानसभा चुनाव में महिला सुरक्षा, महंगाई, स्वास्थ्य,रोजगार सरीखे सवाल मुख्य मुद्दा न बने इसलिये मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने एक बार फिर साम्प्रदायिक बयान देते हुए कहा कि इस प्रदेश में 80℅ बनाम 20%का चुनाव होगा और इस बार भी भाजपा प्रदेश में बरक़रार रहेगी। सनद रहे कि मुख्यमंत्री बनने से पहले भी योगी आदित्यनाथ मुस्लिम महिलाओं को टारगेट करते हुए क़ई बार जहर उगल चुके हैं। उत्तर प्रदेश नफरत औऱ हिंसा की राजनीति का केंद्र बन गया है।

भाजपा इसी तर्ज पर प्रदेश की 20 प्रतिशत मुस्लिम आबादी और 80 प्रतिशत हिन्दुओ के बीच खाई पैदा करके अपनी चुनावीगणित लगाकर अपने हिंदुत्ववादी फासीवादी सम्प्रदायिक अजेंडे को आगे बढ़ा रही है जिसकी आड़ में कारपोरेट परस्त आर्थिक नीतियों को लागू करती जा रही है। इसी चुनावी मौसम में आगामी लोकसभा (2024)और विधानसभा (2022) चुनाव में जीत हासिल करने के मकसद से वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी ने काशी कॉरीडोर यानी काशी विश्वनाथ भव्य मंदिर नवनिर्माण का शिलान्यास किया। इस कॉरिडोर को बनाने केलिए न सिर्फ क़ई मुहल्लों के घरों को तोड़ा गया बल्कि क़ई विग्रहों को भी तोड़ा गया। मंदिरों के संचालन से मुनाफ़ा कमाया जा सके इसलिए इसका ठेका ब्रिटिश कम्पनी “अर्नेस्ट एन्ड यंग” कोदिया गया है। इसी तरह से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का ठेका “लार्सन और टर्बो” एक निजी कंपनी को दे दिया गया है। निश्चित तौर पर मंदिर और मस्जिद जनता के धर्मिक आस्था के प्रतीक है लेकिन राजनीति के लिए इन प्रतीकों का इस्तेमाल जनता की धार्मिक भावना के साथ छलावा है।

■ स्मार्ट फोन-टेबलेट वितरण के जरिये निगरानी की कोशिश:
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के हर मोर्चे पर फेल योगी सरकार न तो बेटियों की शिक्षा को फ्री कर सकी है और न ही महिलाओं के सम्मानजनक रोज़गार की ही गारंटी कर सकी है। योगी सरकार ने चुनाव में महिला वोटरों को लुभाने की प्रतिद्वंदता में प्रदेश में एक करोड़ छात्र छात्राओं को स्मार्टफोन- टेबलेट बांटने का लक्ष्य रखा है। हालांकि अभी 60 हजार का ही लक्ष्य पूरा किया है।
स्मार्टफोन और टेबलेट की डेटा और निजी जानकारियां सरकार द्वारा आपरेट करने की खबरों को लेकर सरकार की यह योजना आलोचकों के निशाने पर है। फ़ोन का कंट्रोल सरकार की आईटी एडमिन UPDESCO के पास है जिसके जरिये यह फोन भी “पेगासस” की तरह उपभोक्ताओं की जासूसी करेगी। योगी की यह स्मार्ट फोन योजना संविधान के अनुच्छेद 21 – निजता के अधिकार का उल्लंघन है।

■स्कीम वर्कर्स महिलाओं के सँघर्ष:
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उत्तर प्रदेश में आशा- आंगनबाड़ी- रसोईया महिलाएं अपनी मांगों के साथ आंदोलनरत है। इनकी मांगो को सुनने के बजाय योगी सरकार स्कीम वर्कर्स महिलाओं केआंदोलनों को पीछे धकेलने का काम कर रही है। शाजहाँपुर में धरनारत आशा कर्मियों के साथ पुलिस द्वारा यौन हिंसा की शर्मनाक घटना इसका ताजा उदाहरण है।
गांव- गाँव में स्वास्थ्य मिशन को घर-घर पहुंचा रही आशाकर्मी पिछले दिनों सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, वेतमान एवं अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत थी। जिन आशा कार्यर्ताओं ने कोरोना काल में अपनी जान गंवाई उनकी मौत को आज तक गिना ही नहीं गया है। उनके परिवार आज भी मुआवज़े और सरकारी सहायता के लिए इंतजार कर रहे है। इसी तरह से आंगनबाड़ी,रसोईया सभी स्कीम वर्कर्स अपने को स्थायी कर्मचारी के दर्जे के लिए आंदोलनरत है लेकिन इनकी मांगो को यह सरकार लगातार अनसुना कर रही है।
मुख्यमंत्री ने फ्रंटलाइन आशा वर्कर्स के सँगठित आंदोलन से डर कर और आशा वोटरों को लुभाने में लिए स्मार्ट फोन और 500 रुपये देने की घोषणा कर दी है।
कोरोना काल में आर्थिक मंदी झेल रही सेल्फ हेल्प ग्रुप चलाने वाली महिलाओं को जिस प्रकार से कम्पनियों द्वारा परेशान और उत्पीड़ित किया गया और उस समय योगी सरकार की खामोशी किसी से छिपी नहींहै।

