साहित्य संगम’ द्वारा ‘आनलाईन काव्य-गोष्ठी’ का आयोजन

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बेंगलुरु की ‘साहित्य संगम’ संस्था द्वारा ‘आनलाईन काव्य-गोष्ठी’ का आयोजन गत शाम Zoom  एप के माध्यम से किया गया, जिसमें बेंगलुरु के जाने-माने कवियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और झारखंड के कवियों के साथ साथ अन्य राज्यों के कवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में हास्य, श्रंगार, वीर रस सहित विभिन्न रसों की काव्य-धारा देर शाम तक बहती रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रामपुर उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार राम किशोर वर्मा ने की। साहिबगंज, झारखंड से प्रो सुबोध कुमार झा मुख्य अतिथि के रूप में और बरेली, उत्तर प्रदेश से सुभाष राहत बरेलवी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में आनलाईन उपस्थिति रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुनीता सैनी की सरस्वती वंदना से हुआ। उसके बाद एक एक करके सभी कवियों एवं कवयित्रियों ने काव्य प्रस्तुतियां दी। संस्था के संरक्षक और प्रसिद्ध समाजसेवी राम गोपाल मूंदड़ा ने ‘अमर रहे ये रिश्ते अपने प्रियतम, बंधु और मित्रगण प्यारे अच्छे लगते हैं’ और रामपुर, उत्तर प्रदेश के राम किशोर वर्मा ने ‘कृष्ण-सुदामा सा नहीं दिखता कोई मित्र, कितना भी तुम देख लो, दिखे न ऐसा चित्र’ सुनाकर सभी को मित्रता दिवस की शुभकामनाएं दी।
साहिबगंज, झारखंड से प्रो सुबोध कुमार झा ने ‘सावन की आई बहार’ कजरी और कृष्ण यशोदा संवाद ‘कहे यशोदा कृष्ण लला को’ सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। बरेली उत्तर प्रदेश से सुभाष राहत बरेलवी ने ‘आग शिकम की भेष बदल कर जला न डाले खुद्दारी, साहिब दिन पर दिन महंगाई पागल कर के दम लेगी’ सुनाकर मंहगाई के ऊपर जमकर प्रहार किया।
राश दादा राश ने ‘आए बसंत हवा बसंती, ढूंढे साजन साजन की बस्ती’ रचना सुनाकर अपनी कलम का जादू बिखेरा। डॉ सुनील तरुण ने ‘लगे ना किसी की नजर, काजल का टीका लगाया करो तुम, ये दीवानों का है शहर’ सुनाकर श्रोताओं को श्रंगार रस में सराबोर कर दिया।
 मोहन चंद्र जोशी ‘मोहंदा’, अशोक उपाध्याय, मेरठ उत्तर प्रदेश से कविता मधुर, विजेन्द्र सैनी, सुशील कुमार और पूनम शर्मा ने भी अपनी रचनाएं सुनाकर महफिल में समा बांधा।
कार्यक्रम में डॉ कमल बच्छावत, श्याम मोहन पांडा, सौरभ कुमार डागा, राज टेकडीवाल, गजे सिंह अंजाना और लता चौहान विशेष रूप से उपस्थित थे।
अंत में सभी को कोरोना गाईड लाईन का पालन करने और करोना वैक्सीन लगवाने के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन डॉ सुनील ‘तरुण’ ने किया।वास्तव में इस कोरोना संक्रमण काल खंड में साहित्यकारों ने आपदा को अवसर में बदल दिया है

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