मुक्तिबोध जिम्मेदार कवि हैं और उन्हें पढ़े जाने की जरूरत हैः डॉ. संजय श्रीवास्तव

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अपने कुशल मंच संचालन से हिंदी के विभागाध्यक्ष डॉ. हसीन खान ने श्रोताओं को बाँधे रखा

आजमगढ़ः  हिंदी नई कविता के सशक्त हस्ताक्षर और फैंटेसी के जनक कहे जाने वाले महत्वपूर्ण कवि गजानन माधव मुक्तिबोध की जयंती के अवसर पर आज श्री गांधी पीजी कॉलेज मालटारी हिंदी विभाग, एवम प्रगतिशील लेखक संघ इकाई आजमगढ़ के तत्वाधान में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया । संगोष्ठी का विषय “मुक्तिबोध की रचना धर्मिता और हमारा समय” था। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में वाराणसी से आई डॉ वंदना चौबे जी थी उन्होंने अपने उद्बोधन में मुक्तिबोध साहित्य के महत्वपूर्ण कई बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। जनता और तीसरी दुनियां के कवि मुक्तिबोध को एक असाधारण कवि बताया तथा उनकी महत्वपूर्ण रचना ब्रह्मराक्षस, अंधेरे में, चांद का मुंह टेढ़ा तथा उनके उपन्यास विपात्र तथा कहानियों के आधार पर मुक्तिबोध की वैचारिक दृष्टि पर सहज रूप से प्रकाश डाला।

प्रगति शील लेखक संघ उ प्र के महासचिव डॉ.संजय श्रीवास्तव ने अपने बीज वक्तव्य में मुक्तिबोध को एक जिम्मेदार कवि के रूप में बताया जिन्हें हमें आज पढ़ने की जरूरत है। अपने उद्घाटन वक्तव्य में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर शुचिता श्रीवास्तव ने मुक्तिबोध के साहित्य को मार्क्स, एंगल , टायनबी, इलियट, गांधी और प्रेमचंद से प्रभावित बताकर एक बड़े कवि के रूप में रेखांकित किया। इस संगोष्ठी की अध्यक्षता जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार गीतकार साहित्य भूषण से सम्मानित डॉ राजाराम सिंह ने किया । संगोष्ठी का आयोजन तथा सफल संचालन हिंदी विभाग के अध्यक्ष और प्रगतिशील लेखक संघ आज़मगढ़ के महासचिव प्रोफेसर हसीन खान ने किया।
इस संगोष्ठी के बाद काव्य पाठ हुआ । जिसमें डॉ राजाराम, युवा शायर सलमान घोसवी, गीतकार शाहआलम सांवरिया, जितेंद्र कुमार नूर ,इंदु श्रीवास्तव, डॉ रंजना यादव सहित अन्य कई कवियों ने कविता पाठ किया । साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए “मुक्तिबोध साहित्य शिखर सम्मान “डॉ विधिचंद यादव, डॉ वंदना चौबे, डॉ संजय श्रीवास्तव ,डॉ राजाराम ,प्रो. शुचिता श्रीवास्तव, प्रो. हसीन खान ,डॉ. बालचंद प्रसाद और शोध छात्रा प्रियंका यादव को दिया गया। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के समस्त शिक्षक साथी प्रो. अखिलेश चंद्र, प्रो. प्रेमचंद यादव प्रो. प्रशांत कुमार राय डॉ नीतेश जायसवाल, डॉ दुर्गेश कुमार, राजेश यादव ,डॉ शैलेश सिंह डॉ मदन गोपाल श्रीवास्तव के अतिरिक्त कामरेड जितेंद्र पांडे, शाहनवाज़ सहित महाविद्यालय के समस्त शोधार्थी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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