■आंदोलनकारी महिलाओं का दमन:
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किसान आंदोलन और CAA- NRC विरोधी आंदोलन में उत्तर प्रदेश में भी भारी सँख्या में महिलाएं सड़को पर आन्दोनलरत हुई। जनआंदोलनों में लोकतंत्र के दमन का यह मंजर रहा की दो दर्जन से अधिक मुस्लिम नौजवान पुलिस की गोली का शिकार हुए। नागरिकता आंदोलन में शामिल महिला नेताओं का पता लगाने के लिये उनकी तस्वीरें राजधानी लखनऊ के विधानसभा चौराहे पर लटकाई गईं।
लखीमपुरखीरी में भाजपा नेता के बेटे द्वारा किसानों की हत्या के विरोध में जब उत्तर प्रदेश में आंदोलनकारियों ने अपना विरोध दर्ज किया तो लोकतंत्र और संविधान को नकारते हुए योगी सरकार ने तमाम महिला आंदोलनकारियों को गिरफ़्तार किया, हाउस अरेस्ट किया । किसान आंदोलन के समर्थन में ऐपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी और प्रदेश उपाध्यक्ष आरती राय को भी हाउस अरेस्ट किया गया। इसी तरह से मिर्जापुर में किसानों और मजदूरों की नेता जीरा भारती, ऐपवा जिला सचिव शांति कोल, जिलाध्यक्ष श्यामकली, उपाध्यक्ष रीता जयसवाल समेत जिले की कई सौ महिला नेताओ को इसलिए फर्जी मुकदमे में फंसा दिया गया क्योंकि वह महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और गरीबो की जमीन बेदखली के सवाल को प्रमुखता से उठा रही थी ।
चन्दौली जिले में किसान आंदोलन के समर्थन में महिला नेता ऐपवा जिला सचिव प्रमिला मौर्य, उपाध्यक्ष श्यामदेई , जिलाध्यक्ष मुन्नी गोंड़, जिला सहसचिव सुनीता आंदोलन में उतरी तो योगी सरकार ने उनके घर पर पुलिस का पहरा बैठा दिया। हाउस अरेस्टिंग के दौरान प्रशासन ने खुद ही कानूनी प्रकिया का उल्लंघन करते हुए कई महिला नेताओं के घर पर महिला पुलिस को नहीं बैठाया यहां तक कि हाउस अरेस्टिंग के दौरान महिला नेताओं को पुलिस कस्टडी में ही शौचालय जाना पड़ा।
लोकतांत्रिक ढंग से विरोध करने का अधिकार जनता को प्राप्त कानूनी अधिकार है जिसे योगी सरकार जनता का दमन करके छीनना चाह रही हैं।

■योगी सरकार में फ्री योजना की सच्चाई;
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मुख्यमंत्री योगी ने खाद्य सुरक्षा वितरण अधिनियम के तहत प्रदेश की 15 करोड़ जनता के लिए फ्री राशन वितरण महाअभियान की घोषणा की है जिसके तहत मार्च तक सभी गरीबों को एक किलो दाल, एक किलो तेल, एक किलो नमक औऱ महीने में दो बार गेंहू , चावल मुफ्त दिया जाएगा। सरकार की यह फ्री राशन योजना सार्वजिनक वितरण प्रणाली के मानकों का पूर्णतया उल्लंघन है( पीडीएस के तहत सरकार को गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों को 35किलो अनाज औऱ ग़रीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को 15 किलो अनाज की गारंटी सुनिश्चित करनी होती है) साथ ही तय समय सीमा की बात करके योगी सरकार ने गरीबो का मज़ाक बनाया है। एक गरीब परिवार को भर पेट खाद्यान्न की व्यवस्था करना सरकार की जिममेदारी के अंतर्गत आता है। नामक के पैकेट में शीशा की मिलावट को महिलाओं ने जगज़ाहिर कर दिया है साथ ही गेंहू और चावल में सैकड़ों कंकड़ पत्थर की शिकायत महिलाएं प्रदेश में लगातार कर रही है। योगी सरकार सरकार वाकई में गरीबी दूर करने के लिये इतनी ही चिंतित है तो वह गांव- गांव में पीडीएस मानकों को मजबूत क्यो नहीं करती? मुफ्त स्वास्थ्य, मुफ्त शिक्षा और मनरेगा में साल भर सम्मानजनक तय मज़दूरीकी गारंटी क्यो नहीं कर रही है?

आगामी विधानसभा चुनाव में महिलाओं को अपनी
सुरक्षा और सम्मान के मुद्दों पर गोलबंद करना औऱ महिला विरोधी विभाजनकारी साम्प्रदायिक ताकतों को पीछे ढकेलना महिलाओं का एक बड़ा प्रश्न बनेगा है इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य औऱ रोज़गार के लिए चल रहे आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाकर सामाजिक संतुलन को उत्तर प्रदेश में बदलाव की दिशा में ले जाने में उत्प्रेरक का काम करेगा।

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