झारखंड में टीएसपी व एसपीएससी द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण व कानून बनाने की मांग

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  • विशद कुमार
झारखंड : झारखंड में अनुसूचित जनजाति उपयोजना और अननुसूचित जाति उपयोजना द्वारा चलायी जा रही सभी योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण उसी समुदाय से कराने तथा झारखंड टीएसपी और एससीएसपी के लिए कानून बनाने की मांग आज रांची स्थिति एचआरडीसी में आयोजित आदिवासी, दलित व अल्पसंख्य समुदाय के संगठनों तथा संस्थाओं की बैठक में गयी। बैठक का आयोजन दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन-एनसीडीएचआर व भोजन के अधिकार अभियान के द्वारा किया गया था।
बैठक में बोलते हुए वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने कहा कि झारखंड में टीएसपी और एससीएसपी द्वारा बहुत सारी योजनाएं चलायी जा रही है, मगर इन योजनाओं में लूट मची हुई है, इसके साथ ही साथ टीएसपी और एससीएसपी की राशि का विचलण हो रहा हैं, जिसके कारण आदिवासी, दलित व वंचित समुदाय को सीधे तौर पर लाभ नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड एक आदिवासी राज्य है, यहां आदिवासी उपयोजना के संचालन के लिए कानून नहीं है, यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार को वर्तमान सत्र में टीएसपी के लिए कानून लाने की जरुरत है।
बैठक में रामदेव विश्वबंधू ने कहा कि अगर सरकार सचमुच झारखंड के दलितों व आदिवासी समुदायों का विकास चाहती है, तो झारखंड में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए कानून बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपयोजना द्वारा चलायी जा रही योजनाओं की निगरानी और एमआईएस विकसित करने की जरूरत है।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पाइलट के तौर कुछ जिलों टीएसपी और एससीएसपी द्वारा चलायी जा रही योजना का सामाजिक अंकेक्षण किया जाए ताकि कार्यान्वयन एजेंसी को जवावदेह बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि झारखंड में अगर मात्र पांच साल के बजट आंकड़ों को देखा जाए तो साफ हो जाएगा कि किस तरह टीएसपी की बहुत बड़ी राशि का विचलण किया गया है या फिर गैर योजना मद में खर्च की गयी है, जो टीएसपी गाईड लाइन का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन। 
गणेश रवि ने कहा कहा कि कानून के साथ सामाजिक अंकेक्षण होना जरूरी है। दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन-एनसीडीएचआर के राज्य समन्वय मिथिलेश कुमार ने कहा कि झारखंड आदिवासी और दलित उपयोजना के लिए झारखंड में एक सख्त कानून की जरूरत है, तभी आदिवासी व दलित समुदाय को इस  उपयोजना का लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य पोस्ट मैट्रिक स्काॅलरशीप योजना को काफी जटील बनायी गयी है, जिसके कारण अधिकांश दलित व आदिवासी छात्र-छात्राएं आवेदन नहीं कर पाते हैं और पोस्ट मैट्रिक स्काॅलरशीप जैसे महत्वपूर्ण योजना से वंचित रह जाते हैं। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पाइलट के तौर कुछ जिलों टीएसपी और एससीएसपी द्वारा चलायी जा रही योजना का सामाजिक अंकेक्षण किया जाए ताकि कार्यान्वयन एजेंसी को जवावदेह बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि झारखंड में अगर मात्र पांच साल के बजट आंकड़ों को देखा जाए तो साफ हो जाएगा कि किस तरह टीएसपी की बहुत बड़ी राशि का विचलण किया गया है या फिर गैर योजना मद में खर्च की गयी है, जो टीएसपी गाईड लाइन का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन।
अफजल अनिश ने कहा कि आदिवासी, दलित समुदाय के साथ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग आज परेशान हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के अल्पसंख्यक समुदाय के लिए मिलने वाली छात्रवृति में बड़े पैमाने पर घोटाला हुई है, जो काफी गभीर मामला है।
बैठक में भोजन के अधिकार अभियान के राज्य संयोजक अशर्फीनंद प्रसाद, दलित युवा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज कुमार भुईया, प्रत्युष, उदय सिंह, अमेरिका उरांव, मनिकचंद कोरवा, सुशीला लकड़ा, राजेश लकड़ा, दिनेश मुर्मू, राजन कुमार, मुनेश्वर कोरवा, माधुरी हेम्ब्रम सहित कई लोगों ने अपनी-अपनी बातें रखीं और झारखंड टीएसपी और एसएसपी के लिए कानून बनाने और टीएसपी से संचालित सभी योजनाओं को सामाजिक अंकेक्षण कराने की मांग की।

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