पथ विक्रेताओं के पंजीकरण, परिचय पत्र तथा उनके रोजगार के मुद्दे पर किया जा रहा है कार्य

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वाराणसी में एम ट्रस्ट तथा आई.जी.एस.एस (नयी दिल्ली) द्वारा सतत शहर परियोजना 3.0 के अंतर्गत पटरी दुकानदारों के साथ उनके पहचान और अधिकारों के विषय पर कार्य किया जा रहा है जिसके अंतर्गत पथ विक्रेताओं के पंजीकरण, परिचय पत्र तथा उनके रोजगार के मुद्दे पर कार्य किया जा रहा है I
एम ट्रस्ट के प्रतिनिधियों – श्री संजय राय (निदेशक एम ट्रस्ट), अमित कुमार (समन्वयक एम ट्रस्ट), के साथ ही इतिहासकार और सामाजिक चिंतक  डॉ मोहम्मद आरिफ द्वारा मीडिया के समक्ष  वाराणसी के स्ट्रीट वेंडरों की स्थिति को रखा गया I
संस्था के निदेशक संजय राय ने कहा की प्रदेश कैबिनेट के द्वारा वर्ष 2016 में ही पटरी दुकानदारों के एक्ट को लागू किया गया है। इसे पथ विक्रेता अधिनियम-2014  के नाम से जाना जाता है । इस पथ विक्रेता अधिनियम का उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स के रोजगार के लिए जगह तय किया जाना, चिन्हित जगहों पर स्ट्रीट वेंडरो को व्यवथित किये जाने के साथ ही उन्हें इसके लिए बाकायदा पहचान कार्ड जारी किये जाने का प्रावधान है। इस एक्ट के तहत पटरी दुकानदारों की दुकानों को हटाया नहीं जाएगा जिसके लिए इस एक्ट के मुताबिक हर निकाय वेंडिंग जोन बनाएगा। प्रदेश कैबिनेट ने जिस एक्ट को पास किया है उसके मुताबिक पटरी दुकानदारों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। कुछ पटरी दुकानदार फेरी लगाते रहेंगे जबकि कुछ के स्थान तय किए जाएंगे। पटरी दुकानदारों का बीमा कराना भी इस योजना का एक हिस्सा होगा। लेकिन वाराणसी में अभी भी इस एक्ट के तहत स्थानीय प्रसाशन का रवैया उदासीन है I उन्होंने कहा की वाराणसी में पंजीयन प्रक्रिया भी बहुत सुस्त है और जिनका पंजीयन किया जा रहा है उन्हें पहचान पत्र नहीं मिल रहा I
डा0 मो0 आरिफ ने कहा की स्ट्रीट वेंडरो के अधिकारों पर कार्य कर रहे एम ट्रस्ट के साथ ही अन्य स्थानीय संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओ द्वारा आये दिन उनके मांग को रखा जाता है लेकिन स्थानीय प्रसाशन इसे गंभीरता से लेने के बजाय उनके साथ बल प्रयोग करके उनके मांग को दबाने का कार्य करता रहा है I वैश्विक महामारी कोविड 19 के चलते पटरी व्यवसायियों के रोजगार की बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गयी है बावजूद इसके ठेला व पटरी दुकानदारों पर चालान की दोहरी मार पड़ रही है। उन्होंने कहा की वाराणसी में अभी तक 25000 वेंडरों का सर्वेक्षण किया गया है जिसमे सभी श्रेणी के वेंडर इसी में शामिल है उनके पास लाइसेंस होने के बाद भी नगर निगम और पुलिस की ओर से कभी अतिक्रमण तो कभी गंदगी के नाम पर चालान और जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। शासन की ओर से रोक के बावजूद शहर में पटरी दुकानदारों को हटाया जा रहा है।
एक मिडिया रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में एक तरफ सरकार पीएम स्वनिधि योजना के तहत पटरी दुकानदारों को लोन दे रही है वहीं, नगर निगम के अधिकारी अभियान चलाकर पटरी दुकानें हटवाकर सामान जब्त करने में जुटे हैं।
शासन ने पटरी दुकानदारों को प्रताड़ित न करने का आदेश बीते 19 अगस्त को दिया है। उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पथ विक्रेताओं को सशक्त बनाने के लिए पीएम स्वनिधि योजना लागू की गई है। यह आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें पटरी दुकानदारों को बिना कोई गारंटी के रु 10, 000(दस हजार) रऋण मुहैया करवाया जा रहा है। लेकिन निगमकर्मियों और पुलिस द्वारा पथ विक्रेताओं को शारीरिक और वित्तीय रूप से प्रताड़ित करने की प्रक्रिया अभी भी आये दिन हो रही है।
भवदीय 
अमित कुमार
समन्वयक एम ट्रस्ट वाराणसी

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