अब भगवा गैंग का आदिवासियों पर कहर

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झारखंड के सिमडेगा में सात आदिवासी युवकों का सिर मुड़ाया  पिटाई की

आदिवासियों में फुट रहा गुस्सा

विशद कुमार  

झारखंड की राजधानी रांची से 160 किमी दूर  सिमडेगा जिला मुख्यालय। यहां बताना जरूरी होगा कि सिमडेगा जिला मुख्यालय से मात्र कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित झुलन चौक, जो मेन रोड पर है। यह चौक गेरुवा रंग के झंडों से पटा पड़ा है।

यहां से मात्र 10 किमी की दूरी पर बसा है भेड़ीकुदर गांव। जहां बसते हैं खड़िया व उरांव जनजाति के लोग, जिन्होंने काफी पहले ईसाई धर्म अपनाया हुआ है, बावजूद इनमें आदिवासियत आज भी बरकरार है। कहा जा सकता है कि यह क्षेत्र आदिवासी बहुल क्षेत्र या ईसाई बहुल क्षेत्र है, जिस पर भगवा गैंग की बहुत पहले से ही तिरछी नजर रही है। ये लोग हमेशा से इनके खिलाफ बराबर कुछ ना कुछ प्रोपेगंडा फैलाते रहे हैं या किसी न किसी बहाने इनको प्रताड़ित करते रहे हैं। शायद इसी कड़ी में पिछले 16 सितंबर को सुबह छ: बजे लगभग 60—70 की संख्या में भगवा गैंग के लोगों ने गांव के 7 आदिवासियों पर गौ मांस खाने और गौ तस्करी का आरोप लगाकर उनका सिर मुड़वाया, जूता—चप्पल का माला पहनाया, जय श्रीराम का नारा लगवाया, पिटाई की व पूरे क्षेत्र में घुमाया। कुछ लोगों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी, जब पुलिस आई तब हमलावरों ने  और अंत में पुलिस के हवाले भी कर दिया। यह दूसरी बात हुई कि पुलिस ने जांच के बाद उन्हें छोड़ दिया। 16 सितंबर की इस घटना के दिन ही पूर्व जिला परिषद सदस्य निल जस्टीन बेक के सहयोग से उसी दिन अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। 17 सितंबर को एससी-एसीटी थाने में हरिजन ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

जिसके बाद पीड़ित राज सिंह की पत्नी रोजलीन जिन्हें भी नहीं बख्शा गया था, उनके साथ मारपीट की गई थी, उन्होंने सिमडेगा थाना में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई है। कुल 9 लोगों पर नामजद और तीन दर्जन से भी अधिक लोगों पर अज्ञात नाम से प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है। नामजद आरोपियों में नयन केशरी, सोनू सिंह, सोनू नायक, तुलसी साहू, श्रीकांत प्रसाद, दीपक प्रसाद, अमन केशरी, नकुल पातर और राजेन्द्र प्रसाद का नाम शामिल है।

बता दें कि घटना के बारे में सिमडेगा थाना प्रभारी रवीन्द्र सिंह ने बताया कि गौकशी की सूचना पुलिस को दी गई थी, जिसके बाद पुलिस गांव में पहुंची और जांच की, लेकिन गांव के किसी भी घर से गौकशी या गौ मांस होने का कोई सबूत नहीं मिला, जिसके बाद सभी भुक्तभोगियों को थाने में हुई पुछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। रोजलीन ने जो प्राथमिकी दर्ज करवाई है, उस पर कार्रवाई करते हुए 9 में से 4 नामजद आरोपियों सोनू सिंह, सोनू नायक, नयन केशरी और राजेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

बताते चलें कि भगवा गैंग ने भेड़ीकुदर गांव के रहने वाले राज सिंह, दीपक कुल्लू, इमानुएल टेटे, सुगड़ डांग, सुलिन बारला, सोसन डांग और सेम किडो का सिर मुड़वाकर, जूता—चप्पल का माला पहनाकर, जय श्रीराम का नारा लगवाकर, पिटाई की व पूरे क्षेत्र में घुमाया और भेड़ीकुदर गांव में ही स्थित एक बगीचे में लेकर पहुंचे, इस बीच कुछ लोगों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी, थोड़ी देर में पुलिस पहुंची। जब पुलिस आई तब हमलावरों ने युवकों पर गौ तस्करी का आरोप लगाया और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने गांव के हर एक घर की तलाशी ली, लेकिन किसी भी घर से पुलिस को कुछ भी नहीं मिला, फिर उन सभी को थाना ले जाकर पूछताछ की गयी और सभी को थाने से ही छोड़ दिया गया।

पीड़ित राज सिंह कुल्लू ने बताया कि 16 सितंबर की सुबह 6 बजे 60 से 70 की संख्या में लोग मेरे घर पहुंचे और गाली देते हुए मुझे लाठी-डंडे से मारना शुरु कर दिया। इस दौरान मेरी पत्नी रोजलीन कुल्लू मुझे बचाने के लिए बीच-बचाव करने लगी, तब भीड़ में मौजूद युवकों ने जाति सूचक शब्द और अपशब्द बोलते हुए उसके साथ भी धक्का-मुक्की की, जिसके बाद मेरी पत्नी ने बचाव के लिए हल्ला करना शुरु किया। जिससे आसपास के लोग वहां पहुंचे और मारपीट कर रहे युवकों को मना करने लगे। लेकिन युवकों ने उनके साथ भी गाली गलौज की और उनके साथ भी मारपीट करना शुरु कर दिया। गांव पहुंचे युवक बार-बार हमलोगों के उपर गौकशी करने का आरोप लगा रहे थें।

