दि वायर पर छापों की बीयूजे ने की निंदा

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बृहन्मुंबई यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्टस

23-25 प्रॉस्पेक्ट चेंबर्स एनेक्स, फोर्ट, मुंबई 400 001

01.11.2022

दि वायर पर छापों की बीयूजे ने निंदा की

बृहन्मुंबई यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (बीयूजे) ने समाचार पोर्टल के वरिष्ठ संपादकों के नई दिल्ली व मुंबई में स्थित आवासों पर सोमवार शाम और मंगलवार तड़के छापों की निंदा की है।

छापे भारतीय जनता पार्टी के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के राष्ट्रीय प्रभारी अमित मालवीय की शिकायत के आधार पर नई दिल्ली में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मारे गये थे। आरोप फर्जीवाड़े, मानहानि व आपराधिक षड्यंत्र के हैं।

दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के दस्तों ने द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदाराजन, एम के वेणु और सिद्धार्थ भाटिया, डेपुटी संपादक जानवी सेन और प्रोडक्ट-कम-बिजनेस हेड मिथुन किदांबी के घरों पर तलाशी व जब्ती अभियान अपराध प्रक्रिया संहिता के तहत सेक्शन 91 नोटिस के संदर्भ में चलाया। सभी पांचों ने पुलिस का पूरा सहयोग किया। लेकिन, अपराध शाखा के लोग समाचार पोर्टल के नई दिल्ली कार्यालय से हैश वैल्यू, अर्थात किसी इलेक्ट्रिक डिवाइस में दर्ज डाटा का सांख्यिकी मूल्य, दिये बिना कुछ डिवाईस ले गये।

मालवीय की शिकायत का समय फेसबुक, इंस्टाग्राम व व्हाट्सएप की अभिभावक कंपनी मेटा के एक्सचेक कार्यक्रम पर किये गये समाचार द वायर की तरफ से वापस लिये जाने के तुरंत बाद का था। समाचारों में आरोप लगाया गया था कि भारतीय जनता पार्टी नेताओं को इन प्लेटफॉर्म से सामग्री हटाने के लिए विशेष दर्जा दिया गया था। समाचारों की आंतरिक समीक्षा में विसंगतियों का खुलासा होने के तुरंत बाद 23 अक्तूबर को जारी बयान में द वायर ने इन समाचारों को वापस लिया।

27 अक्तूबर को एक संपादकीय बयान में समाचार पोर्टल ने स्वीकार किया कि “गूढ़ तकनीकी प्रमाण – भले ही वह न्यूज़रूम के किसी सदस्य ने लाया हो या किसी फ्रीलांसर ने – और पुष्टि की सभी प्रक्रियाएं जिनमें तकनीकी कौशल का इस्तेमाल होता है, क्षेत्र के स्वतंत्र व प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की तरफ से क्रॉसचेक किया जाना चाहिए। हमने यह प्रकाशन के बाद करने के बजाय पहले किया होता, तो हमारी मेटा जांच टीम के सदस्य की तरफ से की गई धोखाधड़ी का समय रहते पता चलना सुनिश्चित हो जाता।”

उक्त समाचारों पर विभिन्न व स्वतंत्र स्रोतों से संदेहव्यक्त करने पर द वायर के संपादकों ने जिस तरह का प्रतिसाद दिया, बीयूजे उसका स्वागत करता है।

द वायर की चूक की अनदेखी किये बिना भी यह याद दिलाना आवश्यक होगा कि निकट अतीत में मीडिया के अतिश्योक्तिपूर्ण और निराधार समाचारों के कई उदाहरण हैं, जैसे करंसी नोट में चिप के बेतुके समाचार, गलवान में चीनी सैनिकों के मारे जाने के फर्जी व्हाट्सएप फॉरवर्ड या बेकाबू नफरत फैलाने वाले या भड़काऊ समाचार। ऐसे “समाचारों” को

पूरी छूट मिलती रही है और ऐसे समाचारों ने भारत को ऐसे उत्तर सत्य संकट की स्थिति में डाल दिया है, जहां लोगों का भरोसेमंद जानकारी पाने का अधिकार ही खतरे में पड़ गया है।

इसी संदर्भ में बीयूजे मानता है कि द वायर का समाचारों को वापस लेना और संपादकीय चूक की आंतरिक समीक्षा करने का वायदा स्वनियमन के सिद्धांत की श्रेष्ठ परंपराओं के अनुकूल है। द वायर की चूक मानने के तुरंत बाद भाजपा का फायदा । उठाना और दिल्ली पुलिस की छापेमारी दुखद और निंदनीय है। स्पष्ट रूप से, द वायर की स्वतंत्र व आलोचकीय पोर्टल की छवि को देखते हुए कहा जा सकता है कि यहां प्रतिशोध की राजनीति की जा रही है। वैसे भी द वायर लंबे अर्से से सरकारी नीतियों व कार्यक्रमों पर समाचारों को लेकर निशाने पर रहा है और वर्तमान छापेमारी अतिश्योक्तिपूर्ण, मनमानीपूर्ण है।

बीयूजे मानता है कि समाचार पोर्टल के समाचारों के स्रोतों के बारे में और क्या दस्तावेज गढ़ने का कार्य फंसाने की बड़ी साजिश का हिस्सा था,जानना बाकी है। लेकिन, वर्तमान हालात में बीयूजे मानता है कि द वायर की संपादकीय चूक दुखद लेकिन चूक थी और इसके पीछे कोई गलत मंतव्य नहीं था।

आज, दोनों सोशल मीडिया कंपनियां और सरकार सेंसरिंग, सामग्री हटाने व प्लांट करने में संलिप्त हैं। सरकार और कार्पोरेशनों के जरिये पेगासस जैसा स्पायवेयर लगाया जाना मानवीय आदतों और डिजीटल प्रौद्योगिकी के गूढ़ व गुंथे संबंधों से उपजे प्रौद्योगिकी के दोहन का अशुभ पहलू है। यहां सभी मीडियाकर्मियों के लिए सबक छिपा है और डिजीटल जोड़तोड की पेचीदगियों के प्रति ज्यादा सचेत रहने की आवश्यकता है।

हम मानते हैं कि द वायर पर ताजा हमले को पृथकता में नहीं देखना चाहिए। यह केवल वर्तमान शासन के आलोचकों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला नहीं है। छापेमारी की कार्रवाइयां मेक इन इंडिया तमाशे का हिस्सा हैं जहां सभी तरह का प्रतिरोध “देशद्रोह” है और सभी आंदोलन “अर्बन नक्सलवाद” की प्रजातियां। भारतीय राज्यसत्ता फंदा कस रही है और पूंजीपति तालियां पीट रहे हैं।

इंदर कुमार जैन महासचिव

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