साइकिल चलाने के अनभवों को ताजा कर रहे हैं समाजसेवी राजकुमार गुप्ता

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वर्षो बाद साईकिल चलाकर बचपन याद आ गया .. हर इंसान की खुशी का पैमाने अलग हैं।, कोई #फॉर्च्यूनर खरीद कर इतना खुश नहीं हो सकता।, जितनी खुशी एक पुरानी #साईकिल ने मुझे दी है……

साइकिल चलाने के तमाम फ़ायदे हैं, जिसमें इसके कम लागत, सेहत से जुड़े फायदे और पर्यावरण संरक्षण जैसी बातें शामिल हैं। मैंने जीवन में लगभग पन्द्रह बरस के बाद बीते 22 अक्टूबर 2022 को एक सेकेंड हैंड रेंजर साइकिल खरीदी औऱ उसे चलाना भी शुरू किया। इससे पहले आखिरी बार शायद 2007 तक साइकिल स्कूल जाने और सामाजिक जीवन के शुरुआती दिनों में ही चलाई थी। साइकिल खरीदने और उसके बाद से साइकिलिंग शुरू करने के पीछे वो तमाम कारण तो थे ही जो ऊपर गिनाये गये लेकिन बड़ी वजह यह भी है पिछले सात माह पहलें पैर फैक्चर होने के बाद पैदल चलने में समस्या के चलते डाक्टर के सलाह और फ़्रांस में साइकिलिंग को लोगों के रोजमर्रा के जीवन में शामिल देखना। हिंदुस्तान में सायकिल अभी भी आम लोगों के जीवन में वो स्थान नहीं पा सकी है जो विदेशों में इसे मिला है। दो शहरों पेरिस औऱ बियारेत्ज़ में अधिकांश सड़कों में न केवल साइकिल के अलग ट्रैक बने हैं बल्कि मोबाइल एप आधारित साइकिलें आपकों जहां तहां खड़ी दिख जायेंगी जिसे कोई भी आसानी से इस्तेमाल कर सकता है। हर तरफ साइकिल चलाते लोग नजर आयेंगे जिसमें युवा से लेकर बेहद बुजुर्ग और रोमांटिक जोड़ों के साथ ही दफ्तर जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करते लोग शामिल हैं। वहां इसका आम औऱ खास की सवारी जैसा कोई भेद नहीं नजर आता जैसा हिंदुस्तान में दिखता है। अस्सी साल की बुजुर्ग महिला भी आपको साइकिल से जाती दिख जायेगी और जगह-जगह रेसिंग करते नौजवान भी। कहीं पर साइकिल दिखे तो ऐप के सहारे उसे लेकर जाइये और जहां मर्जी छोड़ दीजिये वहां से कोई दूसरा ले लेगा। ये कुछ कुछ सार्वजनिक परिवहन जैसा था जिसमें अकेले व्यक्ति के इस्तेमाल वाले ऐप से चलने वाले स्कूटर भी शामिल है जिन पर लकदक सूटबूट वाले लोग भी सफर करते दिखे तो वहीं प्रेमी जोड़े इस पर टाइटेनिक के अंदाज में पोज देते हुए भी घूमते हैं। दक्षिणी फ्रांस में अटलांटिक महासागर के किनारे बसे और दुनिया में सर्फिंग के लिए मशहूर शहर बियारित्ज़ में, सुरक्षा कर्मी भी पहाड़ी घुमावदार सड़कों पर साइकिल से जाते नजर आते हैं। जाहिर सी बात है कि भविष्य की इस साइकिल की सवारी करने का लालच भी छोड़ा नहीं जा सका। हिंदुस्तान में भी साइकिल का चलन बढ़ा है खासतौर पर उनमें जो फिटनेस को लेकर जागरूक हो रहे हैं लेकिन विदेशो में इसे सामान्य जीवन में शामिल कर लिया गया है। वहां की सड़के औऱ जीवनशैली साइकिल के हिसाब से मुफीद है। हमारे यहां वैसा होने में शायद अभी कुछ और वक्त लगे। फिलहाल तो सायकिल लॉकडाउन के दौरान प्रवासियो को उनके घर पहुंचाने और एक बच्ची के अपार साहस की विवादित कहानी के चलते चर्चा में थी।