राज सिंह कुल्लू की पत्नी व खुद पीड़िता रोजलीन कुल्लू ने बताया कि गांव पहुंचे बजरंग दल के युवकों ने मेरे पति राज सिंह समेत गांव के सात युवकों को एक जगह कटहल पेड़ के नीचे खड़ा कर दिया और सभी को कुदाल की मुंठ से पीटा, इसके बाद दूसरे टोले में ले जाकर सभी का मुंडन किया। उन लोगों की संख्या काफी अधिक थी, जिसके कारण गांव वाले डर चुके थे और चुपचाप पूरी घटना को देखते रहे। किसी ने हिम्मत करके जब उन्हें ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने उनके साथ भी गाली गलौज की और मारपीट पर उतारू हो गए थे।

26 वर्षीय भुक्तभोगी युवक दीपक कुल्लू ने घटना के बारे में बताया कि, सुबह 6 बजे मैं दूसरे गांव से दूध लेकर अपने गांव पहुंचा, तो मैंने देखा की कुछ बाहरी लोग मेरे गांव में पहुंच कर लाट्ठी डंडे से राज सिंह की पिटाई कर रहे हैं, जब मैंने उनसे पूछा कि आप लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो उन लोगों ने मुझे गाली बकते हुए कहा कि, गौकशी करते हो और पूछते हो कि क्यों मार रहे हैं। फिर उन लोगों ने एक वीडियो दिखाया जिसमें एक बुजूर्ग आदमी ये कह रहा है कि गांव में गौकशी हुई थी, उसी वीडियो के आधार पर वे लोग गांव पहुंचे थे और इस तरह की हरकत कर रहे थे। फिर उन लोगों ने मुझे भी बहुत मारा, दूसरे गांव में ले जाकर हम सभी को बहुत पीटा गया। जब मुझे मुंडन करने के बाद जूता का माला पहनाया गया और जय श्रीराम का नारा लगाने के लिए कहा गया तो मैंने नहीं लगाया, तब उन लोगों ने थेथर (आईपोमिया) के डंडे से मुझे बहुत मारा, उसके बाद मैंने डर से जय श्रीराम का नारा लगाया। घटना के दो दिनों बाद मैंने जब उस आदमी से बात की जिसने वीडियो में कहा था कि गांव में गौकशी हुई है। तब उस आदमी ने कहा कि मुझे मारने की धमकी देकर जबरन उन लोगों ने मुझे ऐसा कहने के लिए कहा था। इस घटना के बाद से गांव के लोग काफी डरे सहमे हैं।

क्षेत्र के पूर्व विधायक व मंत्री रह चुके थियोडोर किडो बताते हैं कि जब भाजपा सत्ता च्यूत होती है, वह समाज में जहरीला माहौल बनाने की तैयारी जुट जाती है। इस घटना में भी भाजपा का ही हाथ है। वे बताते हैं कि इस क्षेत्र में बहुतायत खड़िया समुदाय के लोग बसते हैं जो गौ मांस खाना तो दूर अगर उनके गोशाला में गाय या बैल मर जाय तो उसे खुद छुते नहीं है बल्कि अन्य जातियों से उसे फेकवाते हैं। खड़िया समुदाय के जो लोग ईसाई बने हैं उनका भी वही हाल है।

ताजा खबर के संजय वर्मा बताते हैं कि जब हमने घटना के बारे में बजरंग दल के प्रदेश संयोजक दीपक ठाकुर से बात की क्या इस घटना में बजरंग दल की भूमिका है? तो उन्होंने बताया कि, इस घटना में मेरे संगठन के सदस्यों का हाथ नहीं है, बल्कि इस घटना को क्षेत्रीय स्तर पर संचालित ‘जय भवानी संगठन’ के लोगों ने अंजाम दिया है। ‘जय भवानी संगठन’ के नाम से जिले में एक वाट्सएप्प ग्रुप संचालित है। दीपक ठाकुर ने ये भी कहा कि बीरु पंचायत में बजरंग दल के लोग सक्रिय नहीं हैं।

गौकशी के नाम पर भेड़ीकुदर गांव में घटना को अंजाम देने के लिए जो 60-70 की संख्या में युवक पहुंचे थें, वे किसी एक गांव के नहीं, बल्कि कई गांव के युवक थे, जिससे पता चलता है कि यह किसी निजी दुश्मनी से नहीं, बल्कि संगठनात्मक बैठक कर इस घटना को अंजाम दिया गया है। क्योंकि विभिन्न गांव के युवक अगर एक साथ निर्धारित गांव में सुबह के 6 बजे पहुंचे हैं, तो इसका मतलब ये हुआ कि घटना को अंजाम देने के लिए पूर्व में ही बैठक कर या वाट्सएप्प के माध्यम से बातचीत कर रणनीति तैयार कर ली गई थी। जो भविष्य के लिए काफी खरनाक संकेत है। कहीं न कहीं यह घटना हेमंत सरकार पर भी सवाल खड़ा करती है।

इस मामले को लेकर झारखंड के आदिवासी समुदाय में भगवा गैंग के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है, जो भविष्य में किसी बड़े संघर्ष का संकेत है।

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