रोटी को अंबानी-अडानी की तिजौरी में कैद कर देने की साजिश के खिलाफ बहुजनों को लड़ना ही होगा

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  • विशद कुमार
किसान आंदोलन के साथ एकजुटता में 11 वें दिन सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) और बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) के बैनर तले ‘शहीद जगदेव-कर्पूरी संदेश यात्रा’ जारी रही।शाहकुंड प्रखंड के बेलथु, सरहा, कपसौना, मानीकपुर, भट्टाचक, पुरानी खेरही आदि गांवों में ग्रामीणों से संवाद हुआ और सभाएं हुई।
यात्रा के दरम्यान सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के रामानंद पासवान और रंजन कुमार दास ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों का आंदोलन आजादी, लोकतंत्र, संविधान व देश बचाने का आंदोलन है। कृषि कानूनों के जरिए गरीबों से रोटी छीनने व रोटी को अंबानी-अडानी की तिजौरी में कैद कर देने की साजिश के खिलाफ बहुजनों को लड़ना ही होगा। हम रोटी को तिजौरी में कैद नहीं होने देंगे।
सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के सुनील कुमार दास और मृत्युंजय कुमार ने कहा कि रेल, एयरपोर्ट, बैंक, बीमा, बीपीसीएल आदि का निजीकरण करने के साथ खेती-किसानी को भी मोदी सरकार अंबानी-अडानी जैसे कॉरपोरेट घरानों के हवाले कर रही है। इसकी कीमत बहुजन ही चुकाएंगे।
सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के डा. अंजनी और बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) के संजीत कुमार पासवान ने कहा कि मोदी सरकार ने अघोषित रूप से एससी, एसटी व ओबीसी का आरक्षण लगभग ख़त्म कर दिया है। शिक्षा के निजीकरण के जरिए दलित-आदिवासी-पिछड़ों को स्कूल-कॉलेज से बेदखल कर केवल दिहाड़ी मज़दूर बनने की ओर धकेला जा रहा है। यात्रा में बिट्टू कुमार, प्रदीप मांझी, धनंजय कुमार दास, विभीषण कुमार दास, अर्जुन यादव सहित कई लोग शामिल थे।

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