नहीं रहे विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के केन्द्रीय संयोजक व संस्थापक नेता त्रिदिब घोष

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विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन, झारखंड के संयोजक दामोदर तुरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि आज दिनांक 15 दिसंबर 2020 को विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के केन्द्रीय संयोजक व संस्थापक नेता त्रिदिब घोष, उम्र 82 वर्ष नहीं रहे। उन्होंने आज शाम 4:30 बजे मां राम प्यारी अस्पताल बरियातू, रांची में अंतिम सांस ली। पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस से पीड़ित हो गये थे। त्रिदिब घोष की पत्नी सेवा निवृत्त प्रोफेसर मंलोचो घोष भी कोरोना पोजेटीव हो गई हैं और उसी अस्पताल में भर्ती हैं। त्रिदिब दादा ने जर्मनी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। जब 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बना और झारखंड सरकार ने जल, जंगल, जमीन व समस्त प्राकृतिक संपदाओं को पूंजीपतियों के हाथों बेचने के लिए समझौता पत्र (एम.ओ.यू) पर हस्ताक्षर करने लगी व धरातल पर लागू करने के लिए पोटा जैसे जन विरोधी काला कानून लाया गया था, तब दादा व अन्य सदस्यों की मदद से झारखंड विस्थापन विरोधी समन्वय समिति नामक संगठन बना कर विरोध किया गया था।

स्व. त्रिदिब घोष

22—23 मार्च 2007 में विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन का स्थापना सम्मलेन पटेल भवन, लालपुर, रांची में अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित किया गया था। इस मोर्चा को बनाने में त्रिदिब घोष की सक्रिय भूमिका  थी। विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन का दूसरा केन्द्रीय सम्मलेन हैदराबाद में 9-10 फरवरी 2016 को आयोजित किया गया था। इसमें त्रिदिब घोष को केन्द्रीय संयोजक चुना गया था और इसी रूप में कार्य कर रहे थे। वे आपरेशन ग्रीन हंट विरोधी नागरिक मंच के संयोजक थे। महान नक्सल बाड़ी के 50वीं वर्ष गांठ के अवसर पर महान नक्सल बाड़ी समारोह समिति, झारखंड के संयोजक के नेतृत्व में 16 जिले में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। झारखंड लोक स्वतंत्र संगठन (पी यू सी एल) का निर्माण करने में भी इनकी अहम भूमिका थी। हम विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन झारखंड के सभी सदस्यों को गहरा सदमा लगा है एवं इस दुःख की घड़ी में विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन झारखंड, दादा के परिवार के सदस्यों के साथ गहरा दुःख एवं संवेदना व्यक्त करता है तथा उनके साथ खड़ा है।

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