पूंजीवादी लोकतंत्र की नसों में सामंतवाद का खून

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1914
पूँजीवाद की रानियाँ
उनके सम्बंध तय होते हैं स्वंयवर की तरह ही
वे आज़मातीं हैं वर्चस्व, ताक़त और अधिकाराना तराज़ू पर
अपने लिए हज़ारों में एक मर्द-मैचो
चुनती हैं
नाइट-बाइकर्स की पिछली सीट पर वे बख़ूबी इठलाहट से बैठती हैं
बरिस्ता में कॉफ़ी पीकर वेटर को देती हैं उदारता से टिप
आर्चीज़ गैलरी से गुलाबी पैकेटों में ख़रीदती रहती हैं कई तरह के प्यार-उपहार
मानक-मानदंडों में बने रहने के लिए वे जिम जाती हैं
और रात नरम गुलाबी टेडी बियरों के बीच सो जाती हैं।
उनकी सैंडिल की सधी हुई नोक उन्हें पूरे अनुपात में रखती है
उनके बैठकों में किताबों की भी कम नहीं है भरमार
प्रसाधनों से इतना अटा पड़ा है बाज़ार कि
क्या पहनें और क्या फेंकें
पहनने को वे क्या नहीं पहन सकती हैं
शादी के लिए वे भारी रत्नजड़ित लहंगे खरीदती हैं
रानियों सा श्रृंगार करती हैं
उनको ज़मीन पर एकमुश्त खड़ा करने के लिए उन्हें
चार जन पकड़ते हैं
अहाता फूलों की सजावट से भर जाता है
जिस पर टिका है फूलों की खेती करने वालों का रोज़गार
बारातों में कामगारों के थके हारे बदन पर
सैनिकनुमा लबादे डाल
छत्र-ध्वज लिए की सेना बनाई जाती है
और अच्छे भले मनुष्य को द्वारपाल बनाकर भाले के साथ खड़ा कर दिया जाता है
क़िला आमेर और नाहरगढ़ के शहर
जयपुर जाना हुआ था एक बार
वहां रानियों का मशहूर हवामहल भी है
जिसमें बुर्के की तरह आँख बराबर झरोखे हैं।
झरोखे इस तकनीक और दिशा में बने हुए हैं कि रानियाँ
उनमें से बहुत दूर दूर तक देख सकती थीं
मनोरंजन के लिए खेल-तमाशे, मल्ल युध्द देख सकती थीं
एक राजा की अनेक रानियों के कमरों का अपार्टमेंट है वहां
बड़े-बड़े मज़बूत पत्थरों का स्थापत्य देखिए
होने को तो वहां रानियों के लिए ज़बरदस्त तकनीक से गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्म कमरों की पूरी व्यवस्था भी है
उनके हवा-पानी के लिए फूलों की भरी पूरी बगिया है अहाते भर
कोई कमी नहीं रही होगी उनकी सुंदरता, स्वास्थ्य, शान और आराम में
वहां युद्ध के बाद लौटे राजा के लिए सभी रानियों के कमरों के लिए गुप्त दरवाज़े थे
जिससे बेख़बर रानियां
अपने भावी बेटों को राजा बनाने की जुगत में
पटरानी बनने के ख़्वाब लिए दिन-रात गुप्त योजनाएं करती थीं
अद्भुत तो यह कि पटरानी की योग्यता जाँचने के लिए
बेहद संकरे दरवाज़े का विशेष कमरा भी था वहां
बमुश्किल किसी बच्चे के पैठने भर का दरवाज़ा
जो इस दरवाज़े बराबर देह की हो, वही हो सकती थी पटरानी
इतनी तो कमनीय होनी ही चाहिए पटरानी
महलों में रत्न-जड़ित वजनी वस्त्रों की पूरी शृंखला थी
क़ीमती और भारी लहंगों को पहन
रानियाँ ज़मीन पर नहीं चल सकती थीं
इसलिए संग्रहालय में उनके लिए
क़ीमती लकड़ी से बने आकर्षक व्हीलचेयर भी रखे हुए थे।
डॉ. वंदना चौबे

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