प्रदेश अध्यक्ष व जिला अध्यक्ष की बर्खास्तगी से आक्रोशित राज्य भर के 5000 मनरेगा कर्मियों ने हड़ताल में डटे रहने का लिया निर्णय

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विशद कुमार

प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय एवं धनबाद के जिला अध्यक्ष मुकेश राम के बर्खास्तगी से आक्रोशित राज्य भर के 5000 मनरेगा कर्मियों ने हड़ताल डटे रहने का निर्णय लिया है।
विदित हो कि 10 अगस्त को शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो से हुए सकारात्मक वार्ता में अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई थी तथा राज्य भर के मनरेगा कर्मियों ने हड़ताल को स्थगित करते हुए काम पर लौटने का मन बना लिया था। लेकिन विभागीय अधिकारियों के आदेश पर संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं धनबाद के जिला अध्यक्ष को बदले की भावना से ग्रसित होकर, आंदोलन को कुचलने तथा हड़ताली मनरेगा कर्मियों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से, झूठा गबन का आरोप लगाकर बर्खास्तगी का आदेश निर्गत कर दिया गया है। जिसके कारण 11 अगस्त को जूम—एप के माध्यम से कॉन्फ्रेंस बैठक कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक बर्खास्त साथियों की सेवा वापसी नहीं होती है, तब तक राज्य भर के मनरेगा कर्मी हड़ताल पर डटे रहेंगे तथा आंदोलन को उग्र करते हुए माननीय मुख्यमंत्री को सामूहिक इस्तीफा सौंपेंगे।


मनरेगा कर्मियों ने मनरेगा कमिश्नर पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये पिछले पांच सालों से मनरेगा कमिश्नर के पद पर बने हुए हैं तथा मनरेगा को मनमाने ढंग से चलाना चाहते हैं। हड़ताल के पहले ही दिन से इन्होंने आंदोलन को कुचलने का काम किया है। ये हमेशा मनरेगा कर्मियों का अहित करना चाहते हैं। इनके कार्यकाल में दर्जनों मनरेगा कर्मी हाइपोटेंशन ब्रेन हेमरेज तथा आत्महत्या के कारण मृत हो गए हैं। अतः राज्य भर के मनरेगा कर्मियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि मनरेगा कमिश्नर की उपस्थिति में कोई वार्ता नहीं करेंगे, तथा ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से  ऐसे तानाशाह अधिकारियों को हटाने की मांग करेंगे।
संघ द्वारा निर्णय लिया गया है कि बर्खास्त साथियों की वापसी होने से पहले राज्य भर का कोई भी मनरेगा कर्मी हड़ताल से वापस नहीं होगा। संघ ने कहा है कि ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम द्वारा वार्ता के दौरान यह भी आश्वासन दिया गया था कि हड़ताल के दौरान जितने भी कार्रवाई हुए हैं उसे वापस लिया जाएगा, किंतु अधिकारियों ने मंत्री जी के बातों को हल्के में लेते हुए अनसुना कर दिया तथा प्रदेश अध्यक्ष की बर्खास्तगी का पत्र निरस्त नहीं किया। इसलिए अब इनके बातों पर भरोसा करने का कोई प्रश्न नहीं है। जब तक लिखित रूप से वार्ता नहीं हो जाता है तब तक राज्य भर के मनरेगा कर्मी हड़ताल पर डटे रहेंगे।

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