झारखंड के हिस्से की जीएसटी नहीं देने की तीखी भर्त्सना

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रांचीः भाकपा-माले झारखंड राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद और विधायक विनोद सिंह ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र सरकार के निर्देश से झारखंड के खाते से जबरिया बसुली और झारखंड के हिस्से जीएसटी नहीं देने की कार्रवाई की तीखी भर्त्सना की है।
विदित हो कि केंद्र सरकार के निर्देश से डीवीसी की वकाए राशि का 25% हिस्सा 1418 करोड़ रुपए काट लिया है। राज्य के खजाने में मात्र 513 करोड़ ₹ बचा है।कोरोना के इस संकट को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने इसे काटने से मना किया था। राज्य सरकार ने जीएसटी कंपनसेशन मद में ढाई हजार करोड़ रुपए का दावा कर रखा है और कोल इंडिया पर जमीन के एवज में वकाया 40 हजार करोड़ रुपए की भी मांग कर रखा है। राज्य सरकार के वकाया पैसे देने में केंद्र सरकार का पैसे गटक जाने का रवैया और  केंद्र के वकाया की वसूली पर पुराने ग्रामीण सुदखोरों जैसी वसूली का रवैया झारखंड की जनता के साथ अत्याचार है। यह विचित्र स्थिति है कि मोदी-शाह की सरकार अडानी अंबानी के लिए झारखंड की जमीन, खनिज और पानी जबरिया रूप से कब्जा करते जा रहे हैं जबकि झारखंड की जनता के हित के बदले उसे दोहन करने को उतावले हैं। कर्नाटक तमिलनाडु जैसे दूसरे भाजपा सहयोगी कई राज्यों के वकाए के प्रति मोदी सरकार वसूली के प्रति उदार है जबकि झारखंड से जबरिया बसुली यह झारखंड की जनता के साथ दोहरा चरित्र को उजागर किया है।यह संघीय ढांचे के भी खिलाफ है। केंद्र की सत्ता का झारखंड जैसे गरीब राज्य को बेवजह परेशान करने, जनता को उकसाने की कार्रवाई है।
अगर झारखंड की जनता खनिजों को केंद्र की कंपनियों को देना बंद कर दें, अपने वकाए की जबरिया बसुली का रास्ता अपनाए तो यही मोदी सरकार राज्य में राष्ट्रपति शासन का दबाव बनाने लगेगा। झारखंड की जनता मोदी सरकार की इस सूदखोरों जेसे व्यवहार, संघीय ढांचे के साथ खिलवाड़ करने, अडानी अंबानी की लूट राज में तब्दील करने, झारखंड की जनता को संकट में डालने का पूरजोर विरोध करता है। झारखंड की जनता को केंद्र सरकार के इस प्रताड़ना के खिलाफ भाकपा-माले जबरदस्त प्रतिवाद करेगी।मोदी सरकार अडानी अंबानी से यारी और झारखंड की जनता से गद्दारी बंद करो इस आवाज के साथ 19 अक्टूबर को राज्य व्यापी प्रतिवाद करेगा।

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