ब्राह्मणवादी-पूंजीवादी हमले के खिलाफ लड़ाई को तेज करने की अपील 

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देश के विभिन्न हिस्सों में रोहित वेमुला को उनके 5वें शहादत दिवस पर याद किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय-कॉलेजों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोहित वेमुला बहुजन छात्र-नौजवानों की चेतना में शामिल हो गये हैं। बता दें कि 17 जनवरी 2016 को  हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या हुई थी। इसी क्रम में 17 जनवरी 2021 को बिहार के भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड के सुरहा गांव में भी छात्र-युवा व ग्रामीण इकट्ठा हुए और रोहित वेमुला को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ आज के दौर में जारी ब्राह्मणवादी-पूंजीवादी हमले पर विस्तार से चर्चा की।
इस मौके पर सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के रिंकु यादव ने कहा कि 2014 में केन्द्र की सरकार में नरेन्द्र मोदी के आने के बाद ब्राह्मणवादी-पूंजीवादी हमले का नया दौर शुरु हुआ। जिसका असर जीवन के हर क्षेत्र में सामने आना शुरु हुआ है। शैक्षणिक परिसरों में भी इस हमले के निशाने पर बहुजन छात्र ही आए। जिसका मुकाबला करते हुए हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला ने शहादत दी।
रोहित वेमुला की शहादत के बाद भी बहुत कुछ नहीं बदला है, विश्वविद्यालय कैंपस, शैक्षणिक-अकादमिक संस्थानों में जातीय भेदभाव की मार बहुजन छात्र समुदाय लगातार झेल रहा है। पिछले दिनों डॉ. पायल तडवी ने आत्महत्या कर ली। वे आदिवासी समाज के भील समुदाय से थीं। पायल तडवी भील जनजाति में पहली लड़की थीं, जो एमबीबीएस के बाद पीजी यानी एमडी की पढ़ाई कर रही थीं। पायल तडवी को सीनियर डॉक्टर्स ने उसे लगातार तंग किया, आरक्षण और रंग के मसले पर नीचा दिखाया। परेशान होकर उसने हॉस्टल के अपने कमरे में आत्महत्या कर ली। पायल तडवी की जान भी ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था और विशेषाधिकार प्राप्त समाज से आने वालों ने ले ली है।
उन्होंने बताया कि आज भी शैक्षणिक-अकादमिक जगत में ब्राह्मणवादी सवर्ण वर्चस्व मजबूत है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वार्षिक रिपोर्ट (2016-17) के अनुसार 30 केंद्रीय विश्वविद्यालय 82 राज्यों के विश्वविद्यालय (सरकारी) में प्रोफेसरों के कुल 31 हजार 446 पदों में सिर्फ 9 हजार 130 पदों पर ही ओबीसी, एससी-एसटी के शिक्षक हैं। उच्च शिक्षा व्यवस्था में कुलपति सबसे निर्णायक होता है, विशेषकर नियुक्ति एवं पदोन्नति के मामले में। 5 जनवरी 2018 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा दी गई सूचना के अनुसार देश के (उस समय के) 496 कुलपतियों में 6 एससी, 6 एसटी और 36 ओबीसी समुदाय के थे। यानि उच्च जातियों के 90.33 प्रतिशत और ओबीसी 7.23 प्रतिशत, एससी 1.2 प्रतिशत और एसटी 1.2 प्रतिशत।
नरेन्द्र मोदी सरकार लगातार सवर्ण वर्चस्व को शैक्षणिक-अकादमिक संस्थानों में मजबूत कर रही है। सवर्णों को दिया गया 10 प्रतिशत आरक्षण इस वर्चस्व को स्थायित्व प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला की लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक न्याय पर बढ़ते हमले, निजीकरण और नई शिक्षा नीति-2020 के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने की जरूरत है। देशी-विदेशी पूंजीपति पक्षधर तीनों कृषि कानूनों व चारों श्रम संहिताओं के खिलाफ किसानों-मजदूरों की लड़ाई के साथ मजबूती से खड़ा होना होगा।
इस मौके पर गौतम कुमार प्रीतम ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों के साथ मजदूर कानून में बदलाव और तेज रफ्तार में जारी निजीकरण की मार सबसे ज्यादा बहुजनों पर ही पड़ेगी। ब्राह्मणवादी-पूंजीवादी गुलामी का शिकंजा कसेगा। इसलिए बहुजनों को पूरी ताकत से लड़ाई में खड़ा होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि संविधान के आधार पर लोकतंत्र के रास्ते देश को चलाने के बजाय नरेन्द्र मोदी सरकार मनुविधान थोपने और तानाशाही के रास्ते देश को चलाने की ओर बढ रही है। जो कुछ भी हक-अधिकार व सम्मान बहुजनों के पास है, वह भी छीना जा रहा है। बहुजनों को निर्णायक लड़ाई लड़नी  होगी, अन्यथा हम अपनी नस्लों को बर्बर गुलामी उपहार में सौपेंगे।
रोहित वेमुला, पायल तडवी जैसे मामलों ने इस देश के आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के केन्द्रों की बर्बर हकीकत को उजागर किया है। जो लोग यह प्रचारित करते थे कि अब ‘जाति’ कहां है! यह तो केवल ग्रामीण पिछड़े इलाके में ही अब अस्तित्व में है। इस दावे व प्रचार का पर्दाफाश हुआ है। इस देश के ज्ञान-विज्ञान के आधुनिक केन्द्र भी बर्बर ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था को अपने भीतर समेटे हुए हैं।
अंजनी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अब तक विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से जाति आधारित भेद-भाव को खत्म करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। अंत में ब्राह्मणवादी-पूंजीवादी हमले के खिलाफ लड़ाई को तेज करने के संकल्प के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।
इस मौके पर अनुपम आशीष, गौरव पासवान के साथ बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन के पांडव शर्मा, सौरव पासवान, निर्भय, अमित, अखिलेश शर्मा, चतुरी शर्मा, मनोज मंडल,  गंगा कुमार, शशिभूषण मंडल, अंकेश, धीरज, जागो शर्मा, ब्रजेश, राजकुमार, कुशो शर्मा, योगेन्द्र पासवान, अंग्रेज शर्मा, दिनकर, विक्की साह, प्रिंस साह, गोपाल मंडल, निरंजन शर्मा, रंजन कुमार, आयुष पासवान, डायमंड पासवान, सचिन मंडल प्रमुख तौर पर उपस्थित थे।
  • विशद कुमार

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