बीएचयू की छात्रा को न्याय दिलाने को चंदाजीवियों-परजीवियों के ज्ञापन के मोहताज नहीं हैं एसीपी बाबू प्रवीण कुमार सिंह

0
598

वाराणसीः स्त्री-प्रश्न पर हमेशा बेहद संजीदा रुख अपनाने वाले भेलूपुर के एसीपी बाबू प्रवीण कुमार सिंह को बीएचयू में जारी प्रकरण पर बनारस के ‘नागरिक समाज’ की तरफ से एक ज्ञापन दिया गया।
बीएचयू में स्त्री के विरुद्ध अपराध हुआ है, मुद्दा तो गंभीर है पर विडंबना देखिए कि लंका पुलिस की मुस्तैदी-तत्परता-संवेदनशीलता और न्याय-कानून व मनुष्य के प्रति पक्षधरता पर प्रश्नचिह्न कौन लगा रहे हैं और वह भी बनारस के नागरिक समाज का प्रतिनिधि बनकर।
एसीपी साहब को ज्ञापन देते समय सबसे आगे होकर फोटो खिंचवाने का काम कर रहे हैं भुंइहार शिरोमणि मनीष शर्मा, जो भाकपा-माले से हकाले जाने के बाद कम्युनिस्ट फ्रंट नामक बिजूका खड़ा करके मुस्लिमों के बीच से शाम की दारू के लिए चंदा उगाही करने के लिए जाने जाते हैं।
ये महाशय भाकपा-माले के दिनों में जब दलित नौदौलतियों को पटाकर शाम की दारू का इंतजाम करने की तरकीब़ पर चल रहे थे तो सरकारी नौकरी करने वाले दलित इन्हें देखकर सकते में आ जाते थे कि आ गया चंदाखोर भिखमंगा। बताते चलें कि इनके ऊपर पीएफआई के साथ कनेक्शन होने के आरोप लग चुके हैं, जिसके चलते एटीएस के विपिन राय को इनसे घंटों पूछताछ करनी पड़ी थी। सहृदय अधिकारी विपिन राय ने इनके प्रति भलमनसी दिखाई और ये महाशय उसका कथित राजनीति की असल चिरकुटई के लिए लाभ लेने हेतु प्रेस कान्फ्रेंस कर रहे थे।
इनकी अगुवाई में भाकपा-माले का दफ्तार भाँति-भाँति के यौनाचारों और दारूबाजी का अड्डा बना हुआ था, जिससे तंग आकर माले वालों को इन्हें बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा। स्त्री प्रश्न पर इन महाशय की चिंता को इस बात से समझा जा सकता है कि खुद इनकी स्त्री इनके बीवा की उसके डेरे पर नियमित आमद-रफ्त से आजिज आ चुकी थी और दबी जुबान से उसने इसकी शिकायत इन पंक्तियों के लेखक से की थी।
मुनीजा खान जेल की हवा खा चुकी तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ की लाभार्थी हैं। बताने की जरूरत नहीं कि साम्राज्यवादी वित्तीय पूँजी के टुकड़खोरों को स्त्रियों की कितनी चिंता हो सकती है। पीछे अनूप श्रमिक भी खड़े नजर आ रहे हैं, जिनकी एकमात्र तारीफ यह बनती है कि ये एक ऐसे माँ-बाप के दुलरुआ हैं, जिन्हें रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन की पॉलिसी के चलते सरकारी नौकरी मिल गई थी। इन महाशय ने भी गलती से एनजीओ जगत की नौकरी कुछ दिनों तक की थी बाकी तो माँ-बाप का कायदे का पैसा है ही तो राजनीति में तकदीर आजमा रहे हैं।
प्रवीण कुमार से मेरी कुछ पलों की दो मुलाकातें हैं। सुश्री वंदना चौबे द्वारा दर्ज करवाए गए मुकदमे के संबंध में जनाब ने जो नैतिक आक्रोश व्यक्त किया था, उसे याद करके मैं हमेशा के लिए इनका मुरीद बन गया हूँ। स्त्री के प्रति सम्मान संपूर्ण व्यक्तित्व का हिस्सा होता है, जैसा कि बाबू प्रवीण कुमार सिंह के व्यवहार से परिलक्षित-प्रतिबिंबित होता है। बीएचयू की छात्रा को न्याय दिलाने के लिए वह समाज में तलछट की जिंदगी जीने वाले परजीवियों-चंदाजीवियों के ज्ञापन के मोहताज नहीं हैं।
——————–
कामता प्रसाद
ज्ञापन की प्रति इस प्रकार से हैः
प्रति,

एसीपी भेलूपुर, कमिश्नरेट वाराणसी।

आईआईटी बीएचयू की घटना के 13 दिन बीतने के बाद भी अपराधियों को पकड़ा नहीं जा सका है। दूसरी तरफ़ न्याय की मांग कर रहे तमाम छात्र-छात्राओं पर ही प्रशासन की मौजूदगी में एबीवीपी द्वारा हमला किया गया और इन छात्र-छात्राओं पर ही एससी-एसटी एक्ट की गम्भीर धाराएं लगाकर फर्ज़ी मुक़दमा दर्ज कर दिया गया है। जबकि इन छात्र-छात्राओं द्वारा रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से एप्लिकेशन भेजे जाने के बाद भी उनका मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है।

अतः हम बनारस के तमाम नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक-पत्रकार आपसे यह मांग करते हैं कि

  1. पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित किया जाय और उसके अपराधियों को गिरफ्तार किया जाय ।
  2. आन्दोलनरत छात्रों पर लगे मुकदमें वापस लिए जाएं।
  3. आन्दोलनरत छात्रों द्वारा दिये गये एप्लिकेशन पर उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जाये।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here