ट्रांसजेंडरों के लिए अलग शौचालय की उठाई मांग

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वाराणसी कचहरी परिसर में महिला और ट्रांसजेंडर नागरिकों की असुविधा  को देखते हुए उठाई गयी शौचालय की मांग। महिलाओं के लिए अलग कॉमन रूम और काउंसलिंग रूम के समर्थन में शुरू हुई कोशिश।
महोदय , आज गुरुवार 21 अक्टूबर 2021 को वाराणसी कचहरी परिसर में महिला और ट्रांसजेंडर नागरिकों की असुविधा को देखते हुए उठाई गयी शौचालय की मांग। महिलाओं के लिए अलग कॉमन रूम और काउंसलिंग रूम के समर्थन में शुरू हुई कोशिश।
बनारस शहर के कचहरी परिसर में आज युवतियों का समूह कुछ बेहद आकर्षक और गंभीर मांगो की तख्तियाँ गले में लटकाए हुए पंहुची। परिसर में महिला वकीलों वादकारियों के बीच कुछ पर्चे वितरित करते हुए एक महिला ने कहा की , सार्वजनिक स्थानों पर प्रायः पाया गया है कि महिलाओं और ट्रांसजेंडर नागरिकों के लिए शौचालय, यूरिनल और प्रसाधन कक्ष आदि की व्यवस्था समुचित नही होती है।
इतना विशाल बनारस कचहरी परिसर जंहा रोज़ाना आने जाने वाले हजारों की संख्या है , का उदाहरण लें तो बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति रहती है। लेकिन यंहा महिला शौचालय नही है। विभिन्न न्यायालयों, विभागों और अधिवक्ताओं की चौकी आदि पर महिला अधिवक्ता, कर्मचारी हों अथवा वादकारी उन्हें अक्सर असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
अपना परिचय देते हुए एक नारीवादी कार्यकर्त्री ने बताया की , हम काशी की आधी आबादी की समस्याओं और उनकी सक्रिय सामाजिक राजनैतिक भागीदारी से सरोकार रखने वाले संगठन *”दख़ल” : दमन के ख़िलाफ़ लामबंद* की तरफ से आपसे अपील करते हैं कि हमारे पर्चे में उठाये गए मांगों पर गंभीरता से विचार करियेगा।
सरकार और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराके इस काम को करवाया जाए और एक शुरुआत कलेक्ट्रेट परिसर से हो और फिर विभिन्न स्तर तक बात आगे बढ़े जिससे कुछ सार्थक बदलाव आये:
अपनी मांग को बिन्दुवत रखकर दखल अभियान के कार्यकर्त्रियों ने समर्थन जुटाया ..
1. कलेक्ट्रेट परिसर में महिलाओं  के लिए पर्याप्त संख्या में साफ सुथरे टॉयलेट और यूरिनल बने जहाँ की व्यवस्था महिलाकर्मियों द्वारा ही की जाय।
2. परिसर में महिलाओं के लिए कुछ कॉमन रूम हों जहाँ वे सहजता से कुछ समय विश्राम कर सकें अथवा धात्री महिलाएं बच्चे को स्तनपान करा सकें।
3. न्यायालय के सामने अथवा परिसर में महिलाओं के बैठने के लिए कुछ बेंच या कुर्सियां सुरक्षित रहें।
4. महिलाओं की सुविधा के लिए परिसर में विभिन्न न्यायालयों और कार्यालयों के बाबत एक पूछताछ केंद्र हो जिससे उन्हें अनावश्यक भटकना न पड़े।
5. परिसर में सुलभ और सुविधाजनक स्थान पर सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन की स्थापना की जाए।
6. परिसर में महिलाओं की सुविधा के लिए की गयी व्यवस्था को प्रदर्शित करने के लिए कुछ स्थानो पर बोर्ड लगे हों।
7. ट्रांसजेंडर नागरिकों के लिए भी कचहरी परिसर में अलग शौचालय और कॉमन रूम की व्यवस्था हो।
8. महिलाओं के काउंसलिंग कमरे की अलग से व्यवस्था हो।
9. उक्त सभी व्यवस्था की देखरेख बार काउंसिल और प्रशासन की तरफ से नामित एक समिति करे जिसमें 66 % महिलाएं हों।
परिसर में उपस्थित महिला अधिवक्ताओं ने इन मांगों का समर्थन करते हुए डीएम से मिलने की जरूरत सुझाया।  अन्य जनप्रतिनिधियों से भी इस विषय पर बात करने की जरुरत समझी गयी। आगामी 23 अक्टूबर को अभियान की अगली बैठक तय की गयी।  जनसम्पर्क और पर्चा वितरण कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रंजू सिंह, एकता शेखर, शालिनी , महिमा, शिवि, साक्षी, विजेता, ज्योति, विनय सिंह डॉ इंदु पांडेय, नीति, ओम शुक्ला ऐड0, शुभम श्रीवास्तव ऐड0, रामजनम, प्रेमप्रकाश ऐड0, अजय पटेल, सलमा , शबनम बीबी, मीनाक्षी, मैत्री, राजेश यादव ऐड0, नीतेश , धनञ्जय इत्यदि मौजूद रहे।
प्रेषक
डॉ इन्दु पांडेय
दख़ल : दमन के ख़िलाफ़ लामबंद
8564886156

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