कोविड 19: सफाई कर्मियों को सेफ्टी किट दिलाने को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अर्जी लगाई

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जान जोखिम में डाल बिना सेफ्टी किट काम कर रहे सफाई कर्मचारियों के लिए मांग

वाराणसी: कोरोना संकट में सफाई कर्मचारियों का काम दोगुना हो गया है। चिंता की बात ये है कि अभी तक सभी सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण मास्क और दस्ताने तक नहीं मिले हैं। ऐसे में मांग उठ रही है कि सफाई कर्मचारियों को भी कोरोना फाइटर्स माना जाए पूरी दुनिया के लिए विकराल समस्या बन चुके कोरोना वायरस के खिलाफ सफाई कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत में भी जब पूरा देश लॉकडाउन में है, तो जमीन पर इन सभी पेशेवर लोगों को इस संकट से संघर्ष करते देखा जा सकता है। सरकार ने भी इन्हें कोरोना फाइटर्स का नाम दिया है।

कोरोना फाइटर्स में से सफाई कर्मचारी आर्थिक रूप से सबसे कमजोर वर्ग से आते हैं। इसे लेकर विगत माह पहले सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने सरकार से इनकी विशेष मदद करने की अपील की थी। लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ, ताजा हालात को देखते हुए वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने सवाल उठाया है कि सफाई कर्मचारी बिना सेफ्टी किट जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। शहर की साफ-सफाई में कार्यरत किसी भी सफाई कर्मचारी को सेफ्टी किट प्रदान नहीं किया जाता है। जिससे इनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की संभावना हमेशा बनी रहती है। तो वहीं प्रतिदिन सुबह से ही कर्मचारी सफाई व्यवस्था में लग जाते हैं। ताकि शहर में गंदगी न रहे और स्वच्छ वातावरण में लोग सांस ले सकें। लेकिन इन कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ नगर निगम द्वारा खिलवाड़ किया जा रहा है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रख कर सफाई कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है।

बता दें कि सरकार के निर्देशानुसार किसी भी हाल में बिना सुरक्षा मानक पूरा किए सफाई करवाना सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मैनुअल स्कैवेंजिंग कानून 2013 के तहत अपराध है। राजकुमार गुप्ता की मांग है कि कोरोना फाइटर्स में सफाई कर्मचारी सबसे महत्वपूर्ण हैं। सबसे खास बात यह है कि कोरोना संकट के दौरान सफाई कर्मचारियों का काम दोगुना हो गया है।लोगों के घरों में रहने के कारण कूड़ा ज्यादा निकल रहा है। इससे भी चिंता की बात तो ये है कि सभी सफाई कर्मचारियों को ऑक्सीजन मास्क, गम-बूट्स, हाथों में पहनने के वॉटर प्रूफ दस्ताने ऑर वॉटर प्रूफ वर्दी और सैनेटाइजर भी नहीं मिले हैं।

यह एक बेहद जरूरी मांग है। सफाई कर्मचारियों ने किसी तरह की कोई ढील अपने काम मे नहीं की है। वो पूरी मेहनत से जुटे हैं। इन्हे समाज के निचले पायदान पर जरूर समझा जाता है, मगर इनके होने से ही उनकी गदंगी दूर होती है। ये पूरे साल देश के लिए संघर्ष करते हैं। आज ज्यादा जरूरत है तो और अधिक मेहनत कर रहे हैं। वहीं जगह जगह फूल-माला डालकर इनका स्वागत भी किया जा रहा है । यह सब बहुत अच्छा है, मगर सरकार को इनके वेतन का भी ख्याल रखना चाहिए और संविदा ठेका पर काम कर रहे सफाई कर्मियों को स्थाई कर देना चाहिए।

“कोरोना की गंभीरता तो सब जान चुके हैं। इनके पास डॉक्टर्स जैसे संसाधन नहीं हैं, मगर खतरे से तो ये भी जूझ रहे हैं। इनको कोरोना फाइटर्स के समकक्ष ही सुविधाएं मिलनी चाहिए। इनके परिजनों की यही मांग है।”

ऐसे में इन पर बरसाए जा रहे फूल अच्छे तो बहुत लगते हैं, मगर उन्हें रोटी और दूसरी पारिवारिक जरूरत इससे भी ज्यादा प्यारी है। बता दें कि अकेले उत्तर प्रदेश में अब तक दवाई छिड़काव से जुड़े 3 सफाई कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। इनकी सहायता के लिए सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने एक माह पहले ही पीएम मोदी और सीएम योगी को पत्र लिखा था। लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। जिससे आहत होकर सोमवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार और सफाई कर्मचारी आयोग को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग रखी है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सफाई कर्मचारियों को सबसे बड़ा योद्धा बताया है। सफाई कर्मचारियों के लिए स्वच्छता सेनानी शब्द की खोज की गई है। लेकिन अच्छे शब्दों के साथ उनका अच्छी तरह से ख्याल भी रखा जाना चाहिए, क्योंकि ये सभी स्वच्छता सेनानी निम्न मध्यवर्ग से आते हैं।
रिपोर्ट राजकुमार गुप्ता वाराणसी

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