प्रशांत भूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सजा देने के फैसले के विरोध प्रदर्शन

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* विशद कुमार

”प्रशांत भूषण पर अवमानना का मुकदमा निराधार, सुप्रीम कोर्ट सजा मुक्त करे” इस बैनर के साथ ‘लोकतांत्रिक जन पहल’ द्वारा 31 अगस्त को पटना के कारगिल चौक पर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रर्दशन में महिलाओं सहित बड़ी संख्या में अन्य लोग शामिल थे। लोकतांत्रिक जन पहल ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की निंदा की और कहा कि एक रुपए का जुर्माना लगाना और न देने पर तीन महीने की जेल एवं तीन साल तक वकालत पर रोक, यह एक बेतुका फैसला है। इस फैसले ने न्यायालय के विवेक और विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है। ‘लोजप’ का मानना है कि यह फैसला हमारे संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ तो है ही, सुनवाई की पूरी प्रक्रिया, न्याय की नैसर्गिक प्रक्रिया का भी उल्लंघन है।
लोकतांत्रिक जन पहल ने कहा है कि प्रशांत  भूषण ने न्यायिक प्रक्रिया में कभी बाधा नहीं पहुंचायी बल्कि वह न्यायिक दायरे में रहकर आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के द्वारा निजी तौर पर मर्यादा का उलंघन किए जाने पर टिप्पणी की थी।


कारगिल चौक पर विरोध प्रर्दशन में शामिल लोग नारों की तख्तियां लिए आवाज बुलंद कर रहे थे। तख्तियों पर लिखा था, अवमानना की आड़ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाना असंवैधानिक, जज के निजी अमर्यादित आचरण की आलोचना अवमानना नहीं, न्यायिक प्रक्रिया का लोकतान्त्रिकरण करो, रिटायर जजों की पुनर्नियुक्ति बंद करो, न्यायपालिका में उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार पर रोक लगाओ, हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के जजों की बहाली में आरक्षण लागू करो, न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करो और न्यायपालिका जनता के प्रति जवाबदेह है।
प्रर्दशन में शामिल प्रमुख लोगों में कंचन बाला, सुधा वर्गीज, डोरोथी, फ्लोरिन, असृता, आसमां खान, मणिलाल एडवोकेट, शैलेन्द्र प्रताप एडवोकेट, निर्मल नंदी, विनोद रंजन, कृष्ण मुरारी, अशर्फी सदा, अनवारूल होदा, अनुपम प्रियदर्शी, आजमी बारी एडवोकेट, कपिलेश्वर जी, ऋषि आनंद, विवेक, अनूप कुमार सिन्हा, प्रवीण कुमार मधु, प्रो सतीश, एम आजम, जावेद अख्तर, मनोज प्रभावी, राजकुमार और मनहर कृष्ण अतुल, मो आरज़ू और मोनाजिर हसन के नाम उल्लेखनीय हैं।

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