दोस्तों, सायकल चालन को अपने रोजमर्रा के रूटीन में लांना बहुत सारे फायदे में तब्दील करता है इससे आपकी दिन भर कि लाइफ स्टाइल तरोताजा व स्फूर्ति भर देती है हाथ पैर की मांशपेशियों में भी सुदृढ़ता आने लगती है !
मैंने भी इन तमाम फायदो को देखते हुए साइक्लिंग वालो से प्रेरणा ले, सायकल चलाने को अपने दिनचर्या में महत्व दिया है !

साइकिल चलाने से पूरे शरीर का अच्छा व्यायाम हो जाता है, उत्तम स्वास्थ्य के लिए साइकिल ज्यादा नहीं तो प्रतिदिन आधे घंटे अवश्य चलाये। ” तंदुरूस्ती हजार नियामत है ”

सायकिल की सवारी का फ़ायदा य़ह हैं की हमे महंगा टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
सायकिल की सवारी में आपको महंगा पेट्रोल का रोना नही रोना पड़ता है, जिससे आप रोज़ रोज़ पेट्रोल पंप पर जाकर बढ़ती महंगाई से तथाकथित सरकार को गालियां देने के पाप से भी बच जाएंगे।
सायकिल की सवारी से टोलटैक्स व पेट्रोल पर खर्च करने वाले रुपयों से घर का महंगा किराना खरीदने में आसानी रहेंगी।
सायकिल को सवारी से आप शारीरिक रूप से भी स्वस्थ बनेंगे, अनवांटेड फूली हुई तोंद को छुपाने की नाकाम कोशिश नही करना पड़ेगा।

और हाँ सायकिल की सवारी करना देश सेवा है। जहाँ तक संभव हो छोटी- छोटी दूरियों के लिए पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाली मोटरसायकिल और कार आदि का इस्तेमाल कम करें।

इसके कई फायदे हैं।
1.सायकिल चलाने से शारीरिक व्यायाम होता है और हृदय रोग, diabities, high blood presser, मोटापे आदि रोगों से मुक्त रखता है एवम् शरीर को चुस्त दुरुस्त व फुर्तीला बनाता है।

2. देश के विदेशी मुद्रा की बचत होती है।

ज्ञातव्य हो कि लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा विदेशी मुद्रा तेल के आयात पर खर्च होता है।
बाकि के लगभग 30 प्रतिशत विदेशी मुद्रा से हम अन्य जरुरत की सामग्री खरीदते हैं।

3. सायकिल का मेंटेनेंस लागत काफी कम होता है।

4 यह पर्यावरण को प्रदुषण मुक्त रखता है।

5. सायकिल चलाने से आर्थिक लाभ होता है। तेल के बचत होने से जितने आप पेट्रोल पर खर्च करेंगे वह हर महीने बैंक में जमा करते हैं तो 10 से 15 साल में लगभग 3 से 4 लाख बैंक बॅलेन्स हो जायेगा।

सायकिल के महत्व को देखते हुए गूगल जैसी बड़ी कम्पनियाँ अपने ऑफिस परिसर में सायकिल के अलावा दूसरी कोई अन्य तेल से चलने वाली गाड़ी को अनुमति नहीं दिया है।

अब आप समझ ही गए होंगे कि सायकिल से कितना लाभ है। अगर आप सायकिल का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो आज से ही सायकिल की सवारी शुरू कर दें और देश के विकास में योगदान दें।

इसलिए सायकिल चलाये जाओ….
धन्यवाद
आपका शुभाकांक्षी
राजकुमार गुप्ता